तेलंगाना सरकार की कैबिनेट शुक्रवार को मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी की अध्यक्षता में महत्वपूर्ण बैठक करेगी। बैठक में पलामुरु-रंगारेड्डी सिंचाई परियोजना, हैदराबाद मेट्रो विस्तार, भूमि अधिग्रहण, संशोधित परियोजना लागत और अन्य विकास प्रस्तावों पर अहम निर्णय लिए जाने की संभावना है।
हैदराबाद: तेलंगाना सरकार की शुक्रवार को होने वाली कैबिनेट बैठक राज्य के विकास और बुनियादी ढांचे से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों के कारण चर्चा का केंद्र बनी हुई है। मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी की अध्यक्षता में दोपहर 3 बजे सचिवालय में होने वाली इस बैठक में सिंचाई परियोजनाओं की संशोधित लागत, हैदराबाद मेट्रो रेल परियोजना की प्रगति, भूमि अधिग्रहण और अन्य प्रशासनिक प्रस्तावों पर विस्तार से विचार किया जाएगा। राज्य सरकार के लिए यह बैठक इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि कई ऐसी परियोजनाएं हैं, जिनका भविष्य लंबे समय से लंबित मंजूरियों और वित्तीय निर्णयों पर निर्भर है। यदि कैबिनेट इन प्रस्तावों को मंजूरी देती है, तो कई विकास परियोजनाओं को नई गति मिल सकती है।
पलामुरु-रंगारेड्डी लिफ्ट सिंचाई परियोजना पर रहेगा विशेष फोकस
बैठक का सबसे महत्वपूर्ण एजेंडा पलामुरु-रंगारेड्डी लिफ्ट इरिगेशन स्कीम (PRLIS) से जुड़ा माना जा रहा है। यह परियोजना तेलंगाना के सूखा प्रभावित क्षेत्रों तक सिंचाई का पानी पहुंचाने के उद्देश्य से तैयार की जा रही है और इसे राज्य की सबसे बड़ी जल संसाधन योजनाओं में शामिल किया जाता है। सूत्रों के अनुसार परियोजना के दो पैकेजों की संशोधित लागत (Revised Cost Estimates) को कैबिनेट के सामने रखा जाएगा। निर्माण के दौरान बढ़ती लागत, सामग्री की कीमतों में वृद्धि और तकनीकी बदलावों के कारण परियोजना के बजट में संशोधन की आवश्यकता महसूस की गई है। सरकार का मानना है कि संशोधित लागत को मंजूरी मिलने से परियोजना के निर्माण कार्य में तेजी आएगी और भविष्य में वित्तीय बाधाएं कम होंगी।
अन्य सिंचाई परियोजनाओं की लागत पर भी हो सकती है चर्चा
कैबिनेट बैठक में केवल पलामुरु-रंगारेड्डी परियोजना ही नहीं, बल्कि राज्य की अन्य सिंचाई योजनाओं की संशोधित लागत पर भी चर्चा होने की संभावना है। पिछले कुछ वर्षों में निर्माण सामग्री, श्रम लागत और तकनीकी आवश्यकताओं में लगातार वृद्धि हुई है। ऐसे में कई परियोजनाओं का मूल बजट वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप नहीं रह गया है। सरकार चाहती है कि परियोजनाओं को बीच में रोकने के बजाय वित्तीय पुनर्मूल्यांकन के जरिए समय पर पूरा किया जाए। यदि इन संशोधित लागत प्रस्तावों को मंजूरी मिलती है, तो इससे राज्य की जल प्रबंधन और कृषि क्षेत्र की योजनाओं को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
हैदराबाद मेट्रो रेल परियोजना भी एजेंडे में
