रक्षाबंधन के दिन वाराणसी में एक ऐसा दृश्य सामने आया, जिसने वहां मौजूद लोगों को भावुक कर दिया। जिस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर उनकी लंबी उम्र की कामना कर रही थीं, उसी दिन कुछ बहनें अपने मृत भाई की कलाई पर राखी बांधते हुए रो रही थीं। भाई की अर्थी की तैयारी के बीच बहनों ने उसके शव की कलाई पर राखी बांधी और पुरानी यादों को याद किया।
वाराणसी में मृत भाई की कलाई पर बहनों ने बांधी आखिरी राखी
बहनों ने बताया कि उनका भाई हर साल रक्षाबंधन पर उन्हें गिफ्ट देता था। राखी के दिन घर में खुशियों और भाई-बहन के बीच हंसी-मजाक का माहौल रहता था। इस बार वही त्योहार परिवार के लिए बेहद दुखद दिन बन गया। भाई के अचानक निधन से बहनों को गहरा सदमा लगा है।
भाई की कलाई पर राखी बांधते समय बहनों की आंखों से लगातार आंसू निकल रहे थे। वे उसे पुकार रही थीं और पुरानी यादों को याद कर रही थीं। उन्होंने कहा कि हर साल भाई राखी बंधवाने के बाद उन्हें उपहार देता था। उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि एक दिन वे उसकी कलाई पर राखी तो बांधेंगी, लेकिन वह जवाब देने के लिए उनके बीच नहीं होगा।
बहनों ने कहा कि भाई हर साल राखी पर उन्हें गिफ्ट देता था, लेकिन इस बार उन्हें ऐसा "सरप्राइज" मिला है, जिसे वे कभी बर्दाश्त नहीं कर सकतीं। परिवार के मुताबिक भाई की मौत के बाद घर में मातम पसरा हुआ है और त्योहार की खुशियां गम में बदल गई हैं।
रक्षाबंधन भाई-बहन के रिश्ते का त्योहार माना जाता है। इस दिन बहनें भाई की कलाई पर राखी बांधती हैं और भाई उनकी रक्षा का वचन देने के साथ उन्हें उपहार देते हैं। वाराणसी में सामने आए इस मामले में बहनों ने उसी रिश्ते की रस्म निभाई, लेकिन परिस्थितियां बेहद दुखद थीं। जिस कलाई पर वे भाई की सलामती की दुआ करते हुए राखी बांधती थीं, उसी कलाई पर उन्हें अंतिम बार राखी बांधनी पड़ी।
परिवार के लिए यह घटना इसलिए भी पीड़ादायक रही क्योंकि मौत ऐसे समय हुई जब पूरे देश में रक्षाबंधन मनाया जा रहा था। घरों में बहनें भाइयों को राखी बांध रही थीं, मिठाइयां खिलाई जा रही थीं और परिवार के सदस्य त्योहार मना रहे थे। वहीं इस परिवार में राखी की थाली तो तैयार हुई, लेकिन उसमें त्योहार की खुशी के बजाय भाई को खोने का दर्द था।
बहनों के लिए भाई केवल परिवार का सदस्य नहीं था, बल्कि उनकी जिंदगी का अहम हिस्सा था। बचपन से बड़े होने तक साझा की गई यादें इस मौके पर बार-बार सामने आती रहीं। राखी के दिन भाई की मौजूदगी न होना उनके लिए सबसे बड़ा दुख बन गया। राखी बांधते समय वे उन पलों को याद करती रहीं, जब वह हंसते हुए उनसे राखी बंधवाता था।
मौके पर मौजूद लोगों के मुताबिक बहनों को संभालना मुश्किल हो रहा था। वे कभी भाई के चेहरे को देखतीं तो कभी उसकी कलाई पर बंधी राखी को। परिवार के अन्य सदस्य उन्हें सांत्वना देने की कोशिश करते रहे। भाई की मौत का सदमा इतना गहरा था कि उन्हें समझाना आसान नहीं था।
राखी बांधने की यह रस्म परिवार के लिए भावनाओं से भरी रही। बहनों ने भाई की कलाई पर राखी बांधी और अंतिम विदाई से पहले अपने रिश्ते की आखिरी निशानी उसके साथ जोड़ दी। इस दृश्य को देखकर वहां मौजूद कई लोगों की आंखें भी भर आईं।
