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चैत्र नवरात्रि 2025: सप्तमी तिथि पर मां कालरात्रि की पूजा से मिलेगा दोगुना फल, जानें शुभ मुहूर्त

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चैत्र नवरात्रि 2025 का सातवां दिन विशेष रूप से शुभ माना जा रहा है। 4 अप्रैल को सप्तमी तिथि के अवसर पर मां कालरात्रि की उपासना की जाती है। इस दिन दुर्लभ शोभन योग और भद्रावास योग समेत कई मंगलकारी संयोग बन रहे हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कालरात्रि की पूजा से साधक को दोगुना फल प्राप्त होता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

सप्तमी तिथि और योग का विशेष महत्व

चैत्र नवरात्रि की सप्तमी तिथि 4 अप्रैल को रात 08:11 बजे तक है, इसके बाद अष्टमी तिथि का आरंभ होगा। सप्तमी के दिन देवी दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की पूजा का विशेष महत्व है।

1. भद्रावास योग: चैत्र नवरात्रि के सातवें दिन भद्रावास योग का संयोग बन रहा है। इस योग का प्रभाव रात 08:12 बजे तक रहेगा। मान्यता है कि इस शुभ योग में मां कालरात्रि की पूजा से सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है।

2. शोभन योग: इसी दिन दुर्लभ शोभन योग का संयोग भी बन रहा है, जो रात 09:45 बजे तक प्रभावी रहेगा। इस योग में मां कालरात्रि की पूजा करने से साधक की हर मनोकामना पूरी होती है।

3. अभिजीत मुहूर्त: चैत्र नवरात्रि के सातवें दिन अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11:59 से 12:49 तक है। इस मुहूर्त में मां कालरात्रि की आराधना करने से जीवन में आने वाली सभी बाधाएं दूर हो जाती हैं।

कालरात्रि की पूजा के लाभ

मां कालरात्रि को तंत्र साधना की देवी माना जाता है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, मां की उपासना से साधक को भयमुक्त जीवन, अकाल मृत्यु से रक्षा और समस्त सिद्धियों की प्राप्ति होती है। मां का रूप काला, आक्रामक और शक्तिशाली है। उनके चार हाथों में खड़ग, कांटा, वरद मुद्रा और अभय मुद्रा है।

पूजा विधि

पूजा स्थल को स्वच्छ करके लाल कपड़ा बिछाएं।
मां कालरात्रि की प्रतिमा या तस्वीर को स्थापित करें।
लाल वस्त्र पहनकर पूजा करें।
रातरानी के फूल चढ़ाएं और तिल या सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
दुर्गा चालीसा का पाठ और मां के मंत्रों का जाप करें।
गुड़ का भोग लगाकर कपूर से आरती करें।

शुभ मुहूर्त और पंचांग

सूर्योदय: सुबह 06:08 बजे
सूर्यास्त: शाम 06:41 बजे
चंद्रोदय: सुबह 10:37 बजे
चंद्रास्त: देर रात 01:29 बजे
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:36 से 05:22
विजय मुहूर्त: दोपहर 02:30 से 03:20
गोधूलि मुहूर्त: शाम 06:39 से 07:02
निशिता मुहूर्त: रात 12:01 से 12:47

मां कालरात्रि: विनाश से कल्याण तक का प्रतीक

मां कालरात्रि का विकराल रूप विनाश और संकटों से मुक्ति का प्रतीक है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, मां कालरात्रि ने रक्तबीज राक्षस का वध किया था। उनकी उपासना से साधक को मानसिक और शारीरिक बल प्राप्त होता है। मां के आशीर्वाद से शत्रुओं का नाश होता है और जीवन में सुख-शांति का आगमन होता है।

नवरात्रि के सातवें दिन का संदेश

मां कालरात्रि की पूजा करते समय मन में सकारात्मक सोच और दृढ़ विश्वास रखें। इस दिन की पूजा से मनोवांछित फल प्राप्त होता है और कष्टों से मुक्ति मिलती है। सप्तमी का दिन भक्तों के लिए आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है। चैत्र नवरात्रि के इस पावन पर्व पर मां कालरात्रि की कृपा से आपके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आगमन हो। जय माता दी!

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