दोनों ही साउथ इंडिया की रॉयल साड़ियां हैं, दिखने में मिलती-जुलती लेकिन खासियत और बुनाई में बड़ा अंतर है।
कांजीवरम साड़ी तमिलनाडु के कांचीपुरम में बनाई जाती है और हाई क्वालिटी मलबेरी सिल्क से हाथों से बुनी जाती है।
इसमें गोल्ड और सिल्वर जरी का बारीक काम होता है और तीन अलग हिस्सों में बुनाई होने से यह भारी और बेहद टिकाऊ होती है।
मैसूर में बनने वाली यह साड़ी सौ प्रतिशत शहतूत रेशम से तैयार होती है और बहुत हल्की व सॉफ्ट होती है।
इसमें रियल गोल्ड और सिल्वर बॉर्डर के साथ सिंपल और क्लासी डिजाइन होते हैं जो फेस्टिवल के लिए परफेक्ट हैं।
कांजीवरम में बॉडी, बॉर्डर और पल्लू अलग-अलग बुने जाते हैं जबकि मैसूर सिल्क इंटरलॉक पैटर्न से तैयार होती है।
शादी और भारी लुक के लिए कांजीवरम बेस्ट है जबकि लाइटवेट और एलिगेंट स्टाइल के लिए मैसूर सिल्क सही विकल्प है।