IDBI Bank: कौन हैं प्रेम वत्स, जिन्हें कहा जाता है कनाडा का वॉरेन बफेट? 52,878 करोड़ रुपये की डील से बदल सकती है बैंकिंग की तस्वीर

कनाडा के 'वॉरेन बफेट' कहे जाने वाले प्रेम वत्स कौन हैं? जानें कैसे उनकी कंपनी Fairfax Financial ₹52,878 करोड़ में IDBI Bank की 60.72% हिस्सेदारी खरीदेगी और

भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में एक बड़े क्रॉस-बॉर्डर सौदे के तहत कनाडाई निवेशक प्रेम वात्स की कंपनी फेयरफैक्स फाइनेंशियल आईडीबीआई बैंक में 60.72 फीसदी नियंत्रक हिस्सेदारी हासिल करने जा रही है।

IDBI Bank Stake Sale: भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में एक बड़े बदलाव की तैयारी है। कनाडा की वित्तीय सेवा कंपनी फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स को IDBI बैंक में 60.72% हिस्सेदारी खरीदने के लिए केंद्र सरकार की मंजूरी मिल गई है। करीब 52,878 करोड़ रुपये (5.56 अरब डॉलर) का यह सौदा भारतीय वित्तीय क्षेत्र के सबसे बड़े विदेशी निवेश सौदों में शामिल होगा। इस निवेश के केंद्र में हैं भारतीय मूल के कनाडाई अरबपति प्रेम वत्स, जिन्हें उनकी दीर्घकालिक निवेश रणनीति के कारण ‘कनाडा का वॉरेन बफेट’ कहा जाता है। 

कौन हैं प्रेम वत्स?

प्रेम वत्स फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स के संस्थापक, अध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं। उनका जन्म 5 अगस्त 1950 को हैदराबाद में हुआ था। उन्होंने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) मद्रास से केमिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और बाद में कनाडा की यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्टर्न ओंटारियो से एमबीए की डिग्री हासिल की।

साल 1985 में उन्होंने फेयरफैक्स की स्थापना की। कंपनी बीमा, निवेश और वित्तीय सेवाओं के क्षेत्र में काम करती है। प्रेम वत्स की पहचान उन निवेशकों में होती है, जो कंपनियों में लंबी अवधि की संभावनाएं देखकर निवेश करते हैं। उनकी रणनीति और निवेश के प्रति धैर्यपूर्ण दृष्टिकोण के कारण उनकी तुलना दिग्गज अमेरिकी निवेशक वॉरेन बफेट से की जाती है। भारत से उनका जुड़ाव भी पुराना है। भारतीय कारोबार में निवेश और सामाजिक योगदान के लिए उन्हें 2020 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया था।

IDBI बैंक सौदे में कितना पैसा लगाएगी फेयरफैक्स?

IDBI Bank: कौन हैं प्रेम वत्स, जिन्हें कहा जाता है कनाडा का वॉरेन बफेट? 52,878 करोड़ रुपये की डील से बदल सकती है बैंकिंग की तस्वीर

केंद्र सरकार की आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) ने 14 अक्टूबर 2026 को IDBI बैंक की रणनीतिक बिक्री को मंजूरी दी। इस प्रस्ताव के तहत सरकार अपनी 30.48% और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) अपनी 30.24% हिस्सेदारी बेचेगी। इस तरह कुल 60.72% हिस्सेदारी फेयरफैक्स की सहयोगी कंपनी के पास जाएगी।  सौदे की प्रमुख बातें इस प्रकार हैं:

  • कुल सौदा: लगभग 52,878.08 करोड़ रुपये।
  • प्रति शेयर कीमत: 81 रुपये।
  • सरकार की शेष हिस्सेदारी: 15%।
  • LIC की शेष हिस्सेदारी: 19%।
  • संयुक्त सरकारी हिस्सेदारी: 34%।

फेयरफैक्स की बोली 75.99 रुपये प्रति शेयर के निर्धारित मूल्यांकन से अधिक रही। हालांकि, मंत्रिमंडल की मंजूरी मिलने का अर्थ यह नहीं है कि अधिग्रहण की सभी प्रक्रियाएं पूरी हो चुकी हैं। सौदे को नियामकीय मंजूरियों और अन्य आवश्यक औपचारिकताओं से गुजरना होगा। इसे मार्च 2027 तक पूरा करने की संभावना जताई गई है।

IDBI बैंक पर ही इतना बड़ा दांव क्यों?

IDBI बैंक की वित्तीय स्थिति में पिछले कुछ वर्षों के दौरान सुधार हुआ है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, सितंबर 2018 में बैंक का सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (NPA) अनुपात 31.78% था, जो मार्च 2026 तक घटकर 2.32% रह गया। खराब कर्ज में इस कमी से बैंक की वित्तीय स्थिति बेहतर हुई है।  प्रेम वत्स के लिए यह निवेश भारतीय बैंकिंग बाजार में अपनी मौजूदगी मजबूत करने का अवसर है। बैंक के मौजूदा ग्राहक आधार, शाखाओं और वित्तीय सेवाओं के नेटवर्क का इस्तेमाल करके कारोबार बढ़ाने की संभावनाएं हैं।

बैंकिंग, बीमा और निवेश सेवाओं को जोड़ने की योजना

फेयरफैक्स की रणनीति केवल IDBI बैंक में हिस्सेदारी हासिल करने तक सीमित नहीं रह सकती। कंपनी अपनी भारतीय वित्तीय सेवाओं को एक साझा मंच पर लाने की संभावनाओं पर काम कर रही है। रिपोर्टों के मुताबिक, इसमें डिजिट लाइफ इंश्योरेंस, डिजिट जनरल इंश्योरेंस और IIFL कैपिटल की परिसंपत्तियों या कारोबार को IDBI बैंक के साथ जोड़ने की योजना शामिल है। हालांकि, ऐसा कोई भी कदम संबंधित नियामकों की मंजूरी और लागू नियमों के अधीन होगा। 

यदि यह योजना सफल होती है, तो बैंकिंग, बीमा, निवेश और वेल्थ मैनेजमेंट जैसी सेवाओं को एक व्यापक वित्तीय व्यवस्था के तहत उपलब्ध कराने का अवसर मिल सकता है।

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