वंदे मातरम् पर संसद में तीन दिन चली बहस के बाद कांग्रेस का केंद्र पर हमला, कहा- ‘पीएम मोदी और उनकी टीम पूरी तरह बेनकाब’

वंदे मातरम् को लेकर संसद में तीन दिन चली बहस के बाद कांग्रेस ने पीएम मोदी और उनकी टीम पर जमकर निशाना साधा। जानें पूरा विवाद और बयान। पीएम मोदी का कांग्रेस

वंदे मातरम के 150 साल पूरे होने पर लोकसभा और राज्यसभा में हुई चर्चा के बाद कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर कड़ा हमला बोला है। पार्टी ने गुरुवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी पूरी टीम इस अवसर पर सदन में हुई चर्चा में पूरी तरह बेनकाब और गलत साबित हुई।

Politics News: वंदे मातरम् की रचना के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में संसद के दोनों सदनों में हुई तीन दिवसीय विशेष चर्चा ने भारतीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। चर्चा के समापन के बाद कांग्रेस ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा प्रहार किया है। कांग्रेस का कहना है कि इस बहस ने सरकार के ‘‘भ्रम फैलाने वाले दावों’’ को बेनकाब कर दिया है।

गुरुवार को पार्टी के वरिष्ठ नेता और महासचिव जयराम रमेश ने एक विस्तृत बयान जारी कर कहा कि वंदे मातरम् पर हुई संसदीय बहस के दौरान भाजपा ने इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश करने की कोशिश की। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी टीम ने वंदे मातरम् व राष्ट्रगान के इतिहास पर उपलब्ध सबसे विश्वसनीय किताबें तक नहीं पढ़ी हैं।

कांग्रेस का पलटवार: 'पीएम की पूरी टीम गलत साबित'

जयराम रमेश ने कहा कि संसद में वंदे मातरम् और राष्ट्रीय गान से जुड़े तथ्यों को लेकर तीन दिन चर्चा चली, लेकिन सरकार के नेताओं ने अपने तर्कों के समर्थन में कोई ठोस ऐतिहासिक आधार नहीं दिया। उन्होंने दावा किया कि यदि प्रधानमंत्री और उनकी टीम इतिहासकार रुद्रांगसु मुखर्जी की पुस्तक ‘भारत का गीत: राष्ट्रगान पर एक अध्ययन’ और सब्यसाची भट्टाचार्य की किताब ‘वंदे मातरम्’ पढ़ते, तो वे ‘‘गलत और भ्रामक’’ दावों से बच सकते थे।

कांग्रेस नेता ने प्रधानमंत्री पर तंज कसते हुए कहा, ह सोचना भी बेकार है कि वे अपने झूठ उजागर होने के बाद इन किताबों को पढ़ने की कोशिश करेंगे। रमेश ने इतिहासकार सुगता बोस के एक महत्वपूर्ण विवरण का भी हवाला दिया। उन्होंने कहा कि 1937 में रवींद्रनाथ टैगोर की सलाह पर कांग्रेस ने तय किया था कि राष्ट्रीय सभाओं में केवल वंदे मातरम् का पहला भाग ही गाया जाएगा। उनके अनुसार, यह निर्णय इसलिए लिया गया था ताकि गीत की धार्मिक व्याख्या को लेकर विवाद न हो और देश में व्यापक स्वीकृति बनी रहे।

वंदे मातरम् पर संसद में तीन दिन चली बहस के बाद कांग्रेस का केंद्र पर हमला, कहा- ‘पीएम मोदी और उनकी टीम पूरी तरह बेनकाब’

तीन दिन की संसदीय चर्चा: भाजपा और विपक्ष आमने-सामने

जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ पर आयोजित इस चर्चा का ‘‘वास्तविक उद्देश्य’’ आज़ादी के नायकों विशेष रूप से जवाहरलाल नेहरू और रवींद्रनाथ टैगोर को नीचा दिखाना था। उन्होंने कहा कि भाजपा ने बहस को राष्ट्रवाद बनाम इतिहास के चश्मे से देखने की कोशिश की और तथ्यों की बजाय राजनीतिक आरोपों पर जोर दिया।

लोकसभा में बहस की शुरुआत सोमवार को हुई, जबकि राज्यसभा ने मंगलवार और बुधवार को इस विषय पर विशेष सत्र चलाया। इस दौरान भाजपा ने कांग्रेस पर लगातार यह आरोप लगाया कि उसने ऐतिहासिक रूप से वंदे मातरम् की उपेक्षा की और उसे राष्ट्रगान का दर्जा देने में बाधा उत्पन्न की।

वहीं विपक्ष का दावा था कि भाजपा इतिहास का चयनात्मक उपयोग कर रही है और स्वतंत्रता आंदोलन की जटिलताओं को जानबूझकर नज़रअंदाज़ कर रही है।

पीएम मोदी का कांग्रेस पर हमला: ‘नेहरू ने वंदे मातरम् को धोखा दिया’

सोमवार को चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पंडित जवाहरलाल नेहरू ने वंदे मातरम् को उस समय ‘‘धोखा’’ दिया, जब मुहम्मद अली जिन्ना ने इसे पूर्ण रूप से गाने पर आपत्ति जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के इस रुख से साम्प्रदायिक राजनीति को बढ़ावा मिला और इससे राष्ट्रवाद के भाव को नुकसान पहुंचा।

यह बयान चर्चा का मुख्य राजनीतिक बिंदु बन गया और इसके बाद कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरकार ने इतिहास को गलत तरीके से पेश किया।

 

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