वंदे भारत ट्रेनों के लिए साबरमती में बनेगा आधुनिक मेंटेनेंस हब, ₹307 करोड़ से 24 कोच वाली ट्रेनें होंगी तैयार

साबरमती में ₹307 करोड़ से वंदे भारत ट्रेनों का मेंटेनेंस हब बन रहा है। यहां 24 कोच वाली ट्रेनों की भारी मरम्मत और जांच होगी।

गुजरात के साबरमती में रेलवे 307 करोड़ रुपये की लागत से वंदे भारत ट्रेनों के रखरखाव का आधुनिक केंद्र बना रहा है। यहां 24 कोच वाली ट्रेनों की भारी मरम्मत, पहियों की ओवरहॉलिंग और इलेक्ट्रिकल उपकरणों की जांच की सुविधा मिलेगी।

नई दिल्ली: वंदे भारत ट्रेनों के रखरखाव को अधिक सुविधाजनक बनाने के लिए पश्चिम रेलवे के अहमदाबाद मंडल में साबरमती स्थित इंटीग्रेटेड कोचिंग डिपो का विस्तार किया जा रहा है। करीब 307 करोड़ रुपये की इस परियोजना में भारी मरम्मत और पहियों की देखभाल के लिए आधुनिक सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। इससे 24 कोच वाली वंदे भारत ट्रेनों की नियमित जांच और बड़ी मरम्मत एक ही परिसर में की जा सकेगी।

साबरमती में 307 करोड़ रुपये से बन रहा वंदे भारत मेंटेनेंस हब

वंदे भारत ट्रेनों की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए रेलवे गुजरात के साबरमती में आधुनिक रखरखाव केंद्र तैयार कर रहा है। पश्चिम रेलवे के अहमदाबाद मंडल की यह परियोजना इंटीग्रेटेड कोचिंग डिपो के दूसरे चरण का हिस्सा है। इसके तहत ट्रेनों की भारी मरम्मत, पहियों की जांच और तकनीकी उपकरणों के रखरखाव के लिए अलग-अलग सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।

वंदे भारत ट्रेनों के लिए साबरमती में बनेगा आधुनिक मेंटेनेंस हब, ₹307 करोड़ से 24 कोच वाली ट्रेनें होंगी तैयार

परियोजना का उद्देश्य ट्रेनों की मरम्मत के लिए जरूरी व्यवस्थाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध कराना है। इससे बड़ी मरम्मत के लिए ट्रेनों को दूसरे शहरों में भेजने की जरूरत कम हो सकती है। भारी मरम्मत शेड का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है, जबकि पहियों और एक्सल की देखभाल के लिए बनाया गया शेड भी तैयार है।

24 कोच वाली ट्रेनों की मरम्मत के लिए दो लाइनें

इस केंद्र को 24 कोच वाली वंदे भारत ट्रेनों की नियमित जांच और निर्धारित अंतराल पर होने वाली बड़ी मरम्मत के लिए तैयार किया जा रहा है। यहां एसएस-I और एसएस-II नाम से दो तरह की निर्धारित मरम्मत की सुविधाएं होंगी।

योजना के अनुसार, 24 कोच वाली एक ट्रेन की एसएस-I मरम्मत में लगभग 30 दिन और एसएस-II मरम्मत में करीब 45 दिन लग सकते हैं। डिपो में सालाना लगभग 12 ट्रेनों की एसएस-I या आठ ट्रेनों की एसएस-II मरम्मत करने की क्षमता होगी।

भारी मरम्मत शेड करीब 322 मीटर लंबा और 25 मीटर चौड़ा है। इसमें दो अलग-अलग मेंटेनेंस लाइनें बनाई जा रही हैं। पहली लाइन पर विशेष जैक की मदद से कोच उठाकर उनके नीचे लगे बोगी सिस्टम को हटाया जा सकेगा। इससे पहियों और कोच के निचले हिस्सों की मरम्मत आसान होगी।

दूसरी लाइन पर कोच के अंदरूनी हिस्सों, यात्रियों की सुविधाओं, ब्रेक सिस्टम और बिजली से जुड़े उपकरणों की जांच और देखभाल की जाएगी। इसके अतिरिक्त, महत्वपूर्ण मैकेनिकल और इलेक्ट्रिकल उपकरणों को खोलने, उनकी मरम्मत करने और दोबारा जोड़ने के लिए भी अलग व्यवस्था विकसित की जा रही है।

पहियों और एक्सल की मरम्मत के लिए आधुनिक मशीनें

साबरमती में पहियों और एक्सल की ओवरहॉलिंग के लिए बनाया गया शेड लगभग 75 मीटर लंबा और 40 मीटर चौड़ा है। इस सुविधा में पहियों की सतह को दोबारा ठीक करने, उनकी गोलाई सुधारने और संतुलन सुनिश्चित करने जैसे काम किए जाएंगे।

इसके लिए कंप्यूटर नियंत्रित मशीनें, व्हील बैलेंसिंग मशीन और हाइड्रोलिक व्हील प्रेस जैसे उपकरण लगाए जाएंगे। इन मशीनों की मदद से पहियों की मरम्मत अधिक व्यवस्थित तरीके से की जा सकेगी। शेड और उससे जुड़ी सर्विस बिल्डिंग को रेलवे को सौंपने के लिए तैयार बताया गया है।

रेलवे ट्रैक और बिजली सब-स्टेशन का काम भी पूरा

परियोजना के तहत डिपो में चार स्टेबलिंग लाइनों पर लगभग 2,547 मीटर रेल ट्रैक बिछाने का काम पूरा हो चुका है। भारी मरम्मत शेड की दोनों मेंटेनेंस लाइनों का निर्माण भी लगभग पूरा हो गया है।

इसके साथ ही 30 मीटर लंबी और 20 मीटर चौड़ी बिजली सब-स्टेशन बिल्डिंग का निर्माण पूरा कर रेलवे को सौंप दिया गया है। यह डिपो की बिजली संबंधी जरूरतों को पूरा करने में मदद करेगी।

परियोजना पूरी तरह चालू होने के बाद साबरमती में वंदे भारत ट्रेनों के कोच, पहियों और इलेक्ट्रिकल उपकरणों के रखरखाव की कई सुविधाएं एक ही परिसर में उपलब्ध होंगी। इससे अहमदाबाद मंडल में आधुनिक ट्रेनों की मरम्मत क्षमता बढ़ने और रखरखाव की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित होने की उम्मीद है।

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