उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय में 2025-26 के दौरान छात्राओं की संख्या छात्रों से काफी अधिक रही। कुल 83,807 पंजीकृत विद्यार्थियों में 48,287 छात्राएं और 35,520 छात्र शामिल रहे। स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में भी छात्राओं की संख्या अधिक रही।
हल्द्वानी: उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय में मुक्त एवं दूरस्थ शिक्षा के प्रति छात्राओं की रुचि छात्रों से अधिक सामने आई है। सेंटर फॉर इंटरनल क्वालिटी एश्योरेंस की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2025-26 में विश्वविद्यालय में कुल 83,807 विद्यार्थियों का पंजीकरण हुआ। इनमें 48,287 छात्राएं और 35,520 छात्र शामिल थे।
डिग्री पाठ्यक्रमों में छात्राओं की संख्या ज्यादा
मुक्त एवं दूरस्थ शिक्षा ने उन विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा को आसान बनाया है, जिन्हें भौगोलिक, सामाजिक या पारिवारिक परिस्थितियों के कारण नियमित कॉलेज जाना मुश्किल होता है। उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में यह माध्यम खास तौर पर छात्राओं के लिए उपयोगी साबित हो रहा है। घर बैठे अध्ययन सामग्री और रिकॉर्डेड लेक्चर उपलब्ध होने से पढ़ाई जारी रखना आसान होता है।
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उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय की सेंटर फॉर इंटरनल क्वालिटी एश्योरेंस यानी सीका की वार्षिक रिपोर्ट में भी छात्राओं की बढ़ती भागीदारी सामने आई है। वर्ष 2025-26 में विश्वविद्यालय में कुल 83,807 विद्यार्थी पंजीकृत थे। इनमें छात्राओं की संख्या 48,287 रही, जबकि 35,520 छात्र पंजीकृत थे।
स्नातक पाठ्यक्रमों में कुल 53,239 विद्यार्थी अध्ययनरत थे। इनमें 28,236 छात्राएं शामिल थीं। इससे स्पष्ट होता है कि डिग्री स्तर की पढ़ाई के लिए दूरस्थ शिक्षा का विकल्प छात्राओं के बीच अधिक लोकप्रिय है।
पोस्ट ग्रेजुएशन में भी छात्राओं का दबदबा
स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में भी छात्राओं की संख्या छात्रों से अधिक रही। रिपोर्ट के अनुसार विभिन्न पोस्ट ग्रेजुएट पाठ्यक्रमों में 19,756 छात्राएं और 9,657 छात्र अध्ययनरत थे।
डिप्लोमा और प्रमाण पत्र पाठ्यक्रमों में कुल 1,155 विद्यार्थियों का पंजीकरण हुआ। हालांकि इन पाठ्यक्रमों में छात्रों की संख्या अपेक्षाकृत अधिक रही, लेकिन डिग्री और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में महिला शिक्षार्थियों की भागीदारी काफी अधिक रही है।
विश्वविद्यालय के पिछले 20 वर्षों के आंकड़े भी इसी रुझान की ओर संकेत करते हैं। इस अवधि में करीब 8.80 लाख शिक्षार्थियों ने उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय से शिक्षा हासिल की है। इनमें लगभग 4.67 लाख छात्राएं और 4.12 लाख छात्र शामिल रहे हैं।
संस्कृत की पढ़ाई में भी छात्राओं की खास रुचि
सीका की रिपोर्ट के अनुसार स्नातकोत्तर स्तर पर कला संकाय में विद्यार्थियों की संख्या सबसे अधिक रही। एमए संस्कृत में पिछले वर्ष 6,233 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया। इनमें 4,154 महिला विद्यार्थियों ने संस्कृत विषय चुना।
इसके बाद राजनीतिक विज्ञान छात्राओं के बीच प्रमुख विषय रहा, जिसमें 3,831 छात्राएं अध्ययनरत थीं। अंग्रेजी विषय में 2,369 छात्राओं ने अध्ययन किया। आंकड़ों से पता चलता है कि छात्राएं केवल सामान्य डिग्री पाठ्यक्रमों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि विभिन्न विषयों में उच्च शिक्षा हासिल कर रही हैं।
भौगोलिक परिस्थितियां बनीं बड़ा कारण
शिक्षाशास्त्र विद्या शाखा के निदेशक प्रो. डिगर सिंह फर्स्वाण के अनुसार उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियां विषम हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में कई छात्राओं के लिए कॉलेज की दूरी नियमित शिक्षा में बाधा बनती है। ऐसे में मुक्त विश्वविद्यालय उनके लिए उच्च शिक्षा जारी रखने का सुविधाजनक माध्यम बनता है।
दूरस्थ शिक्षा की वजह से छात्राओं को रोजाना कॉलेज आने-जाने की जरूरत नहीं पड़ती। इससे पारिवारिक और सामाजिक परिस्थितियों के कारण आने वाली बाधाएं भी कम होती हैं। इसी वजह से उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय में महिला शिक्षार्थियों का पंजीकरण लगातार महत्वपूर्ण स्तर पर बना हुआ है।









