डोनाल्ड ट्रंप के सैन्य हमले रोकने के फैसले से कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई। ब्रेंट क्रूड 10 प्रतिशत तक लुढ़का, जिससे ग्लोबल बाजार में राहत दिखी और भारत जैसे आयातक देशों को फायदा मिलने की उम्मीद बढ़ी।
बिज़नेस न्यूज़: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक फैसले ने ग्लोबल ऑयल मार्केट में बड़ा असर डाला है। ट्रंप ने ईरान के खिलाफ सैन्य हमलों को पांच दिनों के लिए रोकने का ऐलान किया, जिसके बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिली। इस खबर से बाजार में तुरंत राहत का माहौल बना और निवेशकों की चिंता कुछ हद तक कम हुई।
ट्रंप के इस फैसले को अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत का सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। इसी कारण तेल की कीमतों में अचानक गिरावट आई और ग्लोबल मार्केट में हलचल तेज हो गई।
ब्रेंट क्रूड में 10 प्रतिशत तक गिरावट
ट्रंप की घोषणा के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमतों में 10 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। 20 मार्च को 106.88 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से गिरकर यह करीब 96.06 डॉलर प्रति बैरल तक आ गया। हालांकि बाद में इसमें थोड़ी रिकवरी भी देखने को मिली और कीमतें फिर से 101 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गईं।
तेल की कीमतों में यह गिरावट बाजार के लिए राहत भरी रही। खासतौर पर उन देशों के लिए जो तेल आयात पर निर्भर हैं, उनके लिए यह एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
भारत के लिए क्यों है बड़ी राहत
भारत जैसे देश के लिए तेल की कीमतों में गिरावट बेहद महत्वपूर्ण होती है क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। कच्चे तेल के सस्ते होने से आयात बिल कम होता है और इससे महंगाई पर भी नियंत्रण रखने में मदद मिलती है।
इसके अलावा, हाल के तनाव के कारण होर्मुज जलमार्ग में फंसे टैंकरों को लेकर भी चिंता बनी हुई थी। अब हालात में सुधार की उम्मीद के चलते भारत को अपने तेल और एलपीजी सप्लाई को लेकर राहत मिल सकती है।
होर्मुज स्ट्रेट में फंसे टैंकरों की स्थिति

ईरान और ओमान के बीच स्थित होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक ऊर्जा सप्लाई के लिए बेहद अहम मार्ग है। हालिया तनाव के कारण यहां कई जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई थी।
इसके बावजूद भारतीय ध्वज वाले दो एलपीजी टैंकर जग वसंत और पाइन गैस इस मार्ग को पार कर भारत की ओर बढ़ रहे हैं। ये दोनों टैंकर करीब 92,000 टन एलपीजी लेकर आ रहे हैं और इनमें भारतीय नाविक सवार हैं। इनके 26 से 28 मार्च के बीच भारत पहुंचने की उम्मीद है। इससे पहले भी कुछ जहाज भारत पहुंच चुके हैं, जिससे सप्लाई चेन धीरे-धीरे सामान्य होती दिख रही है।
ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित करने के प्रयास
भारत सरकार ने ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए कई कदम उठाए हैं। एलपीजी की सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए अमेरिका से आयात बढ़ाया गया है।
डेटा के अनुसार, इस समय करीब 13 टैंकर लगभग 3,50,000 टन एलपीजी लेकर भारत की ओर आ रहे हैं। इसके अलावा पहली बार भारत ने अर्जेंटीना से भी एलपीजी की खेप मंगाई है। यह दिखाता है कि सरकार सप्लाई को लेकर कोई जोखिम नहीं लेना चाहती।
पश्चिम एशिया से सप्लाई में कमी
पश्चिम एशिया से आने वाली एलपीजी सप्लाई में हाल के संघर्ष के कारण कमी आई है। वर्तमान में केवल 11 टैंकर भारत की ओर बढ़ रहे हैं, जिनमें करीब 1,92,734 टन एलपीजी है। इनमें से ज्यादातर खेप संघर्ष शुरू होने से पहले रवाना हुई थी। इसका मतलब है कि अगर स्थिति लंबे समय तक खराब रहती है तो सप्लाई पर असर पड़ सकता है।
नाविकों और सप्लाई चेन पर नजर
सरकार केवल तेल और गैस सप्लाई पर ही नहीं बल्कि जहाजों पर मौजूद नाविकों की स्थिति पर भी नजर रख रही है। अधिकारियों के अनुसार, जहाजों पर पानी और जरूरी राशन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है।
हालांकि पहले कुछ जहाजों से पानी और राशन की कमी की खबरें भी सामने आई थीं। इसके अलावा रेफ्रिजरेटेड कंटेनरों की वापसी में देरी को लेकर भी चिंता जताई गई है, जिससे भविष्य में सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है।
पीएनजी को बढ़ावा देने की कोशिश
एलपीजी सप्लाई में संभावित कमी को देखते हुए सरकार ने उपभोक्ताओं को पाइप्ड नेचुरल गैस यानी PNG अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया है। मार्च के पहले तीन हफ्तों में ही गैस कंपनियों ने 3.5 लाख से ज्यादा नए PNG कनेक्शन जारी किए हैं। इससे घरेलू और कमर्शियल उपयोग में एलपीजी पर निर्भरता कम करने की कोशिश की जा रही है।








