उत्तर प्रदेश को विकसित राज्य बनाने की दिशा में योगी सरकार ने बड़ा रोडमैप पेश करते हुए सोमवार को विधानसभा के बजट सत्र के पहले दिन पहली बार आर्थिक सर्वेक्षण प्रस्तुत किया, जिसमें प्रदेश की वर्तमान आर्थिक स्थिति, विकास की दिशा और भविष्य की रणनीति का विस्तृत खाका सामने आया।
लखनऊ: उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने राज्य को विकसित अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में महत्वाकांक्षी रोडमैप पेश किया है। विधानसभा के बजट सत्र के पहले दिन सोमवार को इतिहास में पहली बार उत्तर प्रदेश का विस्तृत आर्थिक सर्वेक्षण पेश किया गया, जिसमें पिछले आठ वर्षों की प्रगति, मौजूदा आर्थिक स्थिति और भविष्य की विकास रणनीति का खाका सामने आया।
आर्थिक सर्वेक्षण में स्पष्ट किया गया है कि राज्य सरकार निवेश आकर्षित करने, रोजगार सृजन, सतत विकास, डिजिटल अर्थव्यवस्था और हरित ऊर्जा (ग्रीन एनर्जी) को प्राथमिकता दे रही है। इसके साथ ही युवाओं के कौशल विकास, स्टार्टअप को बढ़ावा और आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था के निर्माण पर विशेष जोर दिया गया है।
तीन गुना बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में कहा कि पिछले आठ वर्षों में उत्तर प्रदेश ने “बीमारू राज्य” की छवि से निकलकर “ब्रेक-थ्रू इकॉनमी” के रूप में पहचान बनाई है। आर्थिक सर्वेक्षण के आंकड़े इस दावे को बल देते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 2016-17 में राज्य की सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) 13.30 लाख करोड़ रुपये थी, जो 2025-26 में बढ़कर 36 लाख करोड़ रुपये से अधिक होने का अनुमान है। यानी लगभग नौ वर्षों में प्रदेश की अर्थव्यवस्था करीब तीन गुना हो जाएगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह वृद्धि बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे के विकास, औद्योगिक निवेश, सेवा क्षेत्र के विस्तार और बेहतर प्रशासनिक नीतियों का परिणाम है।
प्रति व्यक्ति आय दोगुनी
आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में प्रति व्यक्ति आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
- 2016-17: 54,564 रुपये
- 2024-25: 1,09,844 रुपये
- 2025-26 (अनुमान): 1.20 लाख रुपये
इस तरह बीते आठ वर्षों में औसत आय लगभग दोगुनी हो गई है, जो ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में आय अवसरों के विस्तार का संकेत देती है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में उत्तर प्रदेश का योगदान बढ़ा है। 2016-17 में यह 8.6 प्रतिशत था, जो 2024-25 में बढ़कर 9.1 प्रतिशत हो गया है। इससे स्पष्ट है कि भारत की समग्र वृद्धि में यूपी की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है।

‘बॉटलनेक स्टेट’ से ‘ब्रेक-थ्रू स्टेट’ तक का सफर
बजट सत्र की शुरुआत हंगामेदार रही। विधानमंडल के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने सरकार की उपलब्धियां गिनाईं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश को “बॉटलनेक स्टेट” से “ब्रेक-थ्रू स्टेट” बनाने में सरकार सफल रही है। हालांकि, विपक्षी दलों ने राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान नारेबाजी की और वेल में हंगामा किया, लेकिन करीब 30 मिनट में भाषण पूरा हुआ। राज्यपाल ने कानून-व्यवस्था, औद्योगिक निवेश और बुनियादी ढांचे के विकास को सरकार की बड़ी उपलब्धियां बताया।
एक्सप्रेसवे और एयरपोर्ट से बदलेगी कनेक्टिविटी
आर्थिक सर्वेक्षण में राज्य के बुनियादी ढांचे के विस्तार पर विशेष फोकस किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार:
- उत्तर प्रदेश में 12 नए एक्सप्रेसवे या तो बन चुके हैं या निर्माणाधीन हैं।
- ये एक्सप्रेसवे औद्योगिक कॉरिडोर, लॉजिस्टिक्स हब और व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा देंगे।
- कई नए हवाई अड्डों पर काम चल रहा है, जिससे राज्य की घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी मजबूत होगी।
सबसे बड़ा आकर्षण जेवर (नोएडा) अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा है। इसके चालू होने के बाद उत्तर प्रदेश पांच अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट वाला देश का पहला राज्य बन जाएगा। इससे न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि विदेशी निवेश और व्यापारिक संपर्क भी बढ़ेंगे।
निवेश, रोजगार और ग्रीन एनर्जी पर जोर
सर्वेक्षण में बताया गया है कि सरकार निम्न क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दे रही है:
- औद्योगिक निवेश: बड़े मैन्युफैक्चरिंग प्लांट और MSME सेक्टर को बढ़ावा
- रोजगार सृजन: युवाओं के लिए नई नौकरियां और स्वरोजगार के अवसर
- डिजिटल इकॉनमी: ई-गवर्नेंस, डिजिटल पेमेंट और आईटी सेक्टर का विस्तार
- ग्रीन एनर्जी: सौर और नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं में निवेश
- स्टार्टअप इकोसिस्टम: वित्तीय सहायता, मेंटरशिप और बाजार पहुंच
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि अगर यह विकास गति बनी रहती है तो उत्तर प्रदेश आने वाले वर्षों में भारत के शीर्ष तीन आर्थिक राज्यों में शामिल हो सकता है।










