हल्द्वानी में कथित शुद्धिकरण को लेकर उत्तराखंड कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन बुधवार को राजधानी देहरादून में जोरदार हंगामे में बदल गया। कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सचिवालय कूच किया। प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस ने बैरिकेडिंग की। इस दौरान पुलिस और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच धक्का-मुक्की हुई। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष यशपाल आर्य को पुलिस ने पकड़कर हटाया और प्रदर्शनकारियों को गाड़ियों में बैठाकर हिरासत में लिया गया। प्रदर्शन के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की तबीयत बिगड़ने की भी जानकारी सामने आई, जिसके बाद उन्हें अस्पताल की इमरजेंसी में भर्ती कराया गया।
कांग्रेस हल्द्वानी में हुए उस कार्यक्रम और उसके बाद कथित तौर पर किए गए शुद्धिकरण के विरोध में प्रदर्शन कर रही है। पार्टी का आरोप है कि इस तरह की कार्रवाई सामाजिक सौहार्द और संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ है। कांग्रेस नेताओं ने इस मामले में सरकार से जवाब मांगते हुए दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
सचिवालय कूच के लिए कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता देहरादून में जुटे। प्रदर्शनकारी सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए सचिवालय की ओर बढ़ने लगे। पुलिस ने उन्हें आगे जाने से रोकने के लिए पहले से बैरिकेडिंग कर रखी थी। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बैरिकेड पार करने की कोशिश की तो पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की। इसी दौरान दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ गया।
प्रदर्शन के दौरान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष यशपाल आर्य भी कार्यकर्ताओं के साथ आगे बढ़ रहे थे। पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की। देखते ही देखते मौके पर धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। इसके बाद पुलिसकर्मियों ने आर्य समेत कांग्रेस नेताओं को पकड़कर वहां से हटाया। कांग्रेस की ओर से आरोप लगाया गया कि पुलिस ने प्रदेश अध्यक्ष के साथ बदसलूकी की और उन्हें घसीटते हुए पुलिस वाहन तक ले गई।
कई कांग्रेस कार्यकर्ताओं को पुलिस वाहनों में बैठाया गया। इस दौरान प्रदर्शनकारी लगातार नारेबाजी करते रहे। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि शांतिपूर्ण तरीके से विरोध कर रहे कार्यकर्ताओं को जबरन हिरासत में लिया गया। वहीं पुलिस की ओर से कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने की बात कही गई।
प्रदर्शन के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की तबीयत बिगड़ने की खबर ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं की चिंता बढ़ा दी। रावत को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्हें इमरजेंसी में भर्ती किए जाने की जानकारी सामने आई। उनके स्वास्थ्य को लेकर कांग्रेस नेताओं और समर्थकों में चिंता देखी गई।
हल्द्वानी में शुद्धिकरण का विवाद दरअसल एक राजनीतिक कार्यक्रम के बाद शुरू हुआ। कांग्रेस का आरोप है कि पार्टी के कार्यक्रम से जुड़े स्थान पर बाद में शुद्धिकरण की कार्रवाई की गई। कांग्रेस इसे राजनीतिक और सामाजिक रूप से आपत्तिजनक बता रही है। पार्टी का कहना है कि किसी राजनीतिक दल या उसके नेताओं को निशाना बनाकर इस तरह की कार्रवाई करना लोकतांत्रिक मर्यादाओं के अनुरूप नहीं है।
भाजपा और कांग्रेस के बीच इस मुद्दे पर पहले से ही बयानबाजी चल रही है। कांग्रेस लगातार सरकार पर हमला बोल रही है और इसे प्रदेश में सामाजिक विभाजन को बढ़ावा देने वाली राजनीति बता रही है। दूसरी ओर भाजपा की ओर से कांग्रेस के आरोपों पर अलग-अलग स्तर पर जवाब दिया गया है।
देहरादून में सचिवालय कूच के दौरान कांग्रेस नेताओं ने सरकार से पूरे मामले की जांच कराने की मांग की। पार्टी नेताओं का कहना है कि हल्द्वानी की घटना को लेकर सरकार को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए और यह बताना चाहिए कि कथित शुद्धिकरण किसके निर्देश पर हुआ।
प्रदर्शन के चलते देहरादून में सचिवालय के आसपास सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ाई गई। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को निर्धारित स्थान से आगे जाने से रोकने के लिए बैरिकेडिंग की। बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी। पुलिस की कोशिश थी कि प्रदर्शनकारी सचिवालय परिसर की ओर न पहुंचें और यातायात व्यवस्था भी प्रभावित न हो।
कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पुलिस कार्रवाई का विरोध करते हुए नारेबाजी की। पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार लोकतांत्रिक विरोध की आवाज को दबाने की कोशिश कर रही है। उनका कहना है कि किसी मुद्दे पर विरोध दर्ज कराना विपक्ष का लोकतांत्रिक अधिकार है और सरकार को प्रदर्शनकारियों की मांगों पर जवाब देना चाहिए।
वहीं पुलिस के लिए भीड़ को नियंत्रित करना चुनौतीपूर्ण रहा। सचिवालय की ओर बढ़ रहे कार्यकर्ताओं को रोकने के दौरान कई बार तनाव की स्थिति बनी। पुलिस ने नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर प्रदर्शन समाप्त कराने की कोशिश की।
इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें पुलिस और कांग्रेस नेताओं के बीच धक्का-मुक्की दिखाई दे रही है। यशपाल आर्य को पुलिस द्वारा पकड़कर ले जाने की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में हैं। कांग्रेस ने इसे पुलिस की ज्यादती बताया है।
फिलहाल हल्द्वानी शुद्धिकरण विवाद ने उत्तराखंड की राजनीति को और गरमा दिया है। कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर सड़क पर उतर चुकी है और सरकार पर लगातार हमला कर रही है। सचिवालय कूच के दौरान पुलिस कार्रवाई और हरीश रावत की तबीयत बिगड़ने से मामला और ज्यादा सुर्खियों में आ गया है। अब कांग्रेस की आगे की रणनीति और सरकार की प्रतिक्रिया पर सबकी नजर रहेगी।