सोमनाथ मंदिर का इतिहास संघर्ष और श्रद्धा का प्रतीक रहा है। जानें गजनी से आजादी के बाद तक इस मंदिर की यात्रा और राजनीतिक विवाद की कहानी।
1026 में महमूद गजनी ने सोमनाथ मंदिर पर हमला किया। मंदिर की संपदा और हिंदू संस्कृति पर आघात का यह पहला बड़ा प्रतीक था।
1706 में औरंगजेब ने मंदिर को पूरी तरह नष्ट किया। इसके बावजूद हिंदू श्रद्धा और पूजा कभी नहीं रुकी।
1947 में जूनागढ़ के भारत में विलय के बाद सरदार पटेल ने मंदिर के पुनर्निर्माण का संकल्प लिया और जनसहयोग से काम शुरू हुआ।
प्रधानमंत्री नेहरू ने सरकार की धर्मनिरपेक्ष छवि की फिक्र जताई। महात्मा गांधी चाहते थे कि निर्माण का खर्च जनसहयोग से ही आए।
राष्ट्रपति डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद ने उद्घाटन समारोह में भाग लिया और मंदिर पुनर्निर्माण को अपनी मौजूदगी से सम्मानित किया।
मंदिर सिर्फ पूजा का स्थल नहीं, बल्कि हिंदू समाज की अस्मिता का प्रतीक है। इसका पुनरुद्धार इतिहास और श्रद्धा की ताकत दिखाता है।