UP APO 2025 रिजल्ट विवाद पर हाई कोर्ट सख्त, आयोग से मांगा जवाब

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने UP APO 2025 रिजल्ट विवाद पर UPPSC से जवाब मांगा है। मामला आरक्षित वर्ग के मेधावी अभ्यर्थियों को सामान्य श्रेणी में समायोजन से जुड़ा है।

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने यूपी एपीओ 2025 प्रारंभिक परीक्षा परिणाम को चुनौती देने वाली याचिका पर यूपी लोक सेवा आयोग से जवाब तलब किया है। मामला आरक्षित वर्ग के मेधावी अभ्यर्थियों को सामान्य श्रेणी में समायोजित न किए जाने से जुड़ा है।

प्रयागराज: यूपी सहायक अभियोजन अधिकारी (APO) भर्ती 2025 की प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम को लेकर दाखिल याचिका पर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग से स्पष्टीकरण मांगा है। अदालत ने यह जानना चाहा है कि याचिकाकर्ताओं ने आवेदन के दौरान आयु सीमा या अन्य किसी प्रकार की छूट का लाभ लिया था या नहीं। मामले की अगली सुनवाई 18 जून को निर्धारित की गई है।

प्रारंभिक परीक्षा परिणाम को दी गई है चुनौती

इलाहाबाद हाई कोर्ट में दायर याचिका में यूपी सहायक अभियोजन अधिकारी (UP APO) भर्ती 2025 की प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम पर सवाल उठाए गए हैं। न्यायमूर्ति कुणाल रवि सिंह की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) से जवाब मांगा है।

सुनवाई के दौरान अदालत ने आयोग के अधिवक्ता से पूछा कि क्या याचिकाकर्ताओं ने भर्ती प्रक्रिया में आवेदन करते समय आयु सीमा में छूट या किसी अन्य आरक्षण संबंधी लाभ का उपयोग किया था। याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि उन्होंने किसी प्रकार की आयु छूट का लाभ नहीं लिया है।

आरक्षित वर्ग के मेधावी अभ्यर्थियों को लेकर उठाया गया मुद्दा

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम में आरक्षित वर्ग के ऐसे अभ्यर्थियों को सामान्य श्रेणी में स्थान नहीं दिया गया, जिन्होंने सामान्य वर्ग की कटऑफ के बराबर या उससे अधिक अंक प्राप्त किए थे। उनका आरोप है कि इससे उन्हें आरक्षण का लाभ भी नहीं मिला और चयन प्रक्रिया में नुकसान उठाना पड़ा।

याचिका में आयोग द्वारा 9 जनवरी 2020 को जारी कार्यालय ज्ञापन (ऑफिस मेमोरेंडम) को भी चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि उक्त व्यवस्था के तहत आरक्षण का लाभ केवल अंतिम चयन चरण में देने की बात कही गई है, जो मौजूदा आरक्षण कानून और न्यायालयों के पूर्व निर्णयों के अनुरूप नहीं है।

मुख्य परीक्षा पर भी उठे सवाल

याचिका में प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम को निरस्त करने की मांग की गई है। साथ ही मुख्य परीक्षा को स्थगित करने और मेधावी आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को सामान्य श्रेणी में समायोजित करते हुए संशोधित परिणाम जारी करने का अनुरोध किया गया है।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि आयोग की वर्तमान प्रक्रिया उत्तर प्रदेश आरक्षण अधिनियम, 1994 की धारा 3(6) और सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न फैसलों की भावना के विपरीत है। उनका दावा है कि मेरिट के आधार पर चयनित आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को सामान्य श्रेणी में गिना जाना चाहिए।

18 जून को होगी अगली सुनवाई

उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग ने UP APO 2025 प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम 30 अप्रैल 2026 को घोषित किया था। इसके बाद सफल अभ्यर्थियों के लिए मुख्य परीक्षा 28 से 30 जून के बीच प्रस्तावित की गई है।

फिलहाल हाई कोर्ट ने आयोग से संबंधित बिंदुओं पर जवाब मांगा है और मामले की अगली सुनवाई 18 जून को तय की है। अब सभी की नजर अदालत में होने वाली अगली सुनवाई और आयोग के जवाब पर टिकी हुई है, क्योंकि इसका प्रभाव भर्ती प्रक्रिया की आगे की दिशा पर पड़ सकता है।

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