मलयालम फिल्म इंडस्ट्री हमेशा अपनी अलग पहचान के लिए जानी जाती है, फिर चाहे बात कहानी की हो, स्केल की हो या ट्रीटमेंट की। मोहनलाल सिनेमा का ऐसा बड़ा नाम हैं, जिन्होंने अपने शानदार और यादगार किरदारों से दर्शकों का दिल जीता है।
- मूवी रिव्यू: वृषभ
- Director: नंद किशोर
- Starring: मोहनलाल, रागिनी द्विवेद्वी, नयन सारिका
- Platform: सिनेमाघर
- भाषा: मलयालम, तेलुगू, हिंदी
एंटरटेनमेंट न्यूज़: मलयालम सिनेमा हमेशा से अपने प्रयोगधर्मी कंटेंट, मजबूत कहानी और दमदार अभिनय के लिए जाना जाता है। जब बात मोहनलाल जैसे दिग्गज अभिनेता की हो, तो दर्शकों की उम्मीदें और भी बढ़ जाती हैं। 25 दिसंबर को सिनेमाघरों में रिलीज हुई फिल्म ‘वृषभ’ (Vrusshabha) इन उम्मीदों पर काफी हद तक खरी उतरती है।
यह फिल्म मोहनलाल के करियर का एक बिल्कुल अलग और नया अनुभव देने वाला प्रोजेक्ट है, जिसे मलयालम और तेलुगु में एक साथ शूट किया गया है और पैन-इंडिया स्तर पर रिलीज किया गया है।
कहानी: श्राप, पुनर्जन्म और पिता–पुत्र का संघर्ष
फिल्म की कहानी एक ऐसे राजा के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसे एक महिला श्राप देती है कि उसके बेटे की मौत उसके सामने होगी और वह स्वयं इसके लिए जिम्मेदार होगा। यह श्राप सिर्फ एक जन्म तक सीमित नहीं रहता, बल्कि कई जन्मों तक उसका पीछा करता है। कहानी आधुनिक दौर यानी 2025 तक पहुंचती है, जहां यह श्राप फिर से राजा के जीवन को प्रभावित करता है और उसके बेटे की जान खतरे में पड़ जाती है।
फिल्म का मुख्य सवाल यही है कि क्या वह अपने बेटे को इस नियति से बचा पाएगा या इतिहास खुद को दोहराएगा? इस रहस्य और भावनात्मक संघर्ष को जानने के लिए फिल्म देखना जरूरी है, क्योंकि क्लाइमैक्स तक कहानी दर्शकों को बांधे रखती है।
![]()
कैसी है फिल्म: नया अनुभव और मजबूत स्क्रीनप्ले
‘वृषभ’ एक ऐसी फिल्म है जो पारंपरिक राजा-महाराजा की कहानी को आधुनिक संदर्भ से जोड़ने की कोशिश करती है और इसमें काफी हद तक सफल भी होती है। फिल्म की गति संतुलित है और यह कहीं भी अनावश्यक रूप से खिंचती नहीं है। इंटरवल से ठीक पहले आने वाला ट्विस्ट दर्शकों को चौंका देता है और कहानी को नई दिशा देता है।
स्क्रीनप्ले टाइट है और कहानी को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाता है। हालांकि फिल्म के VFX और भी बेहतर हो सकते थे, लेकिन दमदार कहानी और मजबूत अभिनय इन कमियों को काफी हद तक ढक देते हैं।
अभिनय: मोहनलाल का क्लास और भावनात्मक गहराई
मोहनलाल एक बार फिर साबित करते हैं कि उन्हें भारतीय सिनेमा के महान अभिनेताओं में क्यों गिना जाता है। ‘वृषभ’ में उनका किरदार सिर्फ एक राजा का नहीं, बल्कि एक ऐसे पिता का है जो अपने बेटे को बचाने के लिए किसी भी हद तक जा सकता है। कभी वह बेटे के लिए शेफ बन जाता है, तो कभी जरूरत पड़ने पर दुश्मनों से लोहा लेता है।
समरजीत लंकेश ने मोहनलाल के सामने जिस आत्मविश्वास और संतुलन के साथ अभिनय किया है, वह काबिले-तारीफ है। रागिनी द्विवेद्वी अपने किरदार में प्रभावशाली नजर आती हैं और स्क्रीन पर मजबूत उपस्थिति दर्ज कराती हैं। नयन सारिका ने भी अपने रोल के साथ न्याय किया है।
लेखन और निर्देशन: नंद किशोर की मजबूत पकड़
फिल्म का लेखन और निर्देशन नंद किशोर ने किया है। कहानी की सबसे बड़ी ताकत इसकी राइटिंग है, जो फिल्म को भावनात्मक और रोचक बनाती है। निर्देशन में भी उनकी पकड़ साफ नजर आती है, खासकर भावनात्मक दृश्यों और बड़े सीक्वेंस में। अगर आप मोहनलाल के फैन हैं या पौराणिकता, पुनर्जन्म और भावनात्मक ड्रामा से जुड़ी फिल्मों में रुचि रखते हैं, तो ‘वृषभ’ आपके लिए एक अच्छा विकल्प है। यह फिल्म एक अलग अनुभव देती है और भारतीय सिनेमा के पैन-इंडिया विस्तार को भी दर्शाती है।









