आईटी सेक्टर में इन दिनों वर्क कल्चर को लेकर लगातार विवाद सामने आ रहे हैं। टीसीएस और इन्फोसिस के बाद अब टेक महिंद्रा भी सुर्खियों में आ गई है।ताजा मामला तब चर्चा में आया जब X (पूर्व में ट्विटर) पर आशुतोष के. दुबे की एक पोस्ट का स्क्रीनशॉट वायरल हुआ।
बिजनेस न्यूज़: भारत के आईटी सेक्टर में इन दिनों कार्य संस्कृति (वर्क कल्चर) को लेकर लगातार विवाद सामने आ रहे हैं। हाल ही में Tech Mahindra एक नए विवाद के चलते सुर्खियों में आ गई है। सोशल मीडिया पर वायरल एक पोस्ट में दावा किया गया कि कंपनी के मुंबई स्थित कार्यालय में रमजान के दौरान ‘फुटवियर-फ्री जोन’ बनाया गया था। हालांकि, कंपनी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें पूरी तरह गलत और भ्रामक बताया है।
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद तब शुरू हुआ जब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट का स्क्रीनशॉट वायरल हुआ। इस पोस्ट में दावा किया गया कि मुंबई के गोरेगांव स्थित Tech Mahindra ऑफिस की कैंटीन को रमजान के दौरान नमाज और इफ्तार के लिए ‘फुटवियर-फ्री जोन’ घोषित किया गया था। इस दावे ने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी और कई यूजर्स ने इसे कार्यस्थल पर धार्मिक प्राथमिकता से जोड़कर देखा।
Tech Mahindra ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा कि आंतरिक जांच में ये आरोप पूरी तरह गलत और बेबुनियाद पाए गए हैं। कंपनी के अनुसार, उसने कभी भी किसी विशेष धर्म के आधार पर ऐसी कोई व्यवस्था लागू नहीं की। कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि वह एक समावेशी (inclusive) कार्यस्थल बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है, जहां सभी कर्मचारियों को समान सम्मान और अवसर मिलते हैं।
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TCS विवाद के बाद बढ़ी संवेदनशीलता
इस मामले से पहले Tata Consultancy Services (TCS) का नासिक विवाद भी काफी चर्चा में रहा था। वहां कर्मचारियों ने यौन उत्पीड़न, धमकी और धार्मिक दबाव जैसे गंभीर आरोप लगाए थे। इस मामले में कई FIR दर्ज की गईं और पुलिस ने जांच के दायरे को बढ़ाते हुए विभिन्न एजेंसियों से सहयोग लिया। अब तक कई कर्मचारियों को गिरफ्तार भी किया जा चुका है। इस घटना ने आईटी सेक्टर में कार्यस्थल की सुरक्षा और नैतिकता पर गंभीर सवाल खड़े किए।
TCS के बाद Infosys भी विवादों में घिर गई थी। पुणे स्थित BPM यूनिट से जुड़े कुछ सोशल मीडिया पोस्ट्स में महिला कर्मचारियों के साथ कथित दुर्व्यवहार के आरोप लगाए गए थे। हालांकि बाद में ये पोस्ट हटा दिए गए, लेकिन कंपनी ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए अपनी “जीरो टॉलरेंस” नीति दोहराई। Infosys ने कहा कि वह किसी भी प्रकार के उत्पीड़न या भेदभाव को बर्दाश्त नहीं करती और हर शिकायत की निष्पक्ष जांच की जाती है।
हाल के इन घटनाक्रमों से यह साफ होता है कि सोशल मीडिया का प्रभाव कॉर्पोरेट प्रतिष्ठा पर तेजी से बढ़ रहा है। किसी भी पोस्ट या आरोप के वायरल होते ही कंपनियों को तुरंत प्रतिक्रिया देनी पड़ती है।











