तृणमूल कांग्रेस में नेतृत्व विवाद गहराया, चुनाव आयोग ने दोनों पक्षों से 6 जुलाई तक मांगा जवाब

TMC Leadership Dispute: तृणमूल कांग्रेस (TMC) में नेतृत्व को लेकर विवाद और गहराता जा रहा है। मामले में Election Commission of India ने दोनों पक्षों से 6 जुलाई

तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में नेतृत्व को लेकर चल रहा विवाद अब चुनाव आयोग तक पहुंच गया है। पार्टी के भीतर बढ़ते टकराव के बीच भारत के चुनाव आयोग (ECI) ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी, दोनों पक्षों से पार्टी के संगठनात्मक ढांचे और अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं को लेकर किए गए दावों पर जवाब मांगा है।

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की प्रमुख राजनीतिक पार्टी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में नेतृत्व को लेकर चल रहा आंतरिक विवाद अब भारत के चुनाव आयोग (Election Commission of India) तक पहुंच गया है। पार्टी के संगठनात्मक नियंत्रण और अधिकृत प्रतिनिधित्व को लेकर उठे दावों के बीच चुनाव आयोग ने दोनों पक्षों से 6 जुलाई, शाम 5:30 बजे तक अपना विस्तृत जवाब दाखिल करने को कहा है।

यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब पार्टी के भीतर नेतृत्व, संगठन और राजनीतिक दिशा को लेकर मतभेद सार्वजनिक रूप से सामने आ रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आयोग की आगामी प्रक्रिया इस विवाद की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

संगठन और अधिकृत प्रतिनिधित्व को लेकर विवाद

सूत्रों के अनुसार, पार्टी के भीतर दो अलग-अलग पक्ष संगठनात्मक नेतृत्व और अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं (Authorised Signatories) के संबंध में अपने-अपने दावे पेश कर रहे हैं। एक पक्ष का कहना है कि वर्तमान संगठनात्मक ढांचा वैध है, जबकि दूसरे पक्ष ने संगठन और चुनाव चिन्ह से जुड़े अधिकारों पर अपना दावा प्रस्तुत किया है।

इन्हीं विरोधाभासी दावों के मद्देनज़र चुनाव आयोग ने दोनों पक्षों से आवश्यक दस्तावेज और लिखित स्पष्टीकरण मांगा है। आयोग अब उपलब्ध रिकॉर्ड और प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों के आधार पर आगे की प्रक्रिया तय करेगा।

पार्टी नेतृत्व ने बागी गुट के दावों पर उठाए सवाल

तृणमूल कांग्रेस में नेतृत्व विवाद गहराया, चुनाव आयोग ने दोनों पक्षों से 6 जुलाई तक मांगा जवाब

तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने कथित बागी गुट के दावों को खारिज करते हुए कहा है कि पार्टी का प्रतिनिधित्व केवल अधिकृत पदाधिकारी ही कर सकते हैं। पार्टी के वरिष्ठ सांसद सौगत रॉय ने कहा कि जिस नेता के नेतृत्व में दूसरा पक्ष दावा कर रहा है, उसे पहले ही पार्टी से निष्कासित किया जा चुका है। उनके अनुसार, निष्कासित व्यक्ति को पार्टी की ओर से चुनाव आयोग के समक्ष कोई दावा प्रस्तुत करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि आयोग ने ऐसे प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात क्यों की।

इसी तरह, सांसद सागरिका घोष ने भी कहा कि चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार केवल अधिकृत प्रतिनिधि या विधिवत नामित हस्ताक्षरकर्ता ही किसी राजनीतिक दल की ओर से आयोग से आधिकारिक संवाद कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी से निष्कासित किसी भी नेता के नेतृत्व वाला समूह आधिकारिक प्रतिनिधित्व का दावा नहीं कर सकता।

दूसरे पक्ष ने चुनाव आयोग के समक्ष रखा अपना पक्ष

विवाद के दूसरे पक्ष का नेतृत्व कर रहे ऋतब्रत बनर्जी ने अपने प्रतिनिधिमंडल के साथ चुनाव आयोग की पूर्ण पीठ से मुलाकात की। उन्होंने दावा किया कि पार्टी की एक विशेष बैठक के बाद संबंधित दस्तावेज आयोग को सौंपे गए थे और उसी के आधार पर उन्होंने आयोग से सुनवाई का अनुरोध किया था। उनके अनुसार, आयोग के अधिकारियों ने उनके प्रतिनिधिमंडल की बात सुनी और प्रक्रिया के तहत आगे आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि उनका पक्ष संगठनात्मक बदलावों और पार्टी के आंतरिक निर्णयों से जुड़े तथ्यों को आयोग के समक्ष प्रस्तुत कर चुका है।

राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार, हालिया चुनावी प्रदर्शन के बाद पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ने की खबरें सामने आई हैं। इसी पृष्ठभूमि में संगठनात्मक नेतृत्व, रणनीति और भविष्य की राजनीतिक दिशा को लेकर मतभेद अधिक स्पष्ट हुए हैं। रिपोर्टों के अनुसार, पार्टी के भीतर कुछ निर्वाचित जनप्रतिनिधियों ने संगठनात्मक बदलाव की मांग की है और नए नेतृत्व के समर्थन में अपनी राय व्यक्त की है। हालांकि, इन दावों पर आधिकारिक स्तर पर अंतिम स्थिति स्पष्ट होना अभी बाकी है।

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