Vedanta का South Africa में बड़ा निवेश, जिंक स्मेल्टर प्रोजेक्ट को राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा का मिला समर्थन

Vedanta South Africa Investment: वेदांता ने दक्षिण अफ्रीका में जिंक स्मेल्टर प्रोजेक्ट के लिए बड़ा निवेश किया है। इस परियोजना को राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा

भारतीय अरबपति अनिल अग्रवाल की कंपनी वेदांता दक्षिण अफ्रीका में अपने कारोबार का विस्तार कर रही है। कंपनी ने देश में जिंक उत्पादन क्षमता को दोगुना करने के लिए निवेश किया है।

बिजनेस न्यूज़: भारतीय उद्योगपति अनिल अग्रवाल की कंपनी Vedanta दक्षिण अफ्रीका में अपने जिंक कारोबार का विस्तार करने की तैयारी में है। कंपनी की योजना देश में जिंक उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर अयस्क की प्रोसेसिंग और रिफाइनिंग को मजबूत करने की है। इस महत्वाकांक्षी योजना को दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा का समर्थन मिला है। प्रस्तावित जिंक स्मेल्टर परियोजना से औद्योगिक उत्पादन को बढ़ावा मिलने, स्थानीय कंपनियों को नए कारोबारी अवसर मिलने और हजारों रोजगार पैदा होने की उम्मीद है।

यह परियोजना दक्षिण अफ्रीका के नॉर्दर्न केप क्षेत्र में प्रस्तावित है। इसका उद्देश्य Vedanta की गैम्सबर्ग खदान से निकलने वाले जिंक अयस्क को विदेश भेजकर प्रोसेस कराने के बजाय देश के भीतर ही रिफाइंड धातु में बदलना है। इससे खनन के साथ-साथ धातु प्रसंस्करण और संबंधित उद्योगों को भी विकसित करने में मदद मिल सकती है।

राष्ट्रपति रामाफोसा ने क्या भरोसा दिया?

गैम्सबर्ग खदान के दूसरे चरण के उद्घाटन के अवसर पर राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा ने प्रस्तावित स्मेल्टर परियोजना के लिए सरकार की सहायता का भरोसा दिया। उन्होंने इस तरह के निवेश को देश के औद्योगिक विकास, स्थानीय खरीद और रोजगार सृजन के लिहाज से महत्वपूर्ण बताया। सरकार का सहयोग मिलने से परियोजना को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

हालांकि, इतने बड़े औद्योगिक संयंत्र को स्थापित करने के लिए केवल राजनीतिक समर्थन पर्याप्त नहीं होगा। बिजली की उपलब्धता, प्रतिस्पर्धी ऊर्जा दरें, परिवहन व्यवस्था और अन्य बुनियादी सुविधाएं इसकी व्यावसायिक सफलता में अहम भूमिका निभाएंगी।

बिजली की लागत होगी बड़ी चुनौती

Vedanta का South Africa में बड़ा निवेश, जिंक स्मेल्टर प्रोजेक्ट को राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा का मिला समर्थन

जिंक स्मेल्टर जैसे संयंत्रों में बिजली की खपत काफी अधिक होती है। अयस्क से धातु तैयार करने की प्रक्रिया में ऊर्जा की बड़ी मात्रा इस्तेमाल होती है, इसलिए बिजली की कीमत सीधे उत्पादन लागत और परियोजना की लाभप्रदता को प्रभावित कर सकती है।

दक्षिण अफ्रीका के बिजली मंत्री क्गोसिएंतशो रामोक्गोपा ने भी परियोजना के लिए समर्थन जताया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, बिजली विभाग कंपनी के साथ संभावित टैरिफ और ऊर्जा संबंधी व्यवस्थाओं पर बातचीत करेगा। यदि Vedanta को भरोसेमंद बिजली उचित दरों पर मिलती है, तो स्मेल्टर को व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य बनाने में मदद मिल सकती है।

दक्षिण अफ्रीका के लिए यह मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि बड़े औद्योगिक निवेश के साथ ऊर्जा आपूर्ति और बुनियादी ढांचे की चुनौतियों का समाधान करना जरूरी होगा।

दक्षिण अफ्रीका में जिंक रिफाइनिंग की वापसी

दक्षिण अफ्रीका में जिंक रिफाइनिंग क्षमता बढ़ाने की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही है। उपलब्ध विवरण के मुताबिक, देश में एक दशक से अधिक समय से कोई सक्रिय जिंक रिफाइनरी नहीं है। जोहान्सबर्ग के पूर्व में स्प्रिंग्स स्थित जिंकॉर संयंत्र बंद होने के बाद स्थानीय खदानों से निकलने वाले जिंक कॉन्संट्रेट को आगे की प्रोसेसिंग के लिए विदेश भेजा जाता रहा है।

यदि नई स्मेल्टर परियोजना शुरू होती है, तो देश में खनन से लेकर धातु के प्रसंस्करण तक की मूल्य श्रृंखला विकसित हो सकती है। इससे स्थानीय उद्योगों को कच्चे माल की उपलब्धता और विनिर्माण गतिविधियों को विस्तार देने के अवसर मिल सकते हैं।

Vedanta का एकीकृत जिंक कारोबार बनाने का लक्ष्य

अनिल अग्रवाल की Vedanta दक्षिण अफ्रीका में खनन के साथ-साथ रिफाइनिंग और डाउनस्ट्रीम मैन्युफैक्चरिंग को जोड़कर एक एकीकृत जिंक कारोबार विकसित करना चाहती है। कंपनी की दीर्घकालिक योजना में सालाना लगभग 10 लाख टन उत्पादन क्षमता वाला कारोबार बनाने का लक्ष्य शामिल बताया गया है।

इस रणनीति में नए स्मेल्टर की स्थापना और नामाक्वा स्पेशल इकोनॉमिक जोन का इस्तेमाल भी शामिल है। यदि योजना निर्धारित रूप से आगे बढ़ती है, तो इससे स्थानीय आपूर्तिकर्ताओं, परिवहन कंपनियों, तकनीकी सेवाओं और विनिर्माण क्षेत्र को लाभ मिल सकता है। परियोजना से हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना भी जताई गई है।

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