बैठक में हैदराबाद मेट्रो रेल परियोजना का भविष्य भी प्रमुख विषय रहेगा। विशेष रूप से पहले चरण के विस्तार के लिए आवश्यक भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया और वित्तीय संसाधनों पर चर्चा की जाएगी। बताया जा रहा है कि इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉर्पोरेशन (IRFC) से प्रस्तावित ऋण स्वीकृति में देरी के कारण कई प्रशासनिक प्रक्रियाएं प्रभावित हुई हैं। इसी वजह से कुछ हिस्सों में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया भी अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ पाई है। कैबिनेट इन चुनौतियों का समाधान तलाशने के लिए विभिन्न विकल्पों पर विचार कर सकती है।
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मेट्रो के दूसरे चरण पर भी हो सकता है फैसला
हैदराबाद मेट्रो रेल के दूसरे चरण को लेकर भी सरकार की रणनीति बैठक में चर्चा का विषय रहने की संभावना है। दूसरे चरण के विस्तार के लिए केंद्र सरकार से आवश्यक मंजूरियों और वित्तीय सहयोग का इंतजार किया जा रहा है। राज्य सरकार यह भी समीक्षा कर सकती है कि अब तक केंद्र से क्या प्रगति हुई है और आगे परियोजना को गति देने के लिए किन कदमों की आवश्यकता होगी। यदि इस संबंध में कोई महत्वपूर्ण निर्णय लिया जाता है, तो इससे हैदराबाद के सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क के विस्तार को नई दिशा मिल सकती है।
विकास परियोजनाओं को गति देने की तैयारी
कैबिनेट बैठक में केवल सिंचाई और मेट्रो ही नहीं, बल्कि राज्य के विभिन्न विभागों से जुड़े कई विकास प्रस्तावों पर भी चर्चा की उम्मीद है। सरकार बुनियादी ढांचे, शहरी विकास, ग्रामीण परियोजनाओं, प्रशासनिक सुधारों और वित्तीय मंजूरियों से संबंधित विभिन्न प्रस्तावों पर विचार कर सकती है। इससे आने वाले महीनों में राज्य की विकास योजनाओं को नई गति मिलने की संभावना जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की कैबिनेट बैठकों में लिए गए निर्णय राज्य के दीर्घकालिक विकास एजेंडे को प्रभावित करते हैं।
वित्तीय प्रबंधन भी रहेगा महत्वपूर्ण मुद्दा
बड़ी परियोजनाओं की लागत बढ़ने के साथ सरकार के सामने वित्तीय संतुलन बनाए रखने की चुनौती भी है। इसलिए कैबिनेट परियोजनाओं की प्राथमिकता, उपलब्ध संसाधनों और संभावित वित्तीय प्रबंधन पर भी विचार कर सकती है। राज्य सरकार का प्रयास रहेगा कि विकास कार्य प्रभावित न हों और साथ ही सार्वजनिक वित्त पर अतिरिक्त दबाव भी नियंत्रित रहे।
केंद्र-राज्य समन्वय पर भी रहेगी नजर
मेट्रो परियोजना सहित कुछ अन्य योजनाओं में केंद्र सरकार की मंजूरी और वित्तीय सहयोग महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में कैबिनेट बैठक में केंद्र के साथ समन्वय की मौजूदा स्थिति की समीक्षा भी संभव है। यदि आवश्यक हुआ, तो राज्य सरकार आगे की रणनीति तय करने के लिए नए प्रशासनिक और वित्तीय विकल्पों पर भी विचार कर सकती है।
आगे क्या देखने को मिल सकता है?
विश्लेषकों का मानना है कि शुक्रवार की कैबिनेट बैठक तेलंगाना की कई प्रमुख परियोजनाओं के भविष्य को स्पष्ट कर सकती है। विशेष रूप से सिंचाई, परिवहन और आधारभूत संरचना से जुड़े फैसले राज्य के आर्थिक विकास और रोजगार सृजन पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं। बैठक के बाद सरकार की ओर से लिए गए फैसलों की आधिकारिक घोषणा किए जाने की संभावना है, जिसके बाद संबंधित विभाग उनके क्रियान्वयन की प्रक्रिया शुरू करेंगे।









