ढाबे से दुनिया के मंच तक, ओम पुरी की संघर्ष भरी जिंदगी की कहानी

आज ओम पुरी को दुनिया महान अभिनेता के रूप में याद करती है, लेकिन उनका बचपन दर्द, भूख और संघर्ष से भरा था. उनकी पुण्यतिथि पर जानिए वो अनसुनी कहानी, जो किसी को भी भावुक कर दे

गरीबी में बीता बचपन

ओम पुरी का जन्म बेहद गरीब परिवार में हुआ. पिता रेलवे स्टोर में काम करते थे और परिवार ट्रैक के पास एक छोटे कमरे में रहता था.

छह साल की उम्र में सड़क पर

पिता पर चोरी का आरोप लगा, नौकरी गई और जेल हो गई. परिवार बेघर हुआ और महज छह साल के ओम पुरी को काम करना पड़ा.

चाय की दुकान और ढाबे का सफर

ओम पुरी ने चाय की दुकान पर जूठे गिलास धोए और ढाबे पर काम किया. मेहनत के बदले मिलने वाली टिप्स से उनका हौसला बना रहा.

पढ़ाई नहीं छोड़ी

मुश्किल हालात के बावजूद ओम पुरी ने पढ़ाई जारी रखी. स्कूल में रहकर छोटे बच्चों को ट्यूशन पढ़ाई और उसी से पेट भरा.

नौकरी छोड़ चुना रंगमंच

सरकारी नौकरी छोड़कर उन्होंने थिएटर का रास्ता चुना. कॉलेज और नाट्य मंच से उनका आत्मविश्वास बढ़ता चला गया.

एनएसडी से सिनेमा तक

एनएसडी से निकलकर ओम पुरी श्याम बेनेगल से मिले. यहीं से उनके अभिनय की पहचान बनी और वह सिनेमा के इतिहास में अमर हो गए.

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