भागलपुर: बिहार के भागलपुर और आसपास के जिलों के लोगों के लिए विक्रमशिला सेतु को लेकर बड़ी अपडेट सामने आई है। क्षतिग्रस्त हिस्से की स्थायी मरम्मत और पुनर्निर्माण की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। जानकारी के मुताबिक 26 अगस्त को बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन (BRO) की टीम भागलपुर पहुंचेगी, जिसके बाद पुल पर चल रहे अस्थायी इंतजामों को हटाने और स्थायी निर्माण की प्रक्रिया को गति दी जाएगी। निर्धारित योजना के अनुसार 30 नवंबर 2026 तक विक्रमशिला सेतु को दोबारा आवागमन के लिए खोलने का लक्ष्य रखा गया है।
विक्रमशिला सेतु भागलपुर को नवगछिया और आगे खगड़िया, पूर्णिया, कटिहार तथा सीमांचल के दूसरे इलाकों से जोड़ने वाला बेहद महत्वपूर्ण मार्ग है। पुल के क्षतिग्रस्त होने के बाद से इस पूरे इलाके की आवाजाही प्रभावित हुई है। ऐसे में स्थायी मरम्मत शुरू होने की खबर से लोगों को राहत की उम्मीद जगी है।
स्थायी पुनर्स्थापन के काम की जिम्मेदारी एसपी सिंगला कंस्ट्रक्शन को दी गई है। परियोजना की अनुमानित लागत करीब 98 करोड़ रुपये बताई गई है। तकनीकी और वित्तीय प्रक्रिया पूरी होने के बाद एजेंसी का चयन किया गया है। अब निर्माण कार्य को तय समय सीमा के भीतर पूरा करने की तैयारी है।
मरम्मत की प्रक्रिया में पहले से बनाए गए अस्थायी बेली ब्रिज को हटाया जाएगा। इसके बाद क्षतिग्रस्त हिस्सों में स्थायी संरचना तैयार करने, नए स्लैब लगाने और अन्य जरूरी तकनीकी काम किए जाएंगे। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक बेली ब्रिज की जगह स्टील ब्रिज तैयार कर उस पर नए स्लैब लगाए जाने की योजना है। नए स्लैब हरियाणा के पंचकुला में तैयार किए जा रहे हैं और निर्माण सामग्री भी भागलपुर पहुंचाई जा रही है।
विक्रमशिला सेतु पर मरम्मत के दौरान सुरक्षा को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी जा रही है। स्थायी निर्माण शुरू होने के बाद पुल पर वाहनों का परिचालन बंद रखने की योजना है, ताकि इंजीनियरों और निर्माण एजेंसी की टीम बिना यातायात दबाव के काम कर सके। पहले से मौजूद अस्थायी बेली ब्रिज हटाने और क्षतिग्रस्त हिस्से पर निर्माण करने के दौरान किसी तरह की दुर्घटना न हो, इसके लिए भी विशेष सुरक्षा इंतजाम किए जाएंगे।
रिपोर्ट के अनुसार पुल को 28 अगस्त की रात से बंद करने की योजना है, हालांकि अलग-अलग रिपोर्टों में बंदी की तारीख को लेकर प्रशासनिक स्तर पर बदलाव या पुनर्विचार की संभावना भी सामने आई है। इसलिए अंतिम रूप से पुल बंद होने की तारीख और यातायात व्यवस्था के बारे में जिला प्रशासन की घोषणा को ही निर्णायक माना जाएगा।
पुल बंद होने से भागलपुर और नवगछिया के बीच आवागमन सबसे ज्यादा प्रभावित होने की आशंका है। रोजाना इस मार्ग से बड़ी संख्या में लोग नौकरी, कारोबार, शिक्षा, इलाज और दूसरे जरूरी कामों के लिए आते-जाते हैं। इसके अलावा सीमांचल से भागलपुर आने वाले मरीजों के लिए भी यह मार्ग बेहद महत्वपूर्ण है।
सबसे बड़ी चुनौती वैकल्पिक आवागमन की होगी। गंगा में पांटून पुल बनाए जाने की संभावना फिलहाल कम बताई गई है, क्योंकि हाईलेवल फ्लड की स्थिति में पांटून पुल बनाना मुश्किल होता है। ऐसे में जिला प्रशासन को वैकल्पिक मार्गों और जलमार्ग से आवागमन की व्यवस्था पर काम करना होगा। कुछ रिपोर्टों में फिटनेस प्रमाणपत्र वाले बड़े नावों और जहाजों के संचालन की व्यवस्था की बात भी सामने आई है।
