यश की फिल्म ‘Toxic’ का बॉक्स ऑफिस पर प्रदर्शन लगातार कमजोर होता जा रहा है। पहले दिन 101.10 करोड़ रुपये की रिकॉर्डतोड़ कमाई करने वाली फिल्म को दूसरे दिन से ही झटका लगना शुरू हो गया और अब इसकी रोजाना कमाई में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है।
Toxic Movie Review: कन्नड़ सुपरस्टार यश की फिल्म Toxic: A Fairy Tale for Grown-Ups रिलीज के बाद से लगातार चर्चा में है। फिल्म की भव्यता, किरदारों और कहानी कहने के अलग अंदाज की तारीफ भी हुई है, लेकिन एक बड़ा वर्ग ऐसा भी है जिसे इसकी कहानी पूरी तरह समझ नहीं आई। इसी बहस के बीच अब यश की ममेरी बहन और अभिनेत्री दीपिका दास ने फिल्म को लेकर अपनी विस्तृत राय साझा की है। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए Toxic के कई पहलुओं को अपने नजरिए से समझाने की कोशिश की है।
दीपिका का यह रिव्यू सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर एक बार फिर फिल्म की कहानी को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कई दर्शकों ने उनके विश्लेषण को फिल्म के उन हिस्सों से जोड़कर देखा, जिन्हें देखने के बाद वे खुद असमंजस में थे।
पहले दिन शानदार शुरुआत, फिर कमाई में लगातार गिरावट
Toxic ने बॉक्स ऑफिस पर पहले दिन करीब 101.10 करोड़ रुपये की कमाई के साथ जोरदार शुरुआत की थी। हालांकि, इसके बाद फिल्म की कमाई में लगातार गिरावट देखने को मिली। रिपोर्ट किए गए आंकड़ों के मुताबिक आठवें दिन फिल्म ने करीब 5.45 करोड़ रुपये का नेट कलेक्शन किया, जो उसके शुरुआती प्रदर्शन की तुलना में काफी कम है।
फिल्म को लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाओं के बीच मनोरंजन जगत की कुछ प्रमुख हस्तियों ने इसके विजुअल ट्रीटमेंट और प्रयोगात्मक कहानी की तारीफ की है। इसी क्रम में दीपिका दास की टिप्पणी ने भी ध्यान खींचा है।
दीपिका दास ने कैसे डिकोड की ‘Toxic’ की कहानी?
दीपिका दास ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में Toxic को एक ऐसे व्यक्ति की कहानी के रूप में देखने की कोशिश की है, जो अपनी भावनाओं और मानसिक उलझनों से लगातार जूझता रहता है। उनके मुताबिक फिल्म का केंद्रीय किरदार अपनी भावनाओं पर नियंत्रण खोने के साथ धीरे-धीरे ऐसे व्यक्तित्व में बदलता जाता है, जिसे समझना आसान नहीं है।
उन्होंने संकेत दिया कि फिल्म में सिर्फ घटनाओं को दिखाना मकसद नहीं है, बल्कि किरदारों के भीतर चल रहे संघर्ष, भ्रम और टूटती पहचान को भी सामने लाया गया है। उनके अनुसार कुछ पात्र अपनी वास्तविक पहचान से इतना दूर हो जाते हैं कि वे खुद भी अपने व्यवहार और भावनाओं को समझ नहीं पाते।
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‘आम दर्शकों के लिए आसान नहीं है फिल्म’
दीपिका ने यह भी स्वीकार किया कि Toxic की कहानी और उसके पीछे छिपे विचार आम दर्शकों के लिए कुछ हद तक जटिल हो सकते हैं। हालांकि, उन्होंने फिल्म की इसी अलग पहचान को उसकी सबसे बड़ी खूबियों में से एक माना। उनका कहना है कि फिल्म में अंतरराष्ट्रीय और यूनिवर्सल सिनेमा की झलक दिखाई देती है। कहानी को पारंपरिक तरीके से पेश करने के बजाय निर्देशक गीतू मोहनदास ने किरदारों और उनके मनोविज्ञान को अलग दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया है।
दीपिका ने विशेष रूप से किरदारों की विविधता और उनकी अलग-अलग मानसिक परतों की सराहना की। उनके मुताबिक फिल्म प्रेम, जुनून, सत्ता, हिंसा और भावनात्मक असंतुलन जैसे विषयों को एक साथ जोड़ने का प्रयास करती है।
फिल्म में प्रेम, जुनून और सत्ता का खतरनाक पहलू
दीपिका के विश्लेषण का एक अहम हिस्सा महिलाओं और उनके जीवन पर पड़ने वाले प्रभाव से जुड़ा है। उन्होंने Toxic को केवल एक गैंगस्टर या अपराध की दुनिया की कहानी मानने के बजाय उन लोगों की कहानी के रूप में देखा, जिनकी जिंदगी एक ताकतवर व्यक्ति की भावनात्मक और विनाशकारी प्रवृत्तियों से बदल जाती है।
उनके मुताबिक फिल्म यह सवाल उठाती है कि जब कोई व्यक्ति अपनी भावनाओं को नियंत्रित करना छोड़ देता है, तो वही भावनाएं उसके फैसलों और व्यवहार को नियंत्रित करने लगती हैं। इसी वजह से फिल्म को सिर्फ एक एक्शन ड्रामा के रूप में देखना इसकी पूरी थीम को समझने के लिए पर्याप्त नहीं हो सकता।









