ट्रू नेट वर्थ’ रिपोर्ट: दान न करते तो गेट्स-बफे बनते दुनिया के टॉप 3 अमीर

फोर्ब्स की ‘ट्रू नेट वर्थ’ लिस्ट मे खुलासा हुआ कि बिल गेट्स और वॉरेन बफे दान न करते तो दुनिया के टॉप 3 अमीरों मे होते। इलॉन मस्क अब भी पहले स्थान पर बने हुए है।

Forbes की ‘ट्रू नेट वर्थ’ लिस्ट के अनुसार, Bill Gates और Warren Buffett दान न करते तो टॉप 3 में होते, जबकि Elon Musk अब भी सबसे अमीर बने हुए हैं।

बिजनेस: दुनिया के अरबपतियों की संपत्ति को लेकर एक दिलचस्प और नई दृष्टि सामने आई है। प्रतिष्ठित बिजनेस मैगजीन फोर्ब्स ने एक विशेष विश्लेषण जारी करते हुए “ट्रू नेट वर्थ” (True Net Worth) रैंकिंग पेश की है। इस रैंकिंग में अरबपतियों की मौजूदा संपत्ति के साथ-साथ उनके द्वारा किए गए दान को भी जोड़कर आकलन किया गया है।

इस अध्ययन का उद्देश्य यह समझना था कि अगर दुनिया के सबसे बड़े दानदाताओं ने अपनी संपत्ति का बड़ा हिस्सा दान न किया होता, तो आज उनकी रैंकिंग और कुल संपत्ति कैसी होती।

एलन मस्क शीर्ष पर, लेकिन दान में काफी पीछे

रिपोर्ट के अनुसार, एलन मस्क दोनों—मौजूदा और “ट्रू नेट वर्थ”—रैंकिंग में पहले स्थान पर बने हुए हैं।

हालांकि, दान के मामले में उनकी हिस्सेदारी बेहद कम है। अनुमान के मुताबिक, मस्क ने अपनी कुल संपत्ति का केवल लगभग 0.06% हिस्सा ही दान किया है। यह आंकड़ा उन्हें दुनिया के अन्य बड़े परोपकारी अरबपतियों से काफी पीछे रखता है।

बिल गेट्स: दान ने बदली रैंकिंग

बिल गेट्स का उदाहरण इस रिपोर्ट में सबसे ज्यादा चर्चा में है। उन्होंने माइक्रोसॉफ्ट के लगभग 73.1 करोड़ शेयर दान कर दिए हैं।

यदि गेट्स ने यह शेयर अपने पास रखे होते, तो उनकी संपत्ति लगभग चार गुना अधिक होती और वे मौजूदा सूची में 19वें स्थान के बजाय दूसरे स्थान पर होते।

यह दर्शाता है कि गेट्स की परोपकार गतिविधियों ने उनकी व्यक्तिगत संपत्ति और रैंकिंग पर कितना बड़ा प्रभाव डाला है।

वॉरेन बफे: तीसरे स्थान पर पहुंच सकते थे

इसी तरह, दिग्गज निवेशक वॉरेन बफे भी इस विश्लेषण में प्रमुख रूप से सामने आए हैं।

यदि उन्होंने पिछले वर्षों में बड़े पैमाने पर दान न किया होता, तो वे वर्तमान में नौवें स्थान के बजाय तीसरे सबसे अमीर व्यक्ति बन सकते थे।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 2006 से बफे द्वारा दान किए गए शेयरों की कीमत में लगभग 700% की वृद्धि हुई है, जिससे उनके संभावित नेट वर्थ में भारी इजाफा हो सकता था।

मैकेंजी स्कॉट की बड़ी छलांग

मैकेंजी स्कॉट, जो अपने उदार दान के लिए जानी जाती हैं, इस “ट्रू नेट वर्थ” सूची में बड़ा उछाल दर्ज करती नजर आती हैं।

अगर उन्होंने अपने दान को बनाए रखा होता, तो वे 58 स्थान ऊपर चढ़कर 26वें स्थान पर पहुंच सकती थीं।

वहीं, उनके पूर्व पति जेफ बेजोस इस वैकल्पिक सूची में टॉप 5 से बाहर हो जाते, जो इस बात को दर्शाता है कि संपत्ति के वितरण और दान का वैश्विक रैंकिंग पर कितना असर पड़ता है।

‘ट्रू नेट वर्थ’ कैसे किया गया कैलकुलेट?

फोर्ब्स ने इस रैंकिंग को तैयार करने के लिए यह मान लिया कि अरबपतियों द्वारा दान किए गए शेयर उनके पास ही बने रहते।

इसके अलावा, नकद दान को भी इस तरह गिना गया जैसे वह बाजार दर के अनुसार निवेश किया गया हो और समय के साथ उसकी वैल्यू बढ़ी हो।

इस पद्धति के जरिए यह समझने की कोशिश की गई कि परोपकार का वास्तविक आर्थिक प्रभाव क्या होता है।

परोपकार बनाम संपत्ति: क्या है संदेश?

यह रिपोर्ट सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि यह एक गहरा संदेश भी देती है।

दुनिया के कई अरबपतियों ने अपनी संपत्ति का बड़ा हिस्सा समाज के कल्याण के लिए दान किया है, जिससे उनकी व्यक्तिगत रैंकिंग भले ही नीचे आई हो, लेकिन उनका सामाजिक प्रभाव कई गुना बढ़ा है।

दूसरी ओर, कुछ अरबपति ऐसे भी हैं, जिन्होंने अपेक्षाकृत कम दान किया है और उनकी संपत्ति तेजी से बढ़ती रही है।

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