बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट के इस्तीफा देने और सुप्रीम कोर्ट में मामला पहुंचने के बाद विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियम पर बहस तेज हो गई है।
नई दिल्ली: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के “Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026” को लेकर देशभर में बहस तेज हो गई है। इस मामले पर कवि और राजनीतिज्ञ कुमार विश्वास ने पहली प्रतिक्रिया दी है और नियम वापस लेने की मांग की है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर कुमार विश्वास ने स्व. रमेश रंजन मिश्र द्वारा लिखी गई कविता की चार पंक्तियां साझा करते हुए यूजीसी नियमों की आलोचना की:
'चाहे तिल लो या ताड़ लो राजा,
राई लो या पहाड़ लो राजा,
मैं अभागा ‘सवर्ण’ हूँ मेरा,
रौंया-रौंया उखाड़ लो राजा…'
कुमार विश्वास ने इसके बाद सीधे शब्दों में लिखा – “यूजीसी रोलबैक”।
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यूजीसी नियमों पर विवाद
यूजीसी के नए नियमों को लेकर आम जनता, छात्र और कई नेताओं ने कड़ी आपत्तियां जताई हैं। आलोचकों का मानना है कि यह नियम सामान्य वर्ग के छात्रों को अनावश्यक रूप से निशाना बना सकते हैं और विश्वविद्यालय कैंपस में तनाव और विरोध बढ़ा सकते हैं। नियमों के समर्थक इसे आवश्यक सुधारात्मक कदम मानते हैं। उनका कहना है कि यह नियम केवल अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने और संस्थागत जवाबदेही लाने के लिए बनाए गए हैं।
यूजीसी ने यह नियम 2019 और 2023 के बीच भेदभाव की शिकायतों में 118 प्रतिशत वृद्धि की रिपोर्ट के आधार पर जारी किए हैं। इनमें मुख्य रूप से शिक्षा संस्थानों में उत्पीड़न और भेदभाव की शिकायतों पर ध्यान केंद्रित किया गया है। नियमों के तहत अब संस्थानों के प्रमुखों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उत्पीड़न की शिकायतों का तत्काल समाधान हो और नियमित निगरानी के जरिए नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाए। समर्थक कहते हैं कि यह कदम रिवर्स भेदभाव नहीं है, बल्कि इतिहासिक हाशिए पर धकेले गए समूहों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है।
आलोचना और समर्थन
आलोचक तर्क देते हैं कि नियम एकतरफा और अनुचित हैं, और सामान्य वर्ग के छात्रों के लिए सुरक्षा अपर्याप्त है। समर्थक कहते हैं कि नियम संस्थागत जवाबदेही और छात्र सुरक्षा के लिए ज़रूरी हैं। इस तरह, यूजीसी नियमों पर सामाजिक और राजनीतिक बहस तेज हो गई है, और देश के शिक्षा जगत में यह विषय गर्मागरम चर्चा का केंद्र बना हुआ है।
कुमार विश्वास की प्रतिक्रिया ने एक नया सार्वजनिक विमर्श खड़ा किया है। कवि ने नियमों पर तीखी टिप्पणी करते हुए इसे “सामान्य वर्ग के छात्रों के खिलाफ” बताया। उनका यह कदम सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हुआ, और कई लोग उनकी इस मांग को समर्थन दे रहे हैं।










