भाजपा के नए प्रदेश अध्यक्ष को लेकर महीनों से चली आ रही अटकलें अब निर्णायक चरण में पहुंच गई हैं। प्रांतीय परिषद के सदस्यों की घोषणा के बाद संगठन में प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव की तैयारियों को गति मिल गई है।
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (BJP) का प्रदेश अध्यक्ष जल्द ही चुना जाएगा। इसके लिए प्रांतीय परिषद के लगभग 400 सदस्य निर्णायक भूमिका निभाएंगे और नए अध्यक्ष का नाम तय करेंगे। लखनऊ में होने वाले इस महत्वपूर्ण चुनाव पर पार्टी कार्यकर्ताओं और राजनीतिक विशेषज्ञों की नजरें टिकी हुई हैं। महीनों से भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के नाम को लेकर चल रही अटकलें अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी हैं।
भाजपा संगठन में प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया को लेकर अब सभी तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं। पार्टी के भीतर हलचल तेज हो गई है और संगठन के वरिष्ठ नेता तथा कार्यकर्ता नए प्रदेश अध्यक्ष के चयन की प्रक्रिया की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
प्रांतीय परिषद और निर्वाचन प्रक्रिया
भाजपा के संविधान के अनुसार, प्रदेश अध्यक्ष चुनने से पहले प्रांतीय परिषद के सदस्यों का चयन अनिवार्य है। उत्तर प्रदेश में कुल 403 विधानसभा क्षेत्रों से एक-एक सदस्य प्रांतीय परिषद में चुना जाता है। यह चयन उन जिलों से होता है, जहां के जिलाध्यक्ष पहले ही घोषित हो चुके हों। उत्तर प्रदेश में भाजपा ने 98 जिलों में संगठन को विभाजित किया है, जिनमें से 84 जिलाध्यक्षों का चयन हो चुका है। इस प्रक्रिया के तहत अब तक 350 से अधिक प्रांतीय परिषद के सदस्य घोषित किए जा चुके हैं। इसके अलावा पार्टी के विधानमंडल और संसद सदस्यों में से भी 10-10 प्रतिशत सदस्य प्रांतीय परिषद में शामिल होते हैं।
विधानसभा में भाजपा के 258 और विधान परिषद में 79 सदस्य हैं, जिनमें से 34 सदस्य प्रांतीय परिषद के सदस्य बनेंगे। इसी प्रकार, लोकसभा के 33 और राज्यसभा के 24 सदस्य, कुल 57 में से छह सदस्य प्रांतीय परिषद में शामिल होंगे। प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव के लिए केवल 50 प्रतिशत से अधिक जिलाध्यक्षों का चयन आवश्यक होता है। वर्तमान में 86 प्रतिशत जिलाध्यक्षों का चयन हो चुका है, जबकि 1918 मंडलों में से 1600 से अधिक में चुनाव संपन्न हो चुका है। इन आंकड़ों के अनुसार प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव में अब कोई तकनीकी बाधा नहीं है।
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चुनाव की प्रक्रिया
भाजपा में परंपरागत रूप से प्रदेश अध्यक्ष का चयन आमतौर पर सर्वसम्मति से किया जाता है। हालांकि, चुनाव की प्रारंभिक प्रक्रिया पूरी की जाएगी। मतदान सूची जारी होने के बाद चुनाव प्रक्रिया के दो दिन निर्धारित किए जाएंगे। पहले दिन नामांकन, नामों की जांच और नाम वापसी की प्रक्रिया होगी। यदि केवल एक ही उम्मीदवार नामांकन करता है, तो चुनाव सर्वसम्मति से संपन्न होगा। यदि एक से अधिक उम्मीदवार मैदान में उतरते हैं, तो दूसरे दिन मतदान और मतगणना होगी।
इस प्रक्रिया में राष्ट्रीय परिषद के सदस्यों के चुनाव की भी व्यवस्था शामिल होती है। प्रदेश से चुने गए सदस्य राष्ट्रीय परिषद में भी प्रतिनिधित्व करेंगे। प्रदेश अध्यक्ष के नामांकन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, दोनों उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक, तथा संगठन के वरिष्ठ नेता प्रस्तावक की भूमिका निभा सकते हैं।
राष्ट्रीय परिषद में प्रदेश से चुने गए सदस्य, राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव में प्रस्तावक होते हैं। अनुमान है कि इस बार राष्ट्रीय परिषद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी शामिल हो सकते हैं।









