दिल्ली में यमुना तट स्वच्छता अभियान 2026 के तहत 28 घाटों पर मेगा क्लीनिंग ड्राइव चलाई गई। सीएम रेखा गुप्ता सहित मंत्रियों और विधायकों ने खुद श्रमदान किया और यमुना को स्वच्छ बनाने का संकल्प दोहराया।
नई दिल्ली: यमुना नदी के पुनर्जीवन और स्वच्छता को लेकर “यमुना तट स्वच्छता अभियान 2026” के तहत रविवार को दिल्ली में बड़े स्तर पर मेगा क्लीनिंग ड्राइव आयोजित की गई। इस अभियान के तहत राजधानी के 28 घाटों पर एक साथ सफाई अभियान चलाया गया, जिसमें मुख्यमंत्री, मंत्री, विधायक, सामाजिक संगठनों और हजारों स्वयंसेवकों ने भाग लिया।
इस पहल का उद्देश्य यमुना नदी को स्वच्छ, निर्मल और प्रदूषण-मुक्त बनाना है, जिसके लिए सरकार ने जनभागीदारी को सबसे अहम आधार बताया है।
28 घाटों पर एक साथ चला मेगा स्वच्छता अभियान
दिल्ली सरकार की इस विशेष पहल के तहत यमुना किनारे स्थित 28 प्रमुख घाटों पर एक साथ सफाई अभियान चलाया गया। इनमें दशमेश घाट, गीता कॉलोनी घाट और हाथी घाट जैसे प्रमुख स्थान शामिल रहे।
इस अभियान में 500 से अधिक सामाजिक और धार्मिक संगठनों के स्वयंसेवकों ने भाग लिया और हजारों लोगों ने श्रमदान करते हुए नदी तट से कचरा हटाया। प्रशासनिक स्तर पर भी सफाई कार्य को व्यवस्थित रूप से अंजाम दिया गया।
मुख्यमंत्री ने खुद उठाया कचरा, दिया स्वच्छता का संदेश
अभियान के दौरान दिल्ली की मुख्यमंत्री ने गीता कॉलोनी स्थित यमुना तट पर पहुंचकर सफाई कार्य में हिस्सा लिया। उन्होंने स्वयं हाथ में झाड़ू और कचरा बैग लेकर घाट की सफाई की और नागरिकों को स्वच्छता के प्रति जागरूक रहने का संदेश दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यमुना का स्वच्छ और निर्मल स्वरूप केवल सरकार के प्रयासों से नहीं, बल्कि जनभागीदारी से ही संभव है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे नदी को स्वच्छ रखने में अपनी जिम्मेदारी निभाएं और इसे एक सामूहिक आंदोलन बनाएं।
मंत्रियों और विधायकों की भी सक्रिय भागीदारी
इस मेगा अभियान में दिल्ली सरकार के सभी मंत्रियों और कई विधायकों ने भी हिस्सा लिया। मंत्री और जनप्रतिनिधि विभिन्न घाटों पर अलग-अलग टीमों के साथ जुड़े रहे और सफाई कार्य में श्रमदान किया।
गौरतलब है कि इस अभियान को केवल औपचारिक कार्यक्रम के बजाय एक ग्राउंड-लेवल मूवमेंट के रूप में आयोजित किया गया, जिसमें नेतृत्व स्तर से लेकर स्थानीय कार्यकर्ताओं तक सभी ने सक्रिय भागीदारी निभाई।
500 से अधिक संगठनों की भागीदारी
इस स्वच्छता अभियान की खास बात यह रही कि इसमें 500 से अधिक सामाजिक, धार्मिक और स्वयंसेवी संगठनों ने भाग लिया। हजारों स्वयंसेवकों ने यमुना के किनारों से प्लास्टिक, कचरा और अन्य अपशिष्ट सामग्री को हटाने में योगदान दिया।

स्थानीय निवासियों ने भी इस पहल में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और इसे एक सामुदायिक अभियान के रूप में आगे बढ़ाया।
सरकार की प्रतिबद्धता और भविष्य की योजना
अभियान के दौरान सरकार के मंत्रियों ने दावा किया कि यमुना को स्वच्छ बनाने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है और आने वाले वर्षों में इसके परिणाम स्पष्ट रूप से दिखाई देंगे।
एक मंत्री ने कहा कि केंद्र और राज्य स्तर पर समन्वय के साथ योजनाएं चलाई जा रही हैं और समय-समय पर उच्च स्तरीय समीक्षा बैठकों के माध्यम से प्रगति पर नजर रखी जा रही है।
सरकारी प्रतिनिधियों का मानना है कि यदि यह अभियान निरंतर चलता रहा तो आने वाले वर्षों में यमुना के जल और तट दोनों में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिलेगा।
तीन साल में बदलाव का दावा
अभियान में शामिल एक वरिष्ठ मंत्री ने दावा किया कि यमुना की स्थिति में अगले तीन वर्षों में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। उन्होंने कहा कि सरकार इस दिशा में लगातार कार्य कर रही है और इसमें प्रशासनिक, तकनीकी और सामाजिक सभी स्तरों पर प्रयास जारी हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि स्वच्छता अभियान केवल एक दिन का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि इसे नियमित प्रक्रिया के रूप में आगे बढ़ाया जाएगा।
यमुना सफाई को जनआंदोलन बनाने की अपील
विधानसभा अध्यक्ष ने अभियान में भाग लेते हुए कहा कि यमुना की स्वच्छता केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसे एक जनआंदोलन में बदलने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि जब तक आम नागरिक सक्रिय रूप से भागीदारी नहीं करेंगे, तब तक किसी भी नदी या पर्यावरणीय सुधार अभियान को स्थायी सफलता नहीं मिल सकती।
सामाजिक और राजनीतिक समर्थन भी शामिल
इस अभियान में कई सामाजिक कार्यकर्ताओं, स्थानीय निवासियों और राजनीतिक नेताओं ने मिलकर हिस्सा लिया। सभी ने यमुना की स्वच्छता को राजधानी की प्राथमिक जरूरत बताया।
वक्ताओं ने कहा कि यमुना केवल एक नदी नहीं बल्कि दिल्ली की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान का हिस्सा है, जिसे संरक्षित रखना सभी की जिम्मेदारी है।
यमुना की वर्तमान स्थिति और चुनौती
यमुना नदी लंबे समय से प्रदूषण, औद्योगिक कचरे और घरेलू अपशिष्ट के कारण गंभीर पर्यावरणीय संकट का सामना कर रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, नदी के कई हिस्सों में जल गुणवत्ता बेहद खराब स्थिति में पहुंच चुकी है।
ऐसे में इस तरह के बड़े स्तर के स्वच्छता अभियान को नदी के पुनर्जीवन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, हालांकि स्थायी समाधान के लिए दीर्घकालिक नीतियों और कठोर क्रियान्वयन की आवश्यकता बनी हुई है।












