दरभंगा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में रैपिडुर की कमी, फ्रैक्चर मरीजों को बाजार से खरीदना पड़ रहा प्लास्टर का सामान

दरभंगा मेडिकल कॉलेज अस्पताल के ऑर्थोपेडिक विभाग में रैपिडुर उपलब्ध नहीं होने से फ्रैक्चर मरीजों के परिजनों को प्लास्टर के लिए आवश्यक सामान बाजार से खरीदकर लाना पड़ रहा है। अस्पताल अधीक्षक ने रैपिडुर जल्द उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है।
दरभंगा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में रैपिडुर की कमी, फ्रैक्चर मरीजों को बाजार से खरीदना पड़ रहा प्लास्टर का सामान
Photo Credit / Attribution: Google

दरभंगा मेडिकल कॉलेज अस्पताल के ऑर्थोपेडिक विभाग में रैपिडुर उपलब्ध नहीं होने के कारण फ्रैक्चर के मरीजों और उनके परिजनों को प्लास्टर के लिए आवश्यक सामान बाजार से खरीदकर लाना पड़ रहा है। सरकारी अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचे मरीजों को बाहर से सामग्री खरीदने के लिए कहे जाने के कारण अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ रहा है। इस स्थिति को लेकर मरीजों और उनके परिजनों में नाराजगी भी देखी जा रही है।

ऑर्थोपेडिक विभाग में रोजाना बड़ी संख्या में दुर्घटना, गिरने या अन्य कारणों से फ्रैक्चर हुए मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। इनमें कई मरीजों को तत्काल प्लास्टर की आवश्यकता होती है। इलाज की प्रक्रिया शुरू होने के बाद जब परिजनों को प्लास्टर के लिए आवश्यक सामग्री बाजार से खरीदने के लिए कहा जाता है, तो उन्हें अस्पताल के बाहर मेडिकल स्टोर जाना पड़ता है।

रैपिडुर की उपलब्धता नहीं होने से मरीजों को हो रही परेशानी का मामला सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन ने भी स्थिति पर संज्ञान लिया है। अस्पताल अधीक्षक ने बताया कि रैपिडुर जल्द उपलब्ध कराया जाएगा। अस्पताल प्रशासन की ओर से इसे जल्द मंगाने की बात कही गई है, ताकि फ्रैक्चर मरीजों को इलाज के दौरान बाहर से सामान खरीदने की समस्या का सामना न करना पड़े।

फ्रैक्चर के मामलों में प्लास्टर उपचार की एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। हड्डी टूटने के बाद चिकित्सक मरीज की जांच कर फ्रैक्चर की स्थिति के अनुसार उपचार तय करते हैं। कई मामलों में प्रभावित हिस्से को स्थिर रखने के लिए प्लास्टर किया जाता है। इसके लिए आवश्यक सामग्री की उपलब्धता अस्पताल में रहना जरूरी है, विशेषकर ऐसे सरकारी अस्पताल में जहां दूर-दराज के क्षेत्रों से मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं।

दरभंगा मेडिकल कॉलेज अस्पताल उत्तर बिहार के प्रमुख सरकारी चिकित्सा संस्थानों में शामिल है। यहां दरभंगा के अलावा मधुबनी, समस्तीपुर, सीतामढ़ी, सुपौल, मधेपुरा और आसपास के क्षेत्रों से भी मरीज पहुंचते हैं। गंभीर चोट और फ्रैक्चर के मरीज भी बड़ी संख्या में यहां इलाज के लिए आते हैं। ऐसे में ऑर्थोपेडिक विभाग में किसी आवश्यक सामग्री की कमी का असर मरीजों और उनके परिजनों पर पड़ता है।

कई मरीज आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आते हैं। उनके लिए अस्पताल में इलाज के दौरान अतिरिक्त सामान खरीदना परेशानी का कारण बन सकता है। अस्पताल में आवश्यक सामग्री उपलब्ध नहीं होने पर परिजनों को पहले मेडिकल स्टोर ढूंढना पड़ता है और फिर सामान लेकर अस्पताल लौटना पड़ता है। इससे इलाज की प्रक्रिया में समय भी लग सकता है।

मरीजों के परिजनों का कहना है कि सरकारी अस्पताल में इलाज के लिए आने पर उन्हें उम्मीद रहती है कि उपचार से संबंधित जरूरी सामग्री अस्पताल से ही उपलब्ध होगी। लेकिन प्लास्टर के लिए इस्तेमाल होने वाला सामान बाहर से खरीदने को कहा जाता है तो उन्हें आर्थिक और मानसिक दोनों तरह की परेशानी होती है। खासकर दुर्घटना में घायल मरीज के साथ आए परिजनों के लिए अस्पताल से बाहर जाकर सामान लाना आसान नहीं होता।

ऑर्थोपेडिक विभाग में फ्रैक्चर मरीजों की संख्या को देखते हुए रैपिडुर जैसे आवश्यक सामान की नियमित आपूर्ति जरूरी है। यदि आपूर्ति में देरी होती है तो इसका असर उपचार व्यवस्था पर पड़ सकता है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि सामान की कमी दूर करने के लिए जल्द व्यवस्था की जाएगी।

अस्पताल अधीक्षक की ओर से रैपिडुर जल्द उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया है। अस्पताल प्रशासन की ओर से सामग्री की आपूर्ति शुरू करने की बात कही गई है। रैपिडुर की उपलब्धता के साथ यह भी महत्वपूर्ण होगा कि अस्पताल में इसका नियमित स्टॉक बनाए रखने की व्यवस्था हो।

सरकारी अस्पतालों में मरीजों की संख्या सामान्य अस्पतालों की तुलना में अधिक होती है। इसलिए आवश्यक मेडिकल सामग्री का पर्याप्त स्टॉक बनाए रखना अस्पताल प्रशासन की जिम्मेदारी होती है। ऑर्थोपेडिक विभाग में प्लास्टर सामग्री की उपलब्धता को लेकर भी ऐसी व्यवस्था की जरूरत है, ताकि फ्रैक्चर मरीजों को उपचार के लिए अनावश्यक रूप से बाजार पर निर्भर न रहना पड़े।

फ्रैक्चर के मामलों में चोट के बाद चिकित्सकीय जांच और प्रभावित हिस्से को उचित तरीके से स्थिर करना जरूरी हो सकता है। ऐसे में प्लास्टर की सामग्री उपलब्ध नहीं होने पर मरीज और उनके परिजन परेशान होते हैं। दरभंगा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में आने वाले मरीजों में बड़ी संख्या आसपास के जिलों और ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले लोगों की है। उनके लिए अस्पताल परिसर से बाहर मेडिकल स्टोर तक जाना और सामान लेकर वापस लौटना अतिरिक्त परेशानी पैदा करता है।

फिलहाल ऑर्थोपेडिक विभाग में रैपिडुर की कमी के कारण मरीजों को प्लास्टर का सामान बाजार से खरीदना पड़ रहा है। अस्पताल अधीक्षक ने इसे जल्द उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है। मरीजों और उनके परिजनों को अब सामग्री की आपूर्ति शुरू होने का इंतजार है, ताकि फ्रैक्चर के इलाज के दौरान उन्हें अतिरिक्त खर्च और बाहर से सामान लाने की समस्या का सामना न करना पड़े।

Leave a comment