अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इजराइल के मतदाताओं से बेंजामिन नेतन्याहू को दोबारा प्रधानमंत्री चुनने की अपील की। उन्होंने चेतावनी दी कि दूसरे नेता के सत्ता में आने पर ईरान के खिलाफ अमेरिका को अकेले लड़ना पड़ सकता है।
वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इजराइल में आगामी संसदीय चुनाव से पहले प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को खुला समर्थन दिया है। उन्होंने इजराइली मतदाताओं से नेतन्याहू को दोबारा प्रधानमंत्री चुनने की अपील करते हुए कहा कि वह एक मजबूत, बहादुर और शानदार नेता हैं। ट्रम्प ने चेतावनी दी कि यदि इजराइल ने किसी दूसरे नेता को चुना, तो ईरान के खिलाफ अमेरिका को अकेले मोर्चा संभालना पड़ सकता है।
ट्रम्प का यह बयान ऐसे समय आया है, जब इजराइल में 27 अक्टूबर 2026 को होने वाले संसदीय चुनाव से पहले राजनीतिक मुकाबला तेज हो गया है। कई चुनावी सर्वेक्षणों में नेतन्याहू की लिकुड पार्टी के मुकाबले पूर्व सैन्य प्रमुख गैडी आइजनकोट की याशर पार्टी को बढ़त मिलती दिखाई दे रही है। हालांकि, किसी भी राजनीतिक गठबंधन को संसद में स्पष्ट बहुमत मिलता नजर नहीं आ रहा है। ट्रम्प ने नेतन्याहू को बताया मजबूत और बहादुर नेता ट्रम्प ने इजराइल के लोगों को संबोधित करते हुए नेतन्याहू की नेतृत्व क्षमता की तारीफ की। उन्होंने कहा कि नेतन्याहू ने बेहद कठिन परिस्थितियों में काम किया है और दबाव के बावजूद मजबूती से खड़े रहे हैं। ट्रम्प के मुताबिक, प्रधानमंत्री को अपने देश के भीतर भी विरोध का सामना करना पड़ा है, लेकिन उन्होंने चुनौतियों के बीच नेतृत्व जारी रखा। अमेरिकी राष्ट्रपति ने नेतन्याहू को अपना महत्वपूर्ण सहयोगी बताते हुए कहा कि वह इजराइल को निराश नहीं करेंगे। उनके संदेश का प्रमुख उद्देश्य इजराइली मतदाताओं को यह बताना था कि नेतन्याहू का नेतृत्व अमेरिका और इजराइल के रणनीतिक संबंधों के लिए अहम है। ट्रम्प का सार्वजनिक समर्थन इजराइल के चुनावी माहौल में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, इससे मतदाताओं के फैसले पर कितना असर पड़ेगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है। इजराइल की घरेलू राजनीति में सुरक्षा, अर्थव्यवस्था, युद्ध और सरकार के कामकाज जैसे मुद्दे भी चुनावी बहस के केंद्र में हैं। ईरान के खिलाफ लड़ाई को लेकर ट्रम्प की चेतावनी ट्रम्प ने अपने संदेश में ईरान को लेकर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि यदि इजराइल नेतन्याहू के बजाय किसी दूसरे नेता को चुनता है, तो अमेरिका को ईरान के खिलाफ लड़ाई अकेले लड़नी पड़ सकती है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि वह ऐसी स्थिति नहीं चाहते। ट्रम्प ने ईरान पर लंबे समय से अमेरिका और इजराइल के खिलाफ धमकियां देने का आरोप लगाया। उन्होंने ईरान की सैन्य क्षमता और आर्थिक ताकत का जिक्र करते हुए दावा किया कि इन क्षमताओं को व्यवस्थित तरीके से कमजोर किया गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने चेतावनी दी कि यदि तेहरान ने अपना रवैया नहीं बदला, तो अमेरिका ईरान के खिलाफ अपनी कार्रवाई को आगे बढ़ा सकता है। हालांकि, ईरान की सैन्य क्षमता को लेकर ट्रम्प के दावों और भविष्य में संभावित अमेरिकी कार्रवाई को स्वतंत्र रूप से परखना जरूरी है। इस बयान से स्पष्ट है कि ट्रम्प ने इजराइल के नेतृत्व के सवाल को ईरान के खिलाफ रणनीतिक सहयोग से जोड़कर पेश किया है। इससे चुनाव के दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा और अमेरिका के साथ संबंधों का महत्व और बढ़ सकता है। चार चुनावी सर्वेक्षणों में नेतन्याहू की पार्टी पिछड़ी इजराइल में चुनाव से पहले सामने आए सर्वेक्षणों में गैडी आइजनकोट की याशर पार्टी और नेतन्याहू की लिकुड पार्टी के बीच कड़ा मुकाबला दिखाई दे रहा है। 18 अक्टूबर को प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, चार सर्वेक्षणों में याशर पार्टी को लिकुड से आगे बताया गया है। इन सर्वेक्षणों के औसत में याशर को लगभग 21.5 सीटें और लिकुड को करीब 19 सीटें मिलने का अनुमान दिया गया है। अलग-अलग सर्वेक्षणों के नतीजों में अंतर होने के बावजूद आइजनकोट की पार्टी कई सर्वे में बढ़त बनाए हुए है। इजराइल की संसद, जिसे नेसेट कहा जाता है, में कुल 120 सीटें हैं। सरकार बनाने के लिए कम से कम 61 सांसदों के समर्थन की जरूरत होती है। मौजूदा सर्वेक्षणों के मुताबिक, नेतन्याहू के नेतृत्व वाले गठबंधन और उनके विरोधी खेमे में से कोई भी आसानी से बहुमत के आंकड़े तक पहुंचता नहीं दिख रहा है। ऐसे में छोटे राजनीतिक दलों और अरब पार्टियों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। चुनाव के बाद सरकार बनाने के लिए विभिन्न दलों के बीच गठबंधन और समर्थन जुटाने की प्रक्रिया निर्णायक साबित हो सकती है। सर्वेक्षण केवल मतदाताओं के मौजूदा रुझान बताते हैं, इसलिए इन्हें अंतिम चुनाव परिणाम नहीं माना जा सकता।









