महाभारत में भीम और हनुमान जी की कहानी बताती है कि वीरता का असली अर्थ केवल ताकत नहीं, बल्कि नम्रता और सम्मान भी है।
भीम द्रौपदी के लिए फूल लेने गंधमादन पर्वत गए। यह क्षेत्र आज तिब्बत में स्थित है।
रास्ते में भीम को एक वृद्ध वानर मिला, जो कोई और नहीं बल्कि हनुमान जी थे।
भीम ने वानर को रास्ते से हटाने और पूंछ हटाने के लिए कहा, तब उनका क्रोध उभर आया।
भीम ने पूरी ताकत लगाई, लेकिन वानर की पूंछ हिल भी नहीं पाई, जिससे उनका गर्व टूट गया।
भीम ने माफी मांगी और हनुमान जी ने अपना दिव्य रूप दिखाकर उन्हें आशीर्वाद दिया।
हनुमान जी ने कहा कि भीम युद्ध में अर्जुन के रथ पर ध्वजा में हमेशा रहेंगे।