कर्नाटक की कृतिका ने UPSC की चार असफलताओं के बाद अपनी तैयारी और सोच में बदलाव किया। उन्होंने 2018 में 194वीं और 2019 में 100वीं रैंक हासिल की। उनकी कहानी आत्मविश्वास, धैर्य और मां के सम्मान के लिए किए गए संघर्ष को दर्शाती है।
UPSC Success Story: कर्नाटक के हासन में पली-बढ़ीं कृतिका की सिविल सेवा तक पहुंचने की कहानी कई चुनौतियों से भरी रही। बचपन में पिता की बेरुखी और तलाक के बाद मां को मिले सामाजिक तानों ने उनके जीवन को प्रभावित किया। उन्होंने अपनी मां के सम्मान के लिए UPSC परीक्षा पास करने का लक्ष्य तय किया। चार प्रयासों में असफल होने के बाद उन्होंने अपनी सोच में बदलाव किया और 2018 में 194वीं तथा 2019 में 100वीं रैंक हासिल कर IRS अधिकारी बनीं।
पिता की बेरुखी और मां के संघर्ष ने बदली जिंदगी
कर्नाटक के हासन में पली-बढ़ीं कृतिका का बचपन कई भावनात्मक चुनौतियों के बीच गुजरा। उन्होंने जोश टॉक्स को दिए इंटरव्यू में बताया कि उनके पिता उनके जन्म के समय से ही खुश नहीं थे, क्योंकि वह बेटी थीं। बचपन में वह पढ़ाई और दूसरी गतिविधियों में अच्छा प्रदर्शन करके पिता की सराहना पाने की कोशिश करती थीं, लेकिन उन्हें वह प्रोत्साहन नहीं मिला जिसकी उन्हें उम्मीद थी।
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कुछ समय बाद उनके माता-पिता अलग हो गए और परिवार की परिस्थितियां बदल गईं। कृतिका के मुताबिक, तलाक के बाद उनकी मां को समाज और रिश्तेदारों के तानों का सामना करना पड़ा। लोगों का व्यवहार भी बदल गया। स्कूल में कुछ बच्चे उनसे दूरी बनाने लगे, जिससे कम उम्र में ही उन्हें सामाजिक भेदभाव का अनुभव हुआ।
इन परिस्थितियों ने कृतिका पर गहरा असर डाला। वह चाहती थीं कि उनकी मां को समाज में सम्मान मिले और लोग उनकी पारिवारिक स्थिति के आधार पर उन्हें न आंकें। धीरे-धीरे यही इच्छा उनके जीवन के बड़े लक्ष्य में बदल गई।
चौथी कक्षा में मिले 99 नंबर ने बढ़ाया आत्मविश्वास
कृतिका की जिंदगी में पढ़ाई से जुड़ा एक अनुभव खास रहा। चौथी कक्षा में गणित में 99 अंक मिलने के बाद उन्होंने महसूस किया कि उनकी उपलब्धियां लोगों का नजरिया बदल सकती हैं। उनके अनुसार, जो बच्चे पहले उनसे दूरी बनाते थे, वे भी उनके करीब आने लगे।
इस अनुभव ने उनके मन में पढ़ाई और अच्छे प्रदर्शन के महत्व को लेकर एक धारणा बना दी। उन्हें लगा कि अपनी काबिलियत साबित करके वह न सिर्फ अपनी पहचान बना सकती हैं, बल्कि अपनी मां के लिए भी सम्मान हासिल कर सकती हैं।
आगे चलकर उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा पास करने का लक्ष्य तय किया। उनका उद्देश्य केवल एक प्रतिष्ठित पद हासिल करना नहीं था, बल्कि यह साबित करना भी था कि तलाकशुदा मां अपनी बेटी को सफल बनाने और उसे ऊंचे मुकाम तक पहुंचाने में सक्षम है।
चार बार असफलता, फिर Rosenthal Effect से मिली नई दिशा
UPSC की तैयारी के दौरान कृतिका को कई बार असफलता का सामना करना पड़ा। उन्होंने बताया कि कोचिंग के शिक्षकों और मॉक इंटरव्यू पैनल से उन्हें अच्छी प्रतिक्रिया मिलती थी। इसके बावजूद वह चार प्रयासों में अंतिम चयन सूची में जगह नहीं बना सकीं।
हर असफलता के बाद वह दोबारा तैयारी में जुट जाती थीं। परीक्षा देकर लौटने के बाद भी वह ज्यादा समय गंवाए बिना अगली तैयारी शुरू कर देती थीं। लगातार मेहनत करने के बावजूद मनचाहा परिणाम नहीं मिलने से उनका आत्मविश्वास प्रभावित होने लगा।
एक बार परिणाम का इंतजार करते हुए वह काफी निराश थीं। इसी दौरान लैपटॉप पर उन्हें Rosenthal Effect, जिसे Pygmalion Effect भी कहा जाता है, के बारे में जानकारी मिली। यह मनोविज्ञान की एक अवधारणा है, जिसके अनुसार किसी व्यक्ति से जुड़ी अपेक्षाएं उसके प्रदर्शन और व्यवहार को प्रभावित कर सकती हैं।
कृतिका ने इस अवधारणा के बारे में पढ़ा और अपनी सोच पर विचार किया। उन्हें महसूस हुआ कि लगातार नकारात्मक आशंकाओं के साथ तैयारी करने के बजाय अपनी क्षमता पर भरोसा रखना भी जरूरी है। इसके बाद उन्होंने अपनी तैयारी जारी रखी, लेकिन अपने प्रति नजरिया बदलने की कोशिश की।
2018 में 194वीं और 2019 में 100वीं रैंक हासिल की
कृतिका की मेहनत का परिणाम UPSC सिविल सेवा परीक्षा के अगले प्रयासों में दिखाई दिया। उन्होंने 2018 में 194वीं रैंक हासिल की और 2019 में 100वीं रैंक के साथ परीक्षा पास की। इस उपलब्धि के बाद वह भारतीय राजस्व सेवा (IRS) अधिकारी बनीं।
उनकी यात्रा बताती है कि किसी परीक्षा की तैयारी में केवल मेहनत ही नहीं, बल्कि असफलताओं से सीखना और अपनी रणनीति की समीक्षा करना भी महत्वपूर्ण है। हालांकि, हर उम्मीदवार की परिस्थितियां और तैयारी अलग होती हैं, इसलिए उनकी सफलता को किसी एक तरीके का निश्चित परिणाम नहीं माना जा सकता।
कृतिका के लिए यह उपलब्धि व्यक्तिगत संघर्ष से आगे बढ़कर उनकी मां के लंबे संघर्ष से भी जुड़ी थी। जिस सामाजिक माहौल में उनकी मां को तानों और भेदभाव का सामना करना पड़ा था, उसी के बीच कृतिका ने अपनी पहचान बनाई।
उनकी कहानी UPSC की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों को यह संदेश देती है कि असफलता अंतिम पड़ाव नहीं होती। अपनी कमजोरियों को समझना, जरूरत के अनुसार रणनीति बदलना और लगातार प्रयास करना आगे बढ़ने में मदद कर सकता है। कृतिका ने चार असफलताओं के बाद भी लक्ष्य नहीं छोड़ा और आखिरकार IRS अधिकारी बनकर अपनी मेहनत को सफलता में बदला।











