खतरे में कश्मीर की झीलें: क्या गायब हो जाएगी धरती की जन्नत?

कभी खूबसूरती की पहचान रही कश्मीर की झीलें अब प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन और अतिक्रमण की मार झेल रही हैं। जानिए क्यों बढ़ रहा है यह बड़ा पर्यावरणीय संकट।

जन्नत पर मंडरा रहा खतरा

बर्फीले पहाड़ों के बीच चमकती कश्मीर की झीलें तेजी से सिकुड़ रही हैं। विशेषज्ञ इसे आने वाले समय का बड़ा पर्यावरणीय संकट मान रहे हैं।

डल झील की बिगड़ती तस्वीर

प्रदूषण, खरपतवार और घटते जलस्तर ने डल झील की सेहत खराब कर दी है। लगातार सफाई के बावजूद हालात चिंता बढ़ा रहे हैं।

हर दिन मुश्किल सफाई अभियान

झील की सफाई में जुटे कर्मचारी घंटों पानी में उतरकर खरपतवार हटाते हैं। गंदे पानी की वजह से सुरक्षा के बिना काम करना भी जोखिम भरा है।

सैकड़ों झीलें हो चुकी हैं गायब

सरकारी रिपोर्ट के अनुसार 1967 के बाद कश्मीर की 315 प्राकृतिक झीलें खत्म हो चुकी हैं। 203 झीलों का आकार भी लगातार छोटा होता जा रहा है।

प्रदूषण और अतिक्रमण का असर

सीवेज, प्लास्टिक, गाद और अनियोजित निर्माण ने झीलों की हालत बिगाड़ दी है। इसका असर पर्यटन, मछुआरों और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी दिख रहा है।

जलवायु परिवर्तन ने बढ़ाई चिंता

बढ़ता तापमान, कम बर्फबारी और बदलता मौसम झीलों के भविष्य के लिए बड़ा खतरा बन चुका है। समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो कई झीलें इतिहास बन सकती हैं।

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