उत्तर प्रदेश में बारिश और बाढ़ का असर अभी भी कई इलाकों में दिखाई दे रहा है। गंगा, यमुना, घाघरा, सरयू समेत कई नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी और तेज कटान के कारण नदी किनारे बसे गांवों में लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। फर्रुखाबाद में गंगा की तेज कटान से पक्के मकानों के नदी में समाने का सिलसिला जारी है। वहीं बलिया में बाढ़ का पानी निचले इलाकों में घुस गया है, जिससे कार और बाइकें पानी में डूब गईं। उन्नाव में भी बाढ़ का पानी रिहाइशी बस्तियों तक पहुंच गया है और कई जगह गलियों में नाव चलाने की नौबत आ गई है।
फर्रुखाबाद में गंगा का जलस्तर बढ़ने के साथ नदी का कटान भी तेज हो गया है। रिपोर्ट के मुताबिक पिछले दो दिनों में छह पक्के मकान गंगा में समा गए। इससे नदी किनारे रहने वाले लोगों में दहशत का माहौल है। इससे पहले भी जिले के अलग-अलग इलाकों में गंगा की कटान से बड़ी संख्या में मकान और झोपड़ियां प्रभावित हो चुकी हैं। अगस्त के आखिर में भी रिपोर्ट सामने आई थी कि गंगा के उफान और कटान से दर्जनों घर प्रभावित हुए थे।
फर्रुखाबाद के समेचीपुर चितार क्षेत्र में गंगा की कटान विशेष रूप से चिंता का कारण बनी हुई है। स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक यहां छह पक्के मकान और कई झोपड़ियां पहले ही नदी में समा चुकी थीं। गंगा के लगातार कटाव के कारण किनारे बसे दूसरे घरों पर भी खतरा बना हुआ है। लोगों को आशंका है कि अगर नदी का जलस्तर और कटान इसी तरह जारी रहा तो आने वाले दिनों में और मकानों को नुकसान पहुंच सकता है।
गंगा के जलस्तर में उतार-चढ़ाव के साथ कटान की रफ्तार भी बदल रही है। कई जगह नदी का पानी घटने के बाद भी किनारों की मिट्टी कमजोर हो जाने से कटान जारी रहता है। यही वजह है कि नदी किनारे बसे परिवारों के लिए सिर्फ जलस्तर का बढ़ना ही खतरा नहीं है, बल्कि जमीन खिसकने और अचानक मकान गिरने का जोखिम भी बना रहता है।
बलिया में गंगा और सरयू के बढ़े जलस्तर ने निचले इलाकों की परेशानी बढ़ा दी है। कई जगह बाढ़ का पानी सड़क और आबादी वाले क्षेत्रों तक पहुंच गया है। कार और बाइकें पानी में डूबने की तस्वीरें सामने आई हैं। बाढ़ प्रभावित इलाकों में लोगों को आने-जाने में परेशानी हो रही है और कई परिवार ऊंचे स्थानों या घरों की ऊपरी मंजिलों का सहारा ले रहे हैं। बलिया में गंगा और घाघरा के बढ़े जलस्तर से 48 गांवों के प्रभावित होने की रिपोर्ट पहले भी सामने आ चुकी है।
बाढ़ का असर सिर्फ खेतों और गांवों तक सीमित नहीं है। शहर और कस्बों के निचले इलाकों में भी पानी घुसने से रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है। घरों के बाहर पानी जमा होने के कारण वाहन चलाना मुश्किल हो गया है। कई जगह लोग जरूरी सामान लेने के लिए भी पानी के बीच से निकलने को मजबूर हैं। जिन इलाकों में सड़कें पूरी तरह डूब गई हैं, वहां नाव लोगों के आवागमन का साधन बन गई है।
उन्नाव में पांडू नदी का पानी बस्तियों तक पहुंचने के बाद स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो गई है। कई रिहाइशी इलाकों में जलभराव इतना बढ़ गया कि गलियों में नाव चलाने की स्थिति बन गई। इससे स्थानीय लोगों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है। बाढ़ के पानी के बीच घरों से निकलना मुश्किल होने के कारण कई परिवारों को जरूरी कामों के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है।
उन्नाव में नदी की कटान से सड़क संपर्क भी प्रभावित हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक कालीमिट्टी-शिवराजपुर मार्ग का एक हिस्सा गंगा की तेज कटान में बह गया। यह सड़क आसपास के करीब 40 गांवों के लोगों के लिए महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है। सड़क का हिस्सा बह जाने से ग्रामीणों के आवागमन पर असर पड़ा है और वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करना पड़ रहा है।
गोंडा में बाढ़ के पानी के साथ मगरमच्छ के रिहाइशी इलाके तक पहुंचने की घटना ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी। घाघरा यानी सरयू नदी के बाढ़ के पानी के साथ एक मगरमच्छ आबादी के नजदीक पहुंच गया। स्थानीय लोगों ने उसे देखकर दहशत जताई और उसके गांव की ओर बढ़ने से पहले ही उसे दूर भगाने की कोशिश की। बाढ़ के दौरान नदी से जुड़े जलीय जीवों के आबादी वाले क्षेत्रों में पहुंचने का खतरा भी बढ़ जाता है।
