UP Election 2027: बढ़ापुर सीट पर जातीय समीकरण बनेगा निर्णायक, SC-OBC वोट से तय हो सकती है हार-जीत

UP Election 2027 में बढ़ापुर विधानसभा सीट पर SC और OBC वोटर निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। जातीय समीकरण और सामाजिक वोट बैंक से चुनावी मुकाबले की तस्वीर

उत्तर प्रदेश की बढ़ापुर विधानसभा सीट की विधानसभा संख्या 19 है और यह बिजनौर जिले के साथ-साथ मुरादाबाद लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। 2022 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के सुशांत कुमार सिंह ने इस सीट से जीत दर्ज की थी।

लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर राजनीतिक दलों ने तैयारियां तेज कर दी हैं। बिजनौर जिले की बढ़ापुर विधानसभा सीट भी उन सीटों में शामिल है, जहां अगले चुनाव में मुकाबला दिलचस्प रहने की उम्मीद है। मुस्लिम, क्षत्रिय, अनुसूचित जाति (SC) और विभिन्न ओबीसी समुदायों की बड़ी आबादी वाली इस सीट पर बीजेपी और समाजवादी पार्टी के बीच कड़ी टक्कर की संभावना जताई जा रही है।

बढ़ापुर विधानसभा सीट का नंबर 19 है। यह बिजनौर जिले में आती है, लेकिन लोकसभा चुनाव के लिहाज से मुरादाबाद संसदीय क्षेत्र का हिस्सा है। 2022 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के सुशांत कुमार सिंह ने समाजवादी पार्टी के कपिल कुमार को हराकर सीट पर कब्जा किया था। अब 2027 के चुनाव में सपा इस सीट पर वापसी की कोशिश करेगी।

2022 में बीजेपी ने दर्ज की थी जीत

2022 के विधानसभा चुनाव में बढ़ापुर सीट पर बीजेपी को 1,00,100 वोट मिले थे, जबकि समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार कपिल कुमार को 85,755 वोट हासिल हुए। बहुजन समाज पार्टी के मोहम्मद गाजी 46,638 वोट के साथ तीसरे स्थान पर रहे। कांग्रेस उम्मीदवार को सिर्फ 1,452 वोट मिले। बीजेपी ने सपा को 14,345 वोटों के अंतर से हराया था। वोट शेयर की बात करें तो बीजेपी को करीब 41.58 प्रतिशत, सपा को 35.62 प्रतिशत और बसपा को 19.37 प्रतिशत वोट मिले थे।

बसपा के मजबूत प्रदर्शन ने भी चुनावी गणित को प्रभावित किया था। पार्टी के उम्मीदवार मोहम्मद गाजी को 46 हजार से अधिक वोट मिले, जिससे विपक्षी वोटों के बंटवारे का फायदा बीजेपी को मिला। ऐसे में 2027 में विपक्षी दलों के बीच वोटों का बिखराव कितना होता है, यह बेहद अहम होगा।

2024 लोकसभा चुनाव में बदली तस्वीर

2024 के लोकसभा चुनाव में बढ़ापुर विधानसभा क्षेत्र का चुनावी समीकरण अलग नजर आया। यहां समाजवादी पार्टी को 1,03,426 वोट, बीजेपी को 99,450 और बसपा को 18,604 वोट मिले। सपा की रुचिवीरा ने बीजेपी के कुंवर सर्वेश कुमार को बढ़ापुर विधानसभा क्षेत्र में 3,956 वोटों से पीछे छोड़ा। 2022 की तुलना में सपा के वोट में लगभग 8 हजार की बढ़ोतरी हुई, जबकि बसपा का समर्थन काफी कम हुआ।

इन आंकड़ों से संकेत मिलता है कि 2022 में बसपा के साथ गए कुछ मुस्लिम मतदाताओं का झुकाव 2024 में सपा की ओर हुआ। इसके अलावा सपा को सैनी और पाल जैसे कुछ ओबीसी समूहों का समर्थन मिलने की बात भी सामने आई।

बढ़ापुर में क्या है जातीय समीकरण?

उपलब्ध अनुमानित आंकड़ों के अनुसार, बढ़ापुर विधानसभा क्षेत्र में मुस्लिम मतदाता करीब 1.20 लाख हो सकते हैं। इसके बाद क्षत्रिय समुदाय के लगभग 58 हजार और एससी मतदाताओं की संख्या करीब 55 हजार बताई जाती है। इसके अलावा सैनी समुदाय के लगभग 35 हजार, पंजाबी करीब 25 हजार और पाल समाज के करीब 15 हजार मतदाता होने का अनुमान है। जाट और कश्यप समुदाय की संख्या लगभग 8-8 हजार, प्रजापति करीब 6 हजार तथा वैश्य और ब्राह्मण समुदाय के करीब 3-3 हजार मतदाता बताए जाते हैं।

इन आंकड़ों को आधिकारिक जातीय जनगणना के आंकड़े नहीं माना जाना चाहिए, बल्कि चुनावी विश्लेषण में इस्तेमाल होने वाले अनुमान के तौर पर देखना चाहिए।

SC और OBC वोट क्यों होंगे महत्वपूर्ण?

बढ़ापुर में मुस्लिम और क्षत्रिय मतदाता सबसे बड़े सामाजिक समूहों में हैं, लेकिन चुनावी मुकाबले को केवल इन दो वर्गों के आधार पर समझना पर्याप्त नहीं होगा। सैनी, पाल, कश्यप, प्रजापति सहित विभिन्न ओबीसी समुदायों और एससी मतदाताओं की संयुक्त संख्या चुनावी परिणाम पर बड़ा प्रभाव डाल सकती है।अगर किसी एक दल को इन समुदायों का व्यापक समर्थन मिलता है तो वह करीबी मुकाबले में बढ़त बना सकता है। यही वजह है कि 2027 के चुनाव से पहले बीजेपी और सपा दोनों की रणनीति में पिछड़े और दलित मतदाताओं को साधना महत्वपूर्ण रहने की संभावना है।

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