Dahi Handi 2025: उत्सव, संगठन और धैर्य का प्रतीक

जन्माष्टमी के दूसरे दिन 17 अगस्त को मनाया जाने वाला दही हांडी केवल कृष्ण लीला का स्मरण नहीं, बल्कि यह संगठन, उत्साह और समर्पण का संदेश भी देता है।

दही हांडी का उत्सव

17 अगस्त 2025 को जन्माष्टमी के अगले दिन दही हांडी का आयोजन धूमधाम से होगा। यह पर्व कृष्ण की बाल लीलाओं को याद करने का अवसर है।

कृष्ण की नटखट लीलाएं

बाल्यकाल में कान्हा अपने सखाओं के साथ ऊंची हांडी फोड़कर माखन चुराया करते थे। यही हांडी फोड़ने की परंपरा आज भी जीवंत है।

संगठन का संदेश

गोविंदा मानव पिरामिड बनाकर हांडी फोड़ते हैं। यह दिखाता है कि एकजुट होकर बड़ी समस्याओं को पार किया जा सकता है।

उत्साह का प्रतीक

भीड़ में तालियों और संगीत का माहौल गोवालों को ऊर्जा देता है। यह संदेश देता है कि जोश और सकारात्मकता सफलता की कुंजी हैं।

समर्पण और धैर्य

गोविंदा बार-बार प्रयास करते हैं। असफलताओं के बावजूद प्रयास करना यह सिखाता है कि धैर्य और समर्पण से सब कुछ संभव है।

आनंद और भक्ति

दही हांडी केवल खेल नहीं, बल्कि भक्ति और उल्लास का पर्व है। यह सामाजिक एकता और उत्साह का प्रतीक बनता है।

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