परिवार के लोगों के लिए इस बार का रक्षाबंधन ऐसी तारीख बन गया है, जिसे वे भूल नहीं पाएंगे। हर साल रक्षाबंधन आने पर बहनों को अपने भाई की याद आएगी। राखी की थाली, कलाई पर बंधा धागा और भाई का दिया हुआ गिफ्ट पुरानी यादों को सामने ला सकते हैं।
भाई के अचानक चले जाने के साथ बहनों के बचपन की कई यादें, त्योहारों की खुशियां और परिवार के साथ बिताए पल भी दुख की यादों में बदल गए हैं। रक्षाबंधन जैसे त्योहार पर यह दर्द और अधिक महसूस होता है क्योंकि इसी दिन भाई-बहन का रिश्ता विशेष रूप से याद किया जाता है।
वाराणसी को काशी के नाम से भी जाना जाता है और यहां धार्मिक आयोजनों तथा त्योहारों की अपनी अलग पहचान है। रक्षाबंधन पर शहर में जगह-जगह चहल-पहल रही, लेकिन इस परिवार के घर में मातम छाया रहा। बाहर लोग त्योहार मना रहे थे, जबकि घर के भीतर परिवार अपने बेटे और भाई को अंतिम विदाई देने की तैयारी कर रहा था।
बहनों के आंसुओं और उनकी बातों से आसपास मौजूद लोगों को भी उनके दुख की गहराई का अहसास हुआ। उन्होंने बताया कि भाई हर साल उन्हें गिफ्ट देता था। इस बार बहनें राखी लेकर उसके पास पहुंची थीं, लेकिन उन्हें उम्मीद नहीं थी कि राखी बांधने के लिए भाई की जीवित कलाई उनके सामने नहीं होगी।
भाई की मौत के बाद परिवार के सामने अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी करने की जिम्मेदारी भी थी। इसी दौरान बहनों ने आखिरी बार अपने भाई को राखी बांधने की इच्छा जताई। परिवार ने उनकी भावना का सम्मान किया और उन्होंने शव की कलाई पर राखी बांधी। इस दौरान वहां मौजूद लोगों के बीच गम का माहौल और गहरा हो गया।
रक्षाबंधन पर भाई की कलाई पर राखी बांधने की परंपरा सदियों पुरानी है। बहन अपने भाई की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करती है। इस मामले में भी बहनों ने इसी रिश्ते की रस्म निभाई, लेकिन परिस्थितियों के कारण राखी खुशी के बजाय अंतिम विदाई का प्रतीक बन गई।
परिवार अब भाई और बेटे को खोने के बाद गहरे सदमे में है। घर में त्योहार की तैयारियां थीं, लेकिन कुछ ही समय में पूरा माहौल बदल गया। जिस घर में राखी के मौके पर मिठाई और उपहार की बातें होनी थीं, वहां अंतिम विदाई की तैयारियां हो रही थीं।
इस घटना ने स्थानीय लोगों को भी झकझोर दिया। भाई की कलाई पर बहनों द्वारा राखी बांधने का दृश्य लोगों के जेहन में बना रहा। जिस भाई को राखी बांधने के लिए बहनें पहुंची थीं, वह अब उनके बीच नहीं था।
आने वाले वर्षों में रक्षाबंधन इस परिवार को उस भाई की याद दिलाएगा, जो हर साल बहनों को गिफ्ट देता था और उनके साथ त्योहार मनाता था। इस बार बहनों ने उसे राखी बांधी, लेकिन भाई की ओर से मिलने वाली मुस्कान और गिफ्ट हमेशा के लिए याद बन गए।
बहनों ने भाई की कलाई पर आखिरी बार राखी बांधी और नम आंखों से उसे विदाई दी। उनके लिए इस बार की राखी ऐसी याद बन गई है, जिसमें त्योहार की हर खुशी के साथ भाई को खोने का गम जुड़ा रहेगा।