प्रदेश के कई अन्य जिलों में भी बारिश और बाढ़ से हालात प्रभावित हैं। हालिया सरकारी आंकड़ों के हवाले से रिपोर्टों में बताया गया कि उत्तर प्रदेश के 26 जिलों में करीब 3.53 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हुए थे। हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया और राहत शिविरों में भी लोगों को रखा गया। इस दौरान प्रदेश के कई जिलों में बाढ़ जैसी स्थिति बनी रही।
वाराणसी में भी गंगा का जलस्तर चिंता का कारण रहा। हालिया रिपोर्ट के मुताबिक नदी चेतावनी स्तर से ऊपर पहुंच गई थी और कई घाटों पर पानी चढ़ गया था। बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए राहत शिविर बनाए गए और प्रशासन की ओर से भोजन, पानी, बिस्तर तथा चिकित्सा जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की जानकारी दी गई।
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के चलते उत्तर प्रदेश के कई जिलों में बारिश को लेकर प्रशासन को सतर्क किया गया था। भारी बारिश वाले संभावित जिलों की सूची में पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिले शामिल रहे। इनमें फर्रुखाबाद, कन्नौज, लखनऊ, अयोध्या, बलिया, बहराइच, लखीमपुर खीरी, बरेली, शाहजहांपुर, प्रयागराज, वाराणसी, कानपुर सहित कई इलाके शामिल थे।
लगातार बारिश का असर सरकारी और अन्य गतिविधियों पर भी पड़ा है। बारिश और खराब मौसम के कारण यूपी होमगार्ड भर्ती की शारीरिक दक्षता परीक्षा यानी PET की तारीख आगे बढ़ाए जाने की जानकारी सामने आई है। पहले यह परीक्षा 8 सितंबर से शुरू होनी थी, जिसे अब 14 सितंबर से शुरू करने की बात कही गई है।
हालांकि प्रदेश के कुछ हिस्सों में अब बारिश की गतिविधियां कमजोर पड़ने के संकेत भी मिल रहे हैं। मंगलवार सुबह आगरा में मौसम साफ रहने और गंगा के जलस्तर में गिरावट की जानकारी सामने आई। वाराणसी और कुछ अन्य इलाकों में भी जलस्तर में बदलाव देखने को मिला। लेकिन जिन क्षेत्रों में पहले से बाढ़ का पानी जमा है, वहां जलस्तर कम होने के बाद भी सामान्य स्थिति लौटने में समय लग सकता है।
बाढ़ के दौरान सबसे बड़ी चुनौती उन गांवों में है जो नदियों के किनारे बसे हैं। इन क्षेत्रों में सड़क संपर्क टूटने के बाद नावों के जरिए लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जाता है। प्रशासन की ओर से राहत और बचाव दलों को सक्रिय रखा गया है। नदी के जलस्तर की लगातार निगरानी की जा रही है ताकि अचानक बढ़ते पानी की स्थिति में लोगों को समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सके।
फर्रुखाबाद में मकानों के नदी में समाने की घटनाएं बताती हैं कि इस समय सिर्फ जलभराव ही नहीं बल्कि नदी कटान भी बड़ा खतरा बन चुका है। जिन परिवारों के घर नदी के बिल्कुल किनारे हैं, उनके लिए स्थिति सबसे ज्यादा संवेदनशील है। घर का कुछ हिस्सा कमजोर होने के बाद अचानक पूरी संरचना गिर सकती है। ऐसे में प्रशासन और स्थानीय लोगों के लिए खतरे वाले स्थानों को चिह्नित करना और जरूरत पड़ने पर परिवारों को पहले ही सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना महत्वपूर्ण हो जाता है।
बलिया, उन्नाव और गोंडा की घटनाएं बाढ़ के अलग-अलग रूप को सामने ला रही हैं। कहीं सड़क पर खड़ी गाड़ियां पानी में डूब रही हैं, कहीं घरों और गलियों में नाव चल रही है और कहीं बाढ़ के पानी के साथ जंगली जीव आबादी तक पहुंच रहे हैं। इन घटनाओं के बीच लोगों को सतर्क रहने और प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों का पालन करने की जरूरत है।
फिलहाल उत्तर प्रदेश में नदियों के जलस्तर और मौसम पर लगातार नजर रखी जा रही है। जिन इलाकों में गंगा, घाघरा, सरयू और दूसरी नदियां खतरे या चेतावनी स्तर के आसपास हैं, वहां स्थिति तेजी से बदल सकती है। प्रशासन के लिए चुनौती यह है कि एक तरफ बारिश और बाढ़ से प्रभावित लोगों को राहत दी जाए और दूसरी तरफ नदी कटान से खतरे में आए परिवारों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जाए।
प्रदेश में बारिश का दौर कमजोर पड़ने के बाद भी बाढ़ का असर तुरंत खत्म नहीं होगा। नदियों में ऊपर से आने वाला पानी, बैराजों से छोड़ा गया पानी और स्थानीय जलभराव कई दिनों तक स्थिति को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए प्रभावित जिलों में राहत और बचाव कार्य जारी रखना जरूरी होगा। फर्रुखाबाद में गंगा की कटान से छह मकानों का नदी में समाना और बलिया-उन्नाव में बाढ़ के पानी का आबादी तक पहुंचना इस बात का संकेत है कि कई इलाकों में अभी खतरा टला नहीं है।








