गोरखपुर के विपुल पांडेय ने सात साल की तैयारी, कई असफलताओं और आर्थिक मुश्किलों के बावजूद हार नहीं मानी। हिंदी मीडियम और अफसर न होने का ताना उनके लिए प्रेरणा बना। लगातार मेहनत के बाद उन्होंने UPPSC परीक्षा पास कर अधिकारी बनने का सपना पूरा किया।
UPPSC Success Story: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर निवासी विपुल कुमार पांडेय की सफलता की कहानी संघर्ष, धैर्य और आत्मविश्वास की मिसाल है। टेक्निकल पढ़ाई के बाद सिविल सेवा की तैयारी शुरू करने वाले विपुल को कई परीक्षाओं में असफलता मिली। कभी आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ा, तो कभी लोगों के तानों ने हौसला तोड़ने की कोशिश की। इसके बावजूद उन्होंने तैयारी जारी रखी और आखिरकार UPPSC परीक्षा पास कर अधिकारी बनने में कामयाबी हासिल की।
गोरखपुर से शुरू हुआ सफर, डिप्लोमा के बाद BTech की पढ़ाई
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर के रहने वाले विपुल कुमार पांडेय की कहानी उन युवाओं को प्रेरित करती है, जो बार-बार असफल होने के बाद अपने लक्ष्य को लेकर संदेह करने लगते हैं। विपुल ने शुरुआती शिक्षा पूरी करने के बाद तकनीकी क्षेत्र में पढ़ाई करने का फैसला लिया। उन्होंने पहले डिप्लोमा किया और फिर बरेली की रोहिलखंड यूनिवर्सिटी से BTech की डिग्री हासिल की।
उनके पिता सिंचाई विभाग में सर्वेयर के पद पर कार्यरत थे। पढ़ाई के बाद विपुल ने कोचिंग में पढ़ाना शुरू किया। इसी दौरान उनकी रुचि सिविल सेवा में बढ़ने लगी। धीरे-धीरे उन्होंने प्रशासनिक अधिकारी बनने का लक्ष्य तय कर लिया और इसकी तैयारी में जुट गए।
हिंदी मीडियम और IAS-PCS को लेकर मिला ताना बना प्रेरणा
विपुल के जीवन में एक ऐसी घटना हुई, जिसने उनके करियर की दिशा बदल दी। कोचिंग में पढ़ाने के दौरान एक अभिभावक ने उनकी योग्यता पर सवाल उठाते हुए कहा कि वह हिंदी मीडियम से पढ़े हैं और IAS-PCS अधिकारी भी नहीं हैं। इस टिप्पणी ने उन्हें भीतर तक प्रभावित किया।
विपुल के लिए यह सिर्फ एक ताना नहीं था, बल्कि अपनी क्षमता साबित करने की चुनौती बन गया। उन्होंने तय किया कि वह मेहनत के दम पर अपनी पहचान बनाएंगे। इसके बाद उन्होंने सिविल सेवा की तैयारी को गंभीरता से आगे बढ़ाया।
यह घटना उनके लिए प्रेरणा का कारण बनी। उन्होंने अपनी पृष्ठभूमि या भाषा को कमजोरी मानने के बजाय लक्ष्य हासिल करने पर ध्यान केंद्रित किया।
सात साल तक मिली असफलता, फिर भी जारी रखी तैयारी
विपुल ने वर्ष 2018 में UPSC और विभिन्न राज्यों की सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी शुरू की। इस दौरान उन्होंने UPPSC के साथ हरियाणा और उत्तराखंड जैसी राज्य स्तरीय परीक्षाओं में भी अवसर तलाशे। हालांकि, उन्हें लगातार कई असफलताओं का सामना करना पड़ा।
कभी वह प्रारंभिक परीक्षा में सफल नहीं हो पाए, तो कभी मुख्य परीक्षा में आगे नहीं बढ़ सके। उत्तराखंड PCS की एक परीक्षा में वह महज 0.01 अंक से पीछे रह गए। इतनी कम अंतर से असफल होना उनके लिए निराशाजनक था, लेकिन उन्होंने तैयारी छोड़ने का फैसला नहीं किया।
सात साल के इस सफर में विपुल ने बार-बार अपनी रणनीति पर काम किया और कमियों को दूर करने की कोशिश की। दिल्ली, बरेली और दूसरे शहरों के बीच उनका आना-जाना भी तैयारी का हिस्सा रहा।
रेलवे स्टेशन पर गुजारी रातें, मुश्किल हालात में भी नहीं मानी हार
तैयारी के दौरान विपुल को आर्थिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ा। कई बार परिस्थितियां इतनी कठिन हो गईं कि उन्हें रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर रात गुजारनी पड़ी। परीक्षा में असफल होने के बाद निराशा में उन्होंने एक बार अपना प्रश्नपत्र भी फाड़ दिया था।
इसके बावजूद उन्होंने अपने लक्ष्य से दूरी नहीं बनाई। खराब स्वास्थ्य और बुखार जैसी परिस्थितियों में भी वह पढ़ाई जारी रखने की कोशिश करते रहे। लगातार मिलने वाली असफलताओं के बीच परिवार का सहयोग भी उनके लिए महत्वपूर्ण रहा।
विपुल के भाई ने उन्हें हिम्मत दी और बड़े लक्ष्य के साथ छोटे-छोटे पड़ावों पर ध्यान देने की सलाह दी। इससे उन्हें अपनी तैयारी को नए सिरे से व्यवस्थित करने में मदद मिली।
आखिरकार, वर्षों की मेहनत और कठिनाइयों के बाद विपुल ने UPPSC परीक्षा पास कर अधिकारी बनने का सपना पूरा किया। उनकी कहानी बताती है कि सफलता तक पहुंचने का रास्ता हमेशा आसान नहीं होता। कई बार असफलताएं, आर्थिक परेशानियां और दूसरों की नकारात्मक बातें सामने आती हैं, लेकिन धैर्य, निरंतर प्रयास और अपने लक्ष्य पर भरोसा आगे बढ़ने की ताकत दे सकते हैं।