स्थानीय लोगों की चिंता इसलिए भी बढ़ी हुई है क्योंकि अगस्त से नवंबर के बीच कई बड़े पर्व-त्योहार आने वाले हैं। दुर्गापूजा, दीपावली, भाई दूज और छठ जैसे पर्वों के दौरान भागलपुर और आसपास के क्षेत्रों में आवागमन काफी बढ़ जाता है। इसी वजह से भागलपुर के सांसद अजय कुमार मंडल ने भी पुल बंद करने के कार्यक्रम पर पुनर्विचार करने की मांग की थी। उन्होंने गंगा का जलस्तर कम होने और प्रमुख त्योहारों के बाद काम शुरू कराने का अनुरोध किया था।
हालांकि दूसरी तरफ प्रशासन और निर्माण एजेंसी के सामने क्षतिग्रस्त पुल को जल्द से जल्द स्थायी रूप से दुरुस्त करने की चुनौती है। लंबे समय तक पुल को अस्थायी व्यवस्था के सहारे चलाना भी सुरक्षित विकल्प नहीं माना जा सकता। इसलिए विशेषज्ञों की निगरानी में स्थायी मरम्मत पूरा करना जरूरी है।
BRO की टीम की भूमिका भी इस पूरी प्रक्रिया में महत्वपूर्ण रहेगी। इससे पहले विक्रमशिला सेतु पर अस्थायी बेली ब्रिज तैयार करने में BRO की टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। टीम ने दिन-रात काम कर छोटे वाहनों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था तैयार की थी। अब स्थायी निर्माण की प्रक्रिया के दौरान भी तकनीकी स्तर पर सहयोग और निगरानी महत्वपूर्ण होगी।
पुल की मरम्मत के लिए नए स्लैब और स्टील संरचना की व्यवस्था की जा रही है। अधिकारियों का लक्ष्य है कि निर्माण सामग्री उपलब्ध होते ही काम को गति दी जाए और किसी भी चरण में अनावश्यक देरी न हो। यदि काम निर्धारित गति से चलता रहा तो 30 नवंबर तक पुल को फिर से वाहनों के लिए खोलने का लक्ष्य पूरा किया जा सकता है।
विक्रमशिला सेतु की स्थायी मरम्मत पूरी होने से केवल भागलपुर शहर को ही राहत नहीं मिलेगी, बल्कि नवगछिया, खगड़िया और कोसी-सीमांचल के कई जिलों के लोगों को भी बड़ा फायदा होगा। अभी वैकल्पिक रास्तों के कारण लोगों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती है और मालवाहक वाहनों के परिचालन पर भी अतिरिक्त समय और खर्च का असर पड़ता है।
व्यापारियों के लिए भी पुल का खुलना बेहद महत्वपूर्ण है। भागलपुर से दूसरे जिलों तक सामान पहुंचाने वाले वाहन और सीमांचल से आने वाले मालवाहक वाहनों को मौजूदा स्थिति में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पुल के दोबारा सामान्य होने के बाद परिवहन व्यवस्था में सुधार आने और व्यापारिक गतिविधियों को गति मिलने की उम्मीद है।
इस पूरे काम में गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर भी विशेष सावधानी बरतनी होगी। पुल के क्षतिग्रस्त हिस्से की स्थायी मरम्मत केवल तत्काल यातायात बहाल करने के लिए नहीं, बल्कि लंबे समय तक संरचना को सुरक्षित बनाए रखने के उद्देश्य से की जा रही है। इसलिए नए स्लैब, स्टील संरचना और अन्य निर्माण कार्य विशेषज्ञों की निगरानी में किए जाएंगे।
फिलहाल लोगों की नजर 26 अगस्त को भागलपुर पहुंचने वाली BRO टीम, इसके बाद शुरू होने वाली निर्माण गतिविधियों और पुल बंदी को लेकर प्रशासन की अंतिम व्यवस्था पर है। सबसे बड़ी उम्मीद यही है कि निर्माण कार्य तय समय पर शुरू हो और बिना किसी बड़ी बाधा के 30 नवंबर 2026 तक विक्रमशिला सेतु को फिर से पूरी तरह चालू कर दिया जाए।
विक्रमशिला सेतु की स्थायी मरम्मत अब निर्णायक चरण में पहुंच गई है। BRO की टीम के आने के बाद अस्थायी संरचनाओं को हटाने और स्थायी स्टील संरचना व नए स्लैब लगाने का काम तेज होगा। अगर तय कार्यक्रम के अनुसार काम आगे बढ़ा तो नवंबर के अंत तक भागलपुर और सीमांचल के लोगों को इस महत्वपूर्ण पुल की पूरी कनेक्टिविटी वापस मिल सकती है।











