भारत को कच्चे तेल की आपूर्ति करने वाले देशों में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। United Arab Emirates ने हालिया आंकड़ों में अपनी स्थिति मजबूत करते हुए भारत के प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ताओं में अपनी भूमिका बढ़ाई है, जबकि पहले दूसरे सबसे बड़े सप्लायर रहे Saudi Arabia की स्थिति अब पीछे खिसक गई है।
बिजनेस न्यूज़: भारत के कच्चे तेल आयात में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। मई महीने के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार संयुक्त अरब अमीरात (UAE) अब भारत का दूसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता बन गया है, जबकि लंबे समय से इस स्थान पर काबिज सऊदी अरब को तीसरे स्थान पर खिसकना पड़ा है। यह बदलाव वैश्विक ऊर्जा बाजार और आपूर्ति श्रृंखला में हो रहे बड़े उतार-चढ़ाव का संकेत देता है।
रूस अब भी सबसे बड़ा सप्लायर
कमोडिटी एनालिटिक्स फर्म केप्लर (Kpler) के आंकड़ों के अनुसार भारत के लिए कच्चे तेल का सबसे बड़ा स्रोत रूस बना हुआ है। मई में रूस से आयात बढ़कर लगभग 1.9 मिलियन बैरल प्रति दिन (bpd) तक पहुंच गया, जो अप्रैल की तुलना में करीब 23 प्रतिशत अधिक है। रूस से बढ़ते तेल आयात के पीछे पश्चिमी प्रतिबंधों के बाद उपलब्ध छूट और सस्ती कीमतों को प्रमुख कारण माना जा रहा है। पिछले कुछ महीनों में भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा रणनीति के तहत रूस से खरीद बढ़ाई है।
UAE ने सऊदी अरब को पीछे छोड़ा
मई में संयुक्त अरब अमीरात ने भारत को प्रतिदिन लगभग 540,000 बैरल कच्चा तेल आपूर्ति किया। हालांकि यह अप्रैल के मुकाबले 5 प्रतिशत कम है, लेकिन मार्च के 203,000 बैरल प्रतिदिन की तुलना में इसमें 166 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस तेज उछाल ने UAE को भारत का दूसरा सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बना दिया है, जबकि सऊदी अरब 398,000 बैरल प्रतिदिन की आपूर्ति के साथ तीसरे स्थान पर पहुंच गया।
रिपोर्ट के अनुसार सऊदी अरब से तेल आयात में अप्रैल की तुलना में 41 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और शिपिंग रूट्स में अनिश्चितता का असर सप्लाई पैटर्न पर पड़ा है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के आसपास बढ़ते तनाव ने भी सप्लाई चेन को प्रभावित किया है, जिससे वैकल्पिक मार्गों और पाइपलाइनों की भूमिका बढ़ गई है।
![]()
OPEC से अलग हुआ UAE, बढ़ी उत्पादन क्षमता
1 मई से संयुक्त अरब अमीरात ने आधिकारिक तौर पर OPEC और OPEC+ समूह से खुद को अलग कर लिया है। OPEC एक ऐसा संगठन है जो सदस्य देशों के लिए तेल उत्पादन सीमा तय करता है ताकि वैश्विक कीमतों को स्थिर रखा जा सके। OPEC से बाहर आने के बाद UAE अब अपने तेल उत्पादन को स्वतंत्र रूप से बढ़ा सकता है। इसका सीधा असर वैश्विक बाजार में उसकी आपूर्ति क्षमता पर देखने को मिल रहा है।
Kpler के अनुसार, मई में भारत का कुल कच्चा तेल आयात 11 प्रतिशत बढ़कर लगभग 5 मिलियन बैरल प्रति दिन तक पहुंच गया। यह पिछले वर्ष की तुलना में भी 4.17 प्रतिशत अधिक है। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता देश है और अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के माध्यम से पूरा करता है। रूस और वेनेजुएला जैसे देशों से बढ़ती खरीद ने भारत के आयात पैटर्न को और अधिक विविध बना दिया है।









