यूपी की जेलों में AI निगरानी और इलेक्ट्रिक फेंसिंग, CCTV कैमरों की संख्या 7,000 के पार

यूपी की जेलों में 7,000 से अधिक CCTV कैमरे और 750 AI आधारित कैमरे लगाए गए हैं। इलेक्ट्रिक फेंसिंग, डिजिटल लाइब्रेरी और पेपरलेस प्रशासन पर भी जोर है।

उत्तर प्रदेश में जेलों की सुरक्षा मजबूत करने के लिए CCTV कैमरों की संख्या 7,000 से अधिक कर दी गई है। AI आधारित निगरानी, इलेक्ट्रिक फेंसिंग, पेपरलेस प्रशासन और डिजिटल लाइब्रेरी जैसी सुविधाओं के जरिए कारागारों का आधुनिकीकरण किया जा रहा है।

लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार जेलों की सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए तकनीक का दायरा बढ़ा रही है। प्रदेश की जेलों में अब 7,000 से अधिक CCTV कैमरे लगाए गए हैं, जबकि 750 से ज्यादा AI आधारित कैमरों को मुख्यालय के कंट्रोल रूम से जोड़ा गया है। इसके साथ ही इलेक्ट्रिक फेंसिंग, डिजिटल प्रक्रियाओं और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग जैसी सुविधाओं पर भी काम किया जा रहा है।

यूपी की जेलों में 7,000 से ज्यादा CCTV कैमरों से निगरानी

उत्तर प्रदेश में कारागारों की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए निगरानी तकनीक का विस्तार किया जा रहा है। राज्य सरकार जेलों में बंदियों की गतिविधियों पर नजर रखने, सुरक्षा संबंधी जोखिम कम करने और प्रशासनिक कामकाज को अधिक पारदर्शी बनाने पर जोर दे रही है। इसी क्रम में प्रदेश की जेलों में CCTV कैमरों की संख्या बढ़ाकर 7,000 से अधिक कर दी गई है।

डीजी कारागार एवं सुधार सेवाएं पीसी मीना के अनुसार, जून 2025 में प्रदेश की जेलों में लगभग 4,900 CCTV कैमरे थे। अब इनकी संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। कैमरों का नेटवर्क बढ़ने से जेल परिसरों और बैरकों में निगरानी व्यवस्था का दायरा व्यापक हुआ है।

इसके अलावा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित JARVIS निगरानी प्रणाली का इस्तेमाल भी किया जा रहा है। इस प्रणाली के 750 से अधिक कैमरों को कारागार मुख्यालय स्थित कंट्रोल रूम से जोड़ा गया है। इससे जेलों की निगरानी व्यवस्था को तकनीकी रूप से मजबूत बनाने और सुरक्षा प्रबंधन को बेहतर करने का प्रयास किया जा रहा है।

इलेक्ट्रिक फेंसिंग से मजबूत होगी बाहरी सुरक्षा

जेलों की सुरक्षा को केवल परिसर के भीतर निगरानी तक सीमित नहीं रखा गया है। बाहरी घेराबंदी को मजबूत बनाने के लिए मुख्य दीवारों पर फेंसिंग वायर की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही परिधीय सुरक्षा के लिए इलेक्ट्रिक फेंसिंग वायर सिस्टम भी स्थापित किया गया है।

इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य जेल परिसर की बाहरी सुरक्षा को मजबूत करना और संभावित सुरक्षा जोखिमों को कम करना है। CCTV कैमरों, AI आधारित निगरानी और फेंसिंग सिस्टम को मिलाकर बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।
कारागार प्रशासन में डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ाने के लिए समयपूर्व रिहाई से जुड़े मामलों के निस्तारण की प्रक्रिया भी ऑनलाइन की जा रही है। इसके लिए ‘ई-प्रिसंस अर्ली रिलीज प्रोसेसिंग मॉड्यूल’ शुरू किया गया है। इस व्यवस्था का उद्देश्य संबंधित मामलों की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित, पारदर्शी और समयबद्ध बनाना है। विभाग के अनुसार, इस मॉड्यूल को लागू करने वाला उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य है।

पेपरलेस प्रशासन और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा

कारागारों के आधुनिकीकरण के तहत प्रत्येक जेल में मेजरमेंट कलेक्शन यूनिट (MCU) रूम की स्थापना पूरी कर ली गई है। वहीं, कारागार मुख्यालय और जेलों के प्रशासनिक कार्यालयों को पेपरलेस बनाने की प्रक्रिया शुरू की गई है। इससे दस्तावेजों से संबंधित कामकाज को डिजिटल माध्यम से संचालित करने और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को व्यवस्थित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

बंदियों को न्यायालयों में पेश करने की प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए प्रदेश की सभी कारागारों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग यूनिट स्थापित की जा रही हैं। इस तकनीक से जेलों और न्यायालयों के बीच समन्वय बेहतर किया जा सकेगा। साथ ही, जहां वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेशी संभव होगी, वहां आवाजाही से जुड़ी व्यवस्थाओं को सरल बनाने में मदद मिल सकती है।

सोलर लाइट और डिजिटल लाइब्रेरी पर भी काम

प्रदेश की जेलों में ऊर्जा दक्षता और वैकल्पिक ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए छतों पर सोलर पैनल लगाने की प्रक्रिया चल रही है। इसके अलावा 58 कारागारों में सोलर हाई मास्ट लाइटें स्थापित की जा रही हैं। इन पहलों का उद्देश्य जेल परिसरों में प्रकाश व्यवस्था बेहतर करना और ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों का इस्तेमाल बढ़ाना है।

बंदियों के शैक्षिक और बौद्धिक विकास को ध्यान में रखते हुए प्रदेश की 74 कारागारों में डिजिटल लाइब्रेरी भी स्थापित की गई हैं। इनके जरिए बंदियों को पढ़ने और ज्ञान हासिल करने के लिए डिजिटल संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

सरकार की इन पहलों में सुरक्षा व्यवस्था के साथ प्रशासनिक सुधार, ऊर्जा प्रबंधन और बंदियों के शैक्षिक विकास पर भी ध्यान दिया जा रहा है। आने वाले समय में इन तकनीकों और सुविधाओं का प्रभाव उनके प्रभावी संचालन और नियमित निगरानी पर निर्भर करेगा।

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