अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान पर बड़े सैन्य हमलों को अस्थायी रूप से रोकने का फैसला लिया है। वहीं मध्य पूर्व में होर्मुज जलडमरूमध्य, हूती हमलों, अमेरिकी सैन्य ठिकानों और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर तनाव लगातार बना हुआ है।
ईरान/अमेरिका वॉर: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के खिलाफ चल रहे बड़े सैन्य अभियान को फिलहाल रोकने का फैसला किया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, शुक्रवार को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े शीर्ष सलाहकारों और कैबिनेट सदस्यों के साथ हुई बैठक के बाद ट्रम्प ने अमेरिकी सेना को निर्देश दिया कि फिलहाल ईरान के खिलाफ बड़े पैमाने पर नए हमले न किए जाएं। रिपोर्टों के मुताबिक यह निर्णय ऐसे समय लिया गया है जब मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बना हुआ है और क्षेत्र में कई मोर्चों पर सुरक्षा चुनौतियां सामने आ रही हैं।
सैन्य संसाधनों को लेकर जताई गई चिंता
रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने प्रशासन को चेतावनी दी थी कि यदि मौजूदा अभियान को और अधिक बढ़ाया गया तो मध्य पूर्व में तैनात अमेरिकी बलों के पास पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलों और अन्य वायु रक्षा प्रणालियों का भंडार तेजी से कम हो सकता है। बताया गया कि जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन ने भी सलाह दी कि बड़े सैन्य अभियान को जारी रखने से क्षेत्र में तैनात अमेरिकी सैनिकों और सहयोगी देशों की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।
रिपोर्टों के अनुसार, अप्रैल के अंत तक अमेरिका 1,200 से अधिक पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलों का उपयोग कर चुका था। हालांकि अमेरिकी प्रशासन की ओर से यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि सैन्य अभियान पर लगाया गया विराम अस्थायी है या लंबे समय तक जारी रहेगा। अधिकारियों का कहना है कि आवश्यकता पड़ने पर अमेरिकी सेना किसी भी बड़े अभियान के लिए तैयार रहेगी।
ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई रोकने का दावा किया
ईरान ने दावा किया है कि अमेरिका की ओर से लगातार दो रात तक कोई हमला नहीं किए जाने के बाद उसने भी क्षेत्र में अमेरिकी हितों के खिलाफ अपनी जवाबी सैन्य कार्रवाई रोक दी है। ईरानी सेना के प्रवक्ता के अनुसार, देश की रणनीति हमेशा जवाबी कार्रवाई पर आधारित रही है और मौजूदा परिस्थितियों में प्रत्यक्ष सैन्य प्रतिक्रिया को फिलहाल रोक दिया गया है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
होर्मुज जलडमरूमध्य बना तनाव का केंद्र
इस बीच फारस की खाड़ी का रणनीतिक होर्मुज जलडमरूमध्य एक बार फिर वैश्विक चिंता का विषय बना हुआ है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया कि उसकी नौसेना ने पिछले 24 घंटों में होर्मुज से गुजरने की कोशिश कर रहे चार जहाजों को चेतावनी दी, जिसके बाद जहाजों ने अपना मार्ग बदल लिया। दूसरी ओर अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) का कहना है कि ईरान के खिलाफ उसकी समुद्री निगरानी और नौसैनिक नाकाबंदी जारी है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, कई व्यावसायिक जहाजों का मार्ग बदला गया तथा कुछ जहाजों की जांच भी की गई।
हूती विद्रोहियों का नया दावा
यमन के हूती विद्रोहियों ने दावा किया है कि उन्होंने सऊदी अरब के जजान स्थित सऊदी अरामको रिफाइनरी पर तीन बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया। यह रिफाइनरी सऊदी अरब की प्रमुख तेल प्रसंस्करण इकाइयों में शामिल मानी जाती है। यदि ऐसे हमलों की पुष्टि होती है तो क्षेत्रीय ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक तेल आपूर्ति पर इसका असर पड़ सकता है। हालांकि घटना को लेकर स्वतंत्र पुष्टि और आधिकारिक विवरण का इंतजार है।
बहरीन में अमेरिकी ठिकाने पर हमले का दावा
ईरान ने यह भी दावा किया कि उसने बहरीन स्थित अमेरिकी फिफ्थ फ्लीट के नौसैनिक अड्डे पर ड्रोन और मिसाइलों से हमला किया। ईरानी पक्ष के अनुसार, हमले के दौरान कई विस्फोट हुए। उधर अमेरिका की ओर से इस दावे पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। क्षेत्रीय हालात को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
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ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर नई चर्चा
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का आकलन है कि ईरान के नए सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह मुजतबा खामेनेई अपने पूर्ववर्ती नेतृत्व की तुलना में परमाणु हथियार कार्यक्रम के प्रति अधिक सकारात्मक रुख रख सकते हैं। हालांकि अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल ऐसा कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला है जिससे यह साबित हो कि ईरान ने औपचारिक रूप से अपने परमाणु हथियार कार्यक्रम को फिर से शुरू कर दिया है। रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि ईरान ने अपने कुछ परमाणु संवर्धन उपकरणों और सेंट्रीफ्यूज मशीनों को अधिक सुरक्षित भूमिगत स्थलों पर स्थानांतरित किया है। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
नेतन्याहू की अमेरिका यात्रा
इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अमेरिका की यात्रा पर जाने वाले हैं, जहां उनकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से मुलाकात प्रस्तावित है। यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब अमेरिका, ईरान और इजराइल के बीच सुरक्षा और क्षेत्रीय तनाव को लेकर नई रणनीतियों पर चर्चा की संभावना जताई जा रही है। विश्लेषकों का मानना है कि इस मुलाकात में ईरान की गतिविधियों, क्षेत्रीय सुरक्षा और भविष्य की सैन्य रणनीति प्रमुख मुद्दे हो सकते हैं।
होर्मुज और बाब-अल-मंदेब पर वैश्विक चिंता
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य और बाब-अल-मंदेब जैसे दो प्रमुख समुद्री मार्ग एक साथ प्रभावित होते हैं तो इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। इन दोनों मार्गों से वैश्विक तेल और व्यापारिक जहाजों का बड़ा हिस्सा गुजरता है। इनके बाधित होने की स्थिति में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, ईंधन महंगा होना, समुद्री परिवहन लागत बढ़ना, बीमा प्रीमियम में वृद्धि और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव जैसी चुनौतियां सामने आ सकती हैं।
क्षेत्रीय तनाव बना हुआ है
अमेरिका द्वारा बड़े हमलों पर अस्थायी विराम लगाने के बावजूद मध्य पूर्व में स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है। ईरान, अमेरिका, इजराइल, हूती विद्रोहियों और खाड़ी क्षेत्र से जुड़े घटनाक्रम लगातार बदल रहे हैं। विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले दिनों में कूटनीतिक प्रयासों और सैन्य गतिविधियों दोनों पर दुनिया की नजर रहेगी। फिलहाल सभी पक्ष अपनी-अपनी सुरक्षा तैयारियां बनाए हुए हैं और किसी भी संभावित घटनाक्रम के लिए सतर्क हैं।









