त्रिपुरा में आगामी विलेज कमेटी चुनाव से पहले BJP और टिपरा मोथा के बीच गठबंधन वार्ता तेज हो गई है। BJP महासचिव बीएल संतोष अगरतला पहुंचे हैं। वहीं प्रद्योत देबबर्मा ने संवैधानिक अधिकारों के मुद्दे पर अपनी शर्तें दोहराई हैं।
अगरतला: त्रिपुरा में आगामी विलेज कमेटी (VC) चुनावों से पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) और टिपरा मोथा के बीच गठबंधन को लेकर बातचीत निर्णायक दौर में पहुंचती दिखाई दे रही है। इसी बीच BJP के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बीएल संतोष मंगलवार को दो दिवसीय दौरे पर त्रिपुरा पहुंचे। उनके साथ पार्टी के पूर्वोत्तर मामलों के समन्वयक संबित पात्रा समेत कई वरिष्ठ नेता भी राज्य पहुंचे। बीजेपी और टिपरा मोथा के बीच सीट बंटवारे तथा चुनावी तालमेल को लेकर कई दौर की बातचीत हो चुकी है, लेकिन अभी तक किसी अंतिम समझौते की घोषणा नहीं हुई है। ऐसे में केंद्रीय नेतृत्व के त्रिपुरा दौरे को दोनों दलों के बीच मतभेद दूर करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
अगरतला पहुंचे BJP के वरिष्ठ नेता
बीएल संतोष के साथ BJP के पूर्वोत्तर समन्वयक संबित पात्रा, रवींद्र राजू और राजदीप रॉय भी त्रिपुरा पहुंचे। मुख्यमंत्री डॉ. माणिक साहा ने अगरतला के खाजुरबागान स्थित स्टेट गेस्ट हाउस में केंद्रीय नेताओं का स्वागत किया।
केंद्रीय नेतृत्व की यह यात्रा ऐसे समय हुई है जब त्रिपुरा में स्थानीय स्तर के चुनावों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। BJP और टिपरा मोथा के बीच संभावित समझौते को लेकर लंबे समय से चर्चा चल रही है। दोनों दलों के बीच दिल्ली में भी कई दौर की बैठकें हो चुकी हैं।
अब बीएल संतोष और अन्य केंद्रीय नेताओं की मौजूदगी से उम्मीद बढ़ी है कि दोनों पक्ष किसी साझा फार्मूले पर पहुंचने की कोशिश करेंगे।
सीट बंटवारे पर अब तक नहीं बनी सहमति
आगामी विलेज कमेटी चुनावों के लिए BJP और टिपरा मोथा के बीच सबसे अहम मुद्दों में सीट बंटवारा और गठबंधन की शर्तें शामिल हैं। दोनों पक्षों के बीच बातचीत जारी है, लेकिन अभी तक सीटों के अंतिम बंटवारे की जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
मुख्यमंत्री माणिक साहा ने सोमवार को कहा था कि टिपरा मोथा के साथ बातचीत अभी चल रही है। उन्होंने उम्मीद जताई थी कि BJP अपने सहयोगी दलों के साथ मिलकर आगामी चुनाव लड़ेगी। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि गठबंधन से जुड़ी विस्तृत जानकारी बातचीत के अंतिम चरण में पहुंचने के बाद ही सामने आएगी।
इससे संकेत मिलता है कि BJP नेतृत्व फिलहाल बातचीत को अंतिम रूप देने की कोशिश कर रहा है और जल्द ही चुनावी रणनीति स्पष्ट हो सकती है।
टिपरा मोथा की संवैधानिक अधिकारों पर जोर
गठबंधन की राह में सबसे बड़ी चुनौती टिपरा मोथा की मांगें हैं। पार्टी प्रमुख प्रद्योत किशोर देबबर्मा ने सोमवार को फेसबुक लाइव के माध्यम से अपने रुख को दोहराते हुए कहा कि उनकी पार्टी संवैधानिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों का समाधान हुए बिना चुनावी समझौते के लिए आगे नहीं बढ़ेगी।
देबबर्मा ने कहा कि उनकी पार्टी आदिवासी और मूल निवासियों से किए गए वादों को नजरअंदाज नहीं करेगी। उनका रुख है कि चुनावी गठबंधन से पहले टिपरासा समझौते से जुड़े संवैधानिक अधिकारों को लेकर ठोस प्रगति होनी चाहिए।
इस रुख ने BJP और टिपरा मोथा के बीच बातचीत को और महत्वपूर्ण बना दिया है। एक तरफ BJP चुनाव से पहले सहयोगी दलों के साथ तालमेल मजबूत करना चाहती है, वहीं टिपरा मोथा अपने राजनीतिक एजेंडे से जुड़े मुद्दों पर स्पष्ट आश्वासन चाहती है।
टिपरासा समझौता बना अहम मुद्दा
टिपरा मोथा और केंद्र सरकार तथा त्रिपुरा सरकार के बीच वर्ष 2022 में त्रिपक्षीय समझौता हुआ था। इसका उद्देश्य राज्य की आदिवासी आबादी से जुड़े व्यापक विकास, कल्याण और अन्य मुद्दों पर समाधान तलाशना था।
टिपरा मोथा का कहना है कि इस समझौते में जिन मुद्दों और अधिकारों को लेकर प्रतिबद्धताएं सामने आई थीं, उन्हें आगे बढ़ाना जरूरी है। पार्टी इन्हीं मुद्दों को आगामी चुनावी रणनीति में महत्वपूर्ण मान रही है।
प्रद्योत देबबर्मा के हालिया बयान से साफ है कि टिपरा मोथा केवल चुनावी सीटों के बंटवारे को आधार बनाकर गठबंधन करने के पक्ष में नहीं है। पार्टी चाहती है कि उसके प्रमुख राजनीतिक मुद्दों पर भी ठोस सहमति बने।
BJP के लिए गठबंधन क्यों महत्वपूर्ण?
