TCS को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका, ट्रेड सीक्रेट केस में अपील खारिज

TCS (Tata Consultancy Services) को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। ट्रेड सीक्रेट केस में कंपनी की अपील खारिज कर दी गई है, जिससे IT सेक्टर और ग्लोबल

टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस के बोर्ड में चल रही खींचतान के बीच Tata Consultancy Services (TCS) को एक बड़ा कानूनी झटका लगा है। कंपनी ने मंगलवार को एक्सचेंज फाइलिंग में जानकारी दी कि अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने ट्रेड सीक्रेट से जुड़े एक मामले में दायर उसकी याचिका को खारिज कर दिया है।

बिजनेस न्यूज़: टाटा समूह की प्रमुख आईटी कंपनी Tata Consultancy Services (TCS) को अमेरिका में कानूनी लड़ाई में बड़ा झटका लगा है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रेड सीक्रेट मामले में कंपनी की याचिका को खारिज कर दिया है, जिससे TCS पर करीब 220 मिलियन डॉलर (लगभग ₹2,000 करोड़) का वित्तीय असर पड़ेगा। यह फैसला ऐसे समय आया है जब टाटा समूह के भीतर टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस को लेकर आंतरिक चर्चा और असहमति की खबरें भी सुर्खियों में हैं।

क्या है पूरा मामला?

यह विवाद वर्ष 2019 में शुरू हुआ था, जब अमेरिकी कंपनी DXC Technology (पूर्व में Computer Sciences Corporation) ने TCS के खिलाफ डलास की फेडरल कोर्ट में मुकदमा दायर किया था। आरोप था कि TCS ने एक इंश्योरेंस प्लेटफॉर्म बनाने के लिए एक दूसरी कंपनी “Transamerica” के लगभग 2,200 कर्मचारियों को नियुक्त किया और उनके जरिए संवेदनशील व्यापारिक जानकारी (trade secrets) का इस्तेमाल किया।

कोर्ट का फैसला और जुर्माना

TCS को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका, ट्रेड सीक्रेट केस में अपील खारिज

2023 में जूरी ने माना कि TCS पर जानबूझकर ट्रेड सीक्रेट्स के दुरुपयोग का आरोप सही है और लगभग 210 मिलियन डॉलर का हर्जाना देने की सिफारिश की। बाद में अमेरिकी जिला अदालत के जज ब्रेंटली स्टार ने इस राशि को घटाकर 168 मिलियन डॉलर कर दिया, जिसमें शामिल थे—

  • 56 मिलियन डॉलर क्षतिपूर्ति (compensatory damages)
  • 112 मिलियन डॉलर दंडात्मक हर्जाना (punitive damages)

2025 में फिफ्थ सर्किट कोर्ट ऑफ अपील्स ने भी इस फैसले को बरकरार रखा।

सुप्रीम कोर्ट में क्यों गई थी TCS?

TCS ने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में दलील दी थी कि बिना वास्तविक नुकसान साबित किए “अनुचित लाभ” के आधार पर हर्जाना तय नहीं किया जा सकता। साथ ही कंपनी ने कहा था कि दंडात्मक हर्जाना अत्यधिक है और इसे कम किया जाना चाहिए। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने रिट ऑफ सर्टियोरारी (certiorari) याचिका स्वीकार करने से इनकार कर दिया, जिससे निचली अदालत का फैसला अंतिम रूप से कायम हो गया।

कंपनी ने स्टॉक एक्सचेंज को दी गई जानकारी में बताया कि, इस मामले में पहले ही 150 मिलियन डॉलर का प्रावधान किया जा चुका है. अब अतिरिक्त 70 मिलियन डॉलर (ब्याज और कानूनी खर्च सहित) का प्रावधान किया जाएगा। यह खर्च वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में एक बार के असाधारण खर्च के रूप में दिखाया जाएगा। इस फैसले का कुल प्रभाव करीब 220 मिलियन डॉलर (लगभग ₹2,000 करोड़) आंका जा रहा है। हालांकि कंपनी ने पहले से आंशिक प्रावधान कर रखा था, जिससे तत्काल बैलेंस शीट पर बड़ा झटका सीमित रहेगा।

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