गुरुवार पूजा भगवान विष्णु और बृहस्पति देव को समर्पित है, जो आध्यात्मिक शक्ति, ज्ञान और समृद्धि प्रदान करती है। जानें पूजा विधि और लाभ

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गुरुवार का दिन भारतीय संस्कृति में विशेष महत्व रखता है। यह दिन देवगुरु बृहस्पति को समर्पित है, जिन्हें ज्ञान, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक माना जाता है। इस दिन पूजा-अर्चना करने से व्यक्ति को शुभ फल प्राप्त होते हैं और जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।

गुरुवार पूजा का महत्व

गुरुवार को भगवान विष्णु और बृहस्पति देव की पूजा का विशेष विधान है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन व्रत रखने और पूजा करने से न केवल आर्थिक स्थिति मजबूत होती है, बल्कि पारिवारिक कलह भी समाप्त होती है।

1.आध्यात्मिक शक्ति का जागरण: गुरुवार का व्रत और पूजा आत्मा को शुद्ध करने में मदद करता है। यह व्यक्ति को नकारात्मक ऊर्जा से बचाकर सकारात्मकता की ओर ले जाता है।

2.धन और समृद्धि का आगमन: यह दिन विशेष रूप से व्यापारियों और नौकरीपेशा लोगों के लिए शुभ माना जाता है। बृहस्पति देव की कृपा से व्यापार में उन्नति और आर्थिक स्थिरता प्राप्त होती है।
3.शिक्षा और बुद्धिमत्ता का विकास: विद्यार्थी और शिक्षक इस दिन विशेष रूप से बृहस्पति देव की पूजा करते हैं, क्योंकि वे ज्ञान और बुद्धि के कारक माने जाते हैं।

गुरुवार पूजा की विधि

1.स्नान और पवित्रता: प्रातः स्नान करके पीले वस्त्र धारण करें और स्वच्छ मन से पूजा करें।
2.भगवान विष्णु और बृहस्पति देव की पूजा: घर के मंदिर में भगवान विष्णु और बृहस्पति देव का चित्र या मूर्ति स्थापित करें और हल्दी, चने की दाल, पीले फूल, केले और गुड़ का प्रसाद चढ़ाएं।
3.गुरुवार व्रत कथा का पाठ: व्रत करने वाले को गुरुवार व्रत कथा का पाठ करना चाहिए, जिससे पूजा का संपूर्ण लाभ प्राप्त हो सके।
4.पीले रंग का महत्व: इस दिन पीले वस्त्र पहनने और पीले खाद्य पदार्थों का सेवन करने का विशेष महत्व होता है।

गुरुवार को क्या करें और क्या न करें

क्या करें

• गुरु बृहस्पति के मंत्रों का जाप करें।
• जरूरतमंदों को भोजन कराएं और पीले रंग की वस्तुओं का दान करें।
• केले के वृक्ष की पूजा करें और उसके नीचे दीपक जलाएं।

क्या न करें

• इस दिन बाल धोना और कपड़े धोना वर्जित माना जाता है।
• मांसाहार और नशे से दूर रहें।
• घर में कलह या किसी का अपमान न करें।

गुरुवार आरती

जय जय बृहस्पति देव, करों कृपा सुखरास।
भक्तों के संकट हरो, बनो कृपालु दास॥

गुरु बिन ज्ञान न पाया कोई, जगत में सबसे न्यारे।
विष्णु स्वरूप, दया के सागर, जीवन नैया के सहारे॥

पीले फूलों की माला पहनूं, करूं तुम्हारी पूजा।
धन, बुद्धि, विद्या और वैभव, सब दो मेरी दूजा॥

गुरुवार की ये शुभ संध्या, मंगलमय हो जाए।
सुन लो आरती प्रेम से गुरु, आशीर्वाद बरसाए॥

घर में सुख-समृद्धि बरसे, दूर हो कष्ट अपार।
कृपा करो हे ज्ञानदाता, करो भवसागर पार॥
जय देवगुरु बृहस्पति महाराज की जय!
जो कोई श्रद्धा से गाए, जीवन में प्रकाश वह पाए!

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