त्रिपुरा में BJP और टिपरा मोथा के बीच संभावित चुनावी समझौता राज्य की स्थानीय राजनीति पर महत्वपूर्ण असर डाल सकता है। टिपरा मोथा का आधार मुख्य रूप से राज्य की आदिवासी आबादी से जुड़े क्षेत्रों में रहा है, जबकि BJP राज्य की सत्ता में प्रमुख राजनीतिक ताकत है।
यदि दोनों दल किसी समझौते पर पहुंचते हैं, तो उनके बीच चुनावी तालमेल से वोटों के बिखराव को रोकने की कोशिश की जा सकती है। इसके साथ ही स्थानीय निकाय स्तर पर दोनों दलों के संगठनात्मक नेटवर्क को भी फायदा मिल सकता है।
हालांकि, गठबंधन की सफलता केवल सीट बंटवारे पर निर्भर नहीं करेगी। दोनों दलों के कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच तालमेल, साझा अभियान और प्रमुख राजनीतिक मुद्दों पर सहमति भी महत्वपूर्ण होगी।
चुनाव की तारीख को लेकर स्थिति
VC चुनावों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, चुनावी प्रक्रिया के लिए दोनों पक्षों पर जल्द निर्णय लेने का दबाव है। मूल रिपोर्ट में 28 सितंबर और 5 अक्टूबर, दोनों तारीखों का उल्लेख किया गया है, इसलिए अंतिम आधिकारिक चुनाव कार्यक्रम की पुष्टि महत्वपूर्ण होगी।
जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आएंगे, BJP और टिपरा मोथा के बीच गठबंधन पर फैसला राज्य की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन सकता है। दोनों दलों के बीच अंतिम समझौता होने की स्थिति में सीट बंटवारे और साझा रणनीति की घोषणा पर सभी की नजर रहेगी।
केंद्रीय नेतृत्व की बैठक से बढ़ी उम्मीद
बीएल संतोष का त्रिपुरा दौरा BJP के लिए केवल संगठनात्मक यात्रा नहीं माना जा रहा है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी ऐसे समय हुई है जब टिपरा मोथा के साथ गठबंधन को लेकर बातचीत महत्वपूर्ण चरण में है।
केंद्रीय नेतृत्व की कोशिश संभावित रूप से दोनों पक्षों के बीच लंबित मुद्दों पर सहमति बनाने की होगी। हालांकि, जब तक टिपरा मोथा की संवैधानिक अधिकारों से जुड़ी चिंताओं और सीट बंटवारे जैसे मुद्दों पर सहमति नहीं बनती, तब तक गठबंधन को अंतिम रूप देना चुनौतीपूर्ण रहेगा।
मुख्यमंत्री माणिक साहा की सरकार के लिए भी यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण है। राज्य में स्थानीय चुनावों के परिणाम राजनीतिक समीकरणों पर असर डाल सकते हैं और भविष्य की चुनावी रणनीतियों को प्रभावित कर सकते हैं।
आगे क्या होगा?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि BJP और टिपरा मोथा क्या आगामी VC चुनावों में संयुक्त रूप से मैदान में उतरेंगे। BJP केंद्रीय नेतृत्व के वरिष्ठ नेताओं का त्रिपुरा पहुंचना बातचीत को गति देने का संकेत है, लेकिन टिपरा मोथा प्रमुख का रुख अभी भी स्पष्ट रूप से संवैधानिक अधिकारों से जुड़ी मांगों पर केंद्रित है।
यदि दोनों पक्ष इन मुद्दों पर समझौता कर लेते हैं, तो गठबंधन की घोषणा जल्द हो सकती है। दूसरी ओर, यदि संवैधानिक अधिकारों और सीट बंटवारे पर सहमति नहीं बनती है, तो दोनों दल अलग-अलग चुनाव लड़ने का विकल्प भी चुन सकते हैं।
फिलहाल त्रिपुरा की राजनीति में BJP और टिपरा मोथा के बीच बातचीत सबसे महत्वपूर्ण घटनाक्रमों में बनी हुई है। केंद्रीय नेतृत्व की मौजूदगी और आगामी चुनाव की समयसीमा को देखते हुए आने वाले दिनों में गठबंधन को लेकर तस्वीर और स्पष्ट होने की संभावना है।









