Stethoscope का आविष्कार कैसे हुआ ? बड़ी ही रोचक है इसकी कहानी. जानें मेडिकल साइंस से जुड़ी रोचक कहानियों के बारें में !

Stethoscope का  आविष्कार कैसे हुआ ? बड़ी ही रोचक है इसकी कहानी. जानें मेडिकल साइंस से जुड़ी रोचक कहानियों के बारें में !
Last Updated: Sun, 22 Jan 2023

Stethoscope का आविष्कार कैसे हुआ ? बड़ी ही रोचक है इसकी कहानी. जानें मेडिकल साइंस से जुड़ी रोचक कहानियों के बारें में !

Stethoscope का अविष्कार René Theophile Haecnic Linnec ने 1816 में किया था और उसकी शर्म और हिचकिचाहट ने इसे महान आविष्कार में बदल दिया। स्टेथोस्कोप के पहले आविष्कार से पहले डॉक्टर रोगी की जांच के लिए उसके सीने के पास कान लगाकर धड़कनें सुनते थे। लिनेक ने यह आविष्कार किया क्योंकि उन्हें एक महिला की जांच के दौरान शर्म और झिझक हुई, और इसने उन्हें एक नई तकनीक का आविष्कार करने के लिए प्रेरित किया। इस प्रयोग से आग्रही लीनेक ने एक रबर नलिका का उपयोग करके स्टेथोस्कोप बनाया, जो कान और रोगी के छाती को जोड़ता है। उन्होंने इसे "स्टेथोस्कोप" कहा और इसका अर्थ है "छाती का परीक्षण"।

लिनेक का आविष्कार यूरोप और फिर अमेरिका में प्रसार हुआ और इसने चिकित्सा विज्ञान में बड़ी सफलता प्राप्त की। उनकी मौत के बाद, उन्हें इस आविष्कार के लिए विशेष महत्वपूर्णता दी गई, और उन्होंने इसे अपने जीवन की सबसे बड़ी विरासत कहा। आगे बढ़ते हुए, साल 1840 में डॉक्टर Goldan Ward ने stethoscope के लिए flexible tube का इस्तेमाल किया और 1851 में आयरिश डॉक्टर Arthur Leared ने binaural stethoscope का आविष्कार किया, जिसमें दोनों कानों से सुनने की सुविधा थी। साल 1852 में George Philip Cammann ने stethoscope के डिज़ाइन में सुधार कर इसे और भी परिपूर्ण बनाया।

क्या होता है Stethoscope ?

स्टेथोस्कोप एक चिकित्सा उपकरण है जिसका उपयोग किसी मरीज की परिसंचरण स्थिति की जांच करने के लिए किया जाता है। इसमें दो भाग होते हैं, एक घंटी और डायाफ्राम वाला चेस्ट ब्लॉक और एक ईयरपीस। दोनों भाग रबर ट्यूब द्वारा जुड़े हुए हैं। स्टेथोस्कोप का उपयोग करके हृदय, फेफड़े, पेट, धमनियों और नसों को प्रभावित करने वाले रोगों का निदान किया जा सकता है। डॉक्टर इसका उपयोग इन अंगों द्वारा उत्पन्न ध्वनियों को सुनने और यह निर्धारित करने के लिए करते हैं कि लय नियमित है या अनियमित। अनियमित ध्वनियाँ किसी अंतर्निहित स्वास्थ्य समस्या का संकेत दे सकती हैं, जिससे चिकित्सा परीक्षाओं के लिए अच्छी गुणवत्ता वाला स्टेथोस्कोप आवश्यक हो जाता है।

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किसने किया Stethoscope का अविष्कार ?

स्टेथोस्कोप के आविष्कार का श्रेय 1816 में रेने थियोफाइल हैकनिक लिनेक को दिया जाता है। स्टेथोस्कोप से पहले, डॉक्टर मरीज की छाती के पास अपना कान रखकर मरीज की दिल की धड़कन सुनते थे। लिनेक का आविष्कार इस पद्धति से जुड़ी शर्मिंदगी और झिझक से बचने की आवश्यकता से प्रेरित था। दिल की बीमारी से जूझ रही एक महिला की जांच के दौरान, लिनेक को एक पल की झिझक और परेशानी महसूस हुई। इस पर काबू पाने के लिए उन्होंने कागज के एक टुकड़े को मोड़कर एक ट्यूब बनाई। एक सिरे को महिला की छाती पर और दूसरे को अपने कान के पास रखकर, उसने सफलतापूर्वक उसके दिल की धड़कनें सुनीं। बांसुरीवादक के रूप में अपने अनुभव और अपनी पृष्ठभूमि से प्रेरित होकर, लिनेक ने बाद में लकड़ी से बने खोखले मॉडल विकसित किए और इस उपकरण का नाम "स्टेथोस्कोप" रखा। यह नाम ग्रीक शब्द "स्टेथोस" (जिसका अर्थ है छाती) और "स्कोपोस" (जिसका अर्थ है परीक्षा) से लिया गया है।

लिननेक के आविष्कार ने यूरोप में लोकप्रियता हासिल की और बाद में अमेरिका तक फैल गया। 1826 में 45 वर्ष की आयु में तपेदिक के कारण उनकी मृत्यु के बावजूद, लिनेक का स्टेथोस्कोप चिकित्सा विज्ञान में एक महत्वपूर्ण प्रगति बन गया। बाद के सुधार, जैसे 1840 में डॉ. गोल्डन वार्ड द्वारा लचीली ट्यूबों का उपयोग, 1851 में डॉ. आर्थर लीरेड द्वारा बाइनॉरल स्टेथोस्कोप की शुरूआत, और 1852 में जॉर्ज फिलिप कैममैन द्वारा किए गए परिशोधन ने स्टेथोस्कोप की दक्षता को और बढ़ा दिया। 

 

Stethoscope में किया बदलाव, पहला था सिर्फ एक कान वाला Stethoscope 

उस अवधि के दौरान, दिल की धड़कन सुनने के लिए आमतौर पर केवल एक कान का उपयोग किया जाता था। इसलिए, 1840 में, गोल्डन वार्ड नाम के एक डॉक्टर ने एक लचीली ट्यूब को शामिल करके स्टेथोस्कोप में एक महत्वपूर्ण सुधार किया। 1851 में, आयरिश डॉक्टर आर्थर लीयरड ने बाइन्यूरल स्टेथोस्कोप का आविष्कार किया, जिससे दोनों कानों से सुनने की सुविधा मिली। वर्ष 1852 में जॉर्ज फिलिप कैममैन ने स्टेथोस्कोप के डिज़ाइन को परिष्कृत करते हुए विभिन्न सुधारों के माध्यम से इसे और अधिक परिपूर्ण बनाया।

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