Women Reservation Bill: स्पेशल सत्र की तैयारी के बीच कांग्रेस का हमला, चुनावी फायदे के आरोप से गरमाई राजनीति

महिला आरक्षण कानून पर स्पेशल सत्र की तैयारी के आरोप से सियासत गरम। कांग्रेस ने सरकार पर चुनावी फायदे का आरोप लगाया, आचार संहिता को लेकर विवाद बढ़ा।

महिला आरक्षण को लेकर स्पेशल सत्र बुलाने की चर्चा से सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस ने सरकार पर चुनावी फायदे के लिए कदम उठाने का आरोप लगाया, जबकि आचार संहिता को लेकर विवाद भी बढ़ गया।

New Delhi: महिला आरक्षण (Women Reservation) को लेकर देश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार नारी वंदन अधिनियम (Women Reservation Act) में संशोधन के लिए संसद का विशेष सत्र (Special Parliament Session) बुलाने की तैयारी कर रही है। यह दावा ऐसे समय में सामने आया है जब कई राज्यों में विधानसभा चुनाव चल रहे हैं, जिससे इस मुद्दे ने राजनीतिक रंग और गहरा कर दिया है।

कांग्रेस का आरोप

कांग्रेस नेता Jairam Ramesh ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यह कदम चुनावी लाभ लेने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है। उनका कहना है कि मौजूदा हालात में जब आदर्श आचार संहिता (Model Code of Conduct) लागू है, तब संसद का विशेष सत्र बुलाना नियमों के खिलाफ होगा।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की भूमिका निष्पक्ष नहीं रह गई है और आचार संहिता अब “मोदी आचार संहिता” बन गई है। यह बयान इस पूरे विवाद को और अधिक राजनीतिक बना देता है।

नारी वंदन अधिनियम क्या है

नारी वंदन अधिनियम (Women Reservation Act) 2023 में पारित किया गया था। इसके तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को एक तिहाई आरक्षण देने का प्रावधान किया गया है।

इस कानून में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की आरक्षित सीटों में भी महिलाओं के लिए एक तिहाई आरक्षण सुनिश्चित किया गया है। हालांकि, इस कानून को लागू करने के लिए जनगणना (Census) और परिसीमन (Delimitation) की प्रक्रिया पूरी होना जरूरी बताया गया था।

पहले क्या कहा था सरकार ने

Women Reservation Bill: स्पेशल सत्र की तैयारी के बीच कांग्रेस का हमला, चुनावी फायदे के आरोप से गरमाई राजनीति

जब यह कानून संसद में चर्चा के लिए आया था, तब कांग्रेस ने मांग की थी कि इसे 2024 के लोकसभा चुनाव से ही लागू किया जाए। लेकिन उस समय सरकार ने स्पष्ट किया था कि बिना जनगणना और परिसीमन के इसे लागू करना संभव नहीं है। अब कांग्रेस का आरोप है कि सरकार अपने ही रुख से पीछे हट रही है और बिना इन प्रक्रियाओं को पूरा किए कानून लागू करने की तैयारी कर रही है।

“सरकार ने बदला अपना रुख”

Jairam Ramesh ने कहा कि करीब 30 महीने बाद सरकार ने अचानक अपना रुख बदल लिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री Narendra Modi इस मुद्दे का इस्तेमाल ध्यान भटकाने के लिए कर रहे हैं। उनका कहना है कि देश के सामने मौजूद आर्थिक और ऊर्जा से जुड़े मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है।

चुनाव के बीच विशेष सत्र पर विवाद

कांग्रेस का कहना है कि अप्रैल में किसी भी समय दो दिवसीय विशेष सत्र बुलाना आचार संहिता का उल्लंघन होगा। अगले महीने पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, असम, केरल और पुडुचेरी में चुनाव होने हैं, ऐसे में इस तरह का कदम विवाद को और बढ़ा सकता है। विपक्षी दलों ने सरकार से मांग की है कि पहले चुनाव प्रक्रिया पूरी होने दी जाए और उसके बाद सर्वदलीय बैठक (All Party Meeting) बुलाकर इस मुद्दे पर चर्चा की जाए।

सीटों की संख्या बढ़ाने की योजना

कांग्रेस ने यह भी दावा किया है कि सरकार लोकसभा और विधानसभा की सीटों की संख्या बढ़ाने पर भी विचार कर रही है। इस प्रस्ताव के तहत सीटों में 50 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की जा सकती है। इस तरह के बड़े फैसले पर बिना व्यापक चर्चा के आगे बढ़ना लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ बताया जा रहा है। विपक्ष का मानना है कि इस पर सभी दलों की राय लेना जरूरी है।

जाति जनगणना पर भी उठे सवाल

इस पूरे विवाद के बीच जाति जनगणना (Caste Census) को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। कांग्रेस का कहना है कि सरकार की इस मुद्दे पर वास्तविक प्रतिबद्धता संदिग्ध है। पार्टी ने याद दिलाया कि पहले जब इस मुद्दे को उठाया गया था, तब इसे नजरअंदाज किया गया था। अब अचानक नए फैसले सामने आ रहे हैं, जिससे सरकार की मंशा पर सवाल उठ रहे हैं।

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