कोलकाता: तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी को कलकत्ता हाईकोर्ट ने तीन आपराधिक मामलों में अंतरिम सुरक्षा दी है। अदालत ने कहा कि फिलहाल उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ करने की जरूरत नहीं है। पुलिस को तीनों FIR के संबंध में 30 नवंबर 2026 तक उनके खिलाफ कोई जबरन कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया गया है।
जस्टिस सौगत भट्टाचार्य की पीठ ने कहा कि अभिषेक बनर्जी को जांच में सहयोग करना होगा और पुलिस की ओर से जारी नोटिस का पालन करना होगा। पूछताछ या किसी अन्य जांच प्रक्रिया के लिए बुलाए जाने पर उन्हें कम से कम 48 घंटे का नोटिस देना होगा। अदालत ने कहा कि यदि अभिषेक बनर्जी जांच में सहयोग नहीं करते हैं तो राज्य पुलिस अदालत का रुख कर सकती है।
यह आदेश उन तीन FIR से संबंधित है, जिनका विवरण अभिषेक बनर्जी की याचिका में दिया गया था। इनमें भवानीपुर थाने की FIR नंबर 121, 27 मई 2026; कालिकाता अशुति थाने की FIR नंबर 140, 16 जून 2026; और विष्णुपुर थाने की FIR नंबर 668, 2026 शामिल हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि मौजूदा आदेश केवल इन्हीं तीन मामलों पर लागू होगा।
अभिषेक बनर्जी ने कई FIR को चुनौती देते हुए अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि उनके खिलाफ दर्ज मामले राजनीतिक रूप से प्रेरित हैं। सुनवाई के दौरान उनके वकील ने इन मामलों में राहत की मांग की। राज्य सरकार ने इसका विरोध करते हुए जांच जारी रखने की आवश्यकता बताई।
राज्य की ओर से दलील दी गई कि यदि FIR में संज्ञेय अपराध का खुलासा होता है तो शुरुआती स्तर पर आपराधिक कार्रवाई को खत्म नहीं किया जा सकता। अभियोजन पक्ष ने कहा कि जांच एजेंसी को मामले की पूरी जांच करने का अवसर मिलना चाहिए। अदालत ने मौजूदा चरण में हिरासत में पूछताछ को आवश्यक नहीं माना और अभिषेक बनर्जी को अंतरिम सुरक्षा दी।
अदालत ने स्पष्ट किया कि तीनों FIR खत्म नहीं की गई हैं और उनकी जांच जारी रहेगी। अभिषेक बनर्जी को जांच में सहयोग करने की शर्त पर सुरक्षा दी गई है। पुलिस को जांच की प्रगति की रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया गया है। अदालत अगली सुनवाई में जांच की स्थिति की समीक्षा करेगी।
मामले की अगली सुनवाई 23 नवंबर को होगी। मौजूदा अंतरिम सुरक्षा 30 नवंबर तक या अदालत के अगले आदेश तक लागू रहेगी, जो भी पहले हो।
सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि अभिषेक बनर्जी ने कुल 16 FIR को लेकर राहत की मांग की थी। हालांकि अदालत ने कहा कि जिन तीन FIR की पूरी जानकारी याचिका में उपलब्ध कराई गई है, फिलहाल आदेश उन्हीं तक सीमित रहेगा।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि एक ही याचिका में कई FIR को चुनौती देना अपने आप में गलत नहीं है। अदालत के अनुसार, हर FIR के लिए अलग-अलग याचिका दाखिल करने से मुकदमों की संख्या अनावश्यक रूप से बढ़ सकती है। हालांकि इस मामले में जिन FIR का पूरा विवरण उपलब्ध था, अदालत ने फिलहाल उन्हीं पर आदेश दिया।
विदेश यात्रा के संबंध में हाईकोर्ट ने कहा कि उसके इस आदेश से सुप्रीम कोर्ट द्वारा अभिषेक बनर्जी को चिकित्सा उपचार के लिए तीन सप्ताह विदेश जाने की दी गई अनुमति प्रभावित नहीं होगी। हालांकि सामान्य तौर पर विदेश यात्रा के लिए हाईकोर्ट की अनुमति की शर्त लागू रहेगी।
इससे पहले 21 अगस्त को कलकत्ता हाईकोर्ट ने तीन अन्य मामलों में भी अभिषेक बनर्जी को अंतरिम सुरक्षा दी थी। इनमें दो मामले सेबाश्रय स्वास्थ्य शिविरों से जुड़े थे। उस समय अदालत की ओर से यह टिप्पणी भी सामने आई थी कि एक ही व्यक्ति के खिलाफ लगातार कई FIR दर्ज होने की स्थिति में सुरक्षा के सवाल पर अदालत को विचार करना होगा।
मंगलवार के आदेश के बाद तीन मामलों में अभिषेक बनर्जी के खिलाफ तत्काल गिरफ्तारी या अन्य जबरन पुलिस कार्रवाई पर 30 नवंबर तक रोक रहेगी। हालांकि उन्हें जांच में शामिल होना और पुलिस के नोटिस का जवाब देना होगा। यह राहत जांच से छूट नहीं है, बल्कि अंतरिम सुरक्षा है।
तीनों FIR की जांच जारी रहेगी और पुलिस को जांच की प्रगति रिपोर्ट दाखिल करनी होगी। अदालत आगे की दलीलों और जांच की स्थिति के आधार पर मामले पर विचार करेगी। अंतिम फैसला अभी बाकी है।









