10 साल बाद बाहुबली फिर सिनेमाघरों में लौटी है, इस बार एक नए फॉर्म में. दोनों पार्ट्स को मिलाकर बनी ये री-एडिटेड फिल्म अब सिर्फ एक इंटरवल के बाद दे देती है वो जवाब, जिसका देश ने सालों इंतजार किया था. चलिए देखते हैं इस सिनेमैटिक सफर की खास बातें
राजामौली ने दोनों पार्ट्स को मिलाकर एक 3 घंटे 45 मिनट की महा-फिल्म बनाई है. दर्शकों को बिना रुकावट पूरी कहानी देखने को मिलती है
फिल्म के पहले हिस्से में कई दृश्यों को ट्रिम किया गया है. रोमांस कम, कहानी की गति ज्यादा ताकि अनुभव और भी टाइट महसूस हो
अवंतिका और शिवुडु की लव स्टोरी अब साइड में है. फोकस सीधा शक्तिशाली साम्राज्य और राज-सियासत पर
री-मास्टर विजुअल्स, शार्प CGI और दमदार सेट डिज़ाइन अब भी हैरान कर देता है. महिष्मती आज भी उतनी ही शानदार दिखती है
प्रभास के बाहुबली और राणा के भल्लालदेव को एक साथ बिग स्क्रीन पर देखना फिर से रोमांचित कर देता है. शिवगामी और देवसेना के किरदार अब भी दिल जीतते हैं
अगर आपने इसे थिएटर में कभी नहीं देखा, तो यह मौका मिस न करें. यह सिर्फ फिल्म नहीं, इंडियन सिनेमा की धरोहर है