युद्ध के कारण बदली जिंदगी, हजारों परिवारों को छोड़ना पड़ा अपना घर

ईरान में युद्ध के बीच लाखों लोग घर छोड़ने को मजबूर हैं। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार लगभग 32 लाख लोग विस्थापित हो चुके हैं, कुछ नागरिक विदेश से लौटे।

ईरान में जारी युद्ध के कारण लाखों लोग घर छोड़ने को मजबूर हैं। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार करीब 32 लाख लोग विस्थापित हो चुके हैं। कुछ लोग सुरक्षित स्थानों की तलाश में जा रहे हैं, जबकि कई विदेश से अपने परिवार के पास लौट रहे हैं।

Iran-Israel Conflict: ईरान में जारी युद्ध ने आम नागरिकों की जिंदगी को गहराई से प्रभावित किया है। लगातार हमलों और बम धमाकों के कारण कई लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हो गए हैं, जबकि कुछ लोग परिवार के साथ रहने के लिए विदेश से वापस अपने देश लौट रहे हैं। इसी स्थिति ने हजारों परिवारों को एक कठिन दुविधा में डाल दिया है कि वे सुरक्षा के लिए देश छोड़ दें या अपने घर और परिवार के पास ही रहें।

पूर्वी ईरान के गोलेस्तान इलाके में रहने वाली मर्वे पौरकाज भी इसी हालात का सामना कर रही हैं। उनके घर के पास बम विस्फोट होने के बाद उन्होंने सुरक्षा की तलाश में लंबा सफर तय किया और तुर्किये के वान शहर पहुंच गईं। करीब 1500 किलोमीटर की यात्रा के बाद उन्होंने वहां अस्थायी रूप से रहने का फैसला किया। उनका कहना है कि यदि अनुमति मिली तो वह युद्ध समाप्त होने तक वान में ही रहेंगी।

मर्वे पौरकाज जैसे कई लोग इस समय अपने घरों से दूर सुरक्षित स्थानों की तलाश में हैं। हालांकि कई ऐसे भी लोग हैं जो विदेश में सुरक्षित रहने के बावजूद अपने परिवार और देश के लिए वापस लौट रहे हैं।

संयुक्त राष्ट्र का अनुमान

युद्ध के कारण पैदा हुए मानवीय संकट को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ रही है। United Nations High Commissioner for Refugees यानी संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी के अनुमान के अनुसार इस संघर्ष के कारण लगभग 32 लाख लोग विस्थापित हो चुके हैं।

इनमें से कुछ लोग ईरान के भीतर ही अपेक्षाकृत सुरक्षित क्षेत्रों में चले गए हैं, जबकि कई लोग पड़ोसी देशों में शरण लेने की कोशिश कर रहे हैं। कुछ लोग ऐसे भी हैं जो पहले विदेश में थे लेकिन युद्ध के दौरान अपने परिवार के पास लौटने का फैसला कर रहे हैं।

युद्ध के कारण बदली जिंदगी, हजारों परिवारों को छोड़ना पड़ा अपना घर

बताया जा रहा है कि यदि यह संघर्ष लंबे समय तक जारी रहता है तो विस्थापन की संख्या और बढ़ सकती है। इससे क्षेत्र में बड़ा मानवीय संकट पैदा होने की आशंका भी जताई जा रही है।

तुर्किये में शरण लेने पहुंचे कई ईरानी

ईरान के कई नागरिक सुरक्षा की तलाश में पड़ोसी देशों की ओर जा रहे हैं। खासकर तुर्किये इस समय उन लोगों के लिए एक प्रमुख स्थान बन गया है जो युद्ध से बचने के लिए देश छोड़ रहे हैं।

तुर्किये के वान शहर में पहुंची मर्वे पौरकाज ने बताया कि बम धमाके के बाद उनके लिए अपने घर में रहना सुरक्षित नहीं था। उन्होंने कहा कि स्थिति लगातार खतरनाक होती जा रही थी और उन्हें अपने परिवार की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए देश छोड़ने का फैसला करना पड़ा।

कुछ लोग विदेश से लौट रहे अपने वतन

जहां कई लोग ईरान छोड़ रहे हैं, वहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं जो विदेश में रहने के बावजूद अपने परिवार के पास लौटने का फैसला कर रहे हैं। 45 वर्षीय लैला राबेत्नेजादफर्ड इसका एक उदाहरण हैं।

लैला इस्तांबुल में थीं और वहां एक जर्मन विश्वविद्यालय के प्रोफेसर से शादी करने की तैयारी कर रही थीं। लेकिन जैसे ही युद्ध शुरू हुआ, उन्होंने अपनी शादी की योजना को स्थगित कर दिया और ईरान लौटने का निर्णय लिया।

लैला ने कहा कि वह इस्तांबुल में सुरक्षित महसूस नहीं कर सकतीं जबकि उनका परिवार ईरान में युद्ध के बीच रह रहा है। उनका मानना है कि ऐसे समय में अपने परिवार के साथ रहना ज्यादा जरूरी है।

ईरान से बाहर जाने वालों की संख्या अभी सीमित

अब तक ईरान से बाहर जाने वाले लोगों की संख्या अपेक्षाकृत कम बताई जा रही है। कई रिपोर्टों के अनुसार कुछ दिनों में देश छोड़ने वालों की तुलना में लौटने वालों की संख्या अधिक रही है। हालांकि स्थिति तेजी से बदल सकती है। यदि युद्ध लंबे समय तक चलता है और हमलों की तीव्रता बढ़ती है तो बड़ी संख्या में लोग देश छोड़ने के लिए मजबूर हो सकते हैं।

इसी संभावना को देखते हुए ईरान के पड़ोसी देश और यूरोपीय देश संभावित प्रवासन संकट को लेकर चिंतित हैं। उनका मानना है कि यदि संघर्ष जारी रहता है तो लाखों लोग सुरक्षा के लिए दूसरे देशों की ओर रुख कर सकते हैं।

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