पूर्व CM मायावती अपना 70वां जन्मदिन मना रही हैं। इस अवसर पर CM योगी आदित्यनाथ ने उन्हें बधाई दी और अच्छे स्वास्थ्य व दीर्घायु की कामना की। बसपा जिलों में विशेष कार्यक्रम आयोजित कर रही है।
Mayawati Birthday: उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बहुजन समाज पार्टी (BSP) की सुप्रीमो मायावती आज अपना 70वां जन्मदिन मना रही हैं। इस खास मौके पर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) ने उन्हें जन्मदिन की बधाई दी और उनके अच्छे स्वास्थ्य और लंबी उम्र की कामना की।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का संदेश
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए मुख्यमंत्री ने लिखा कि वे प्रभु श्रीराम से मायावती के दीर्घायु होने और उत्तम स्वास्थ्य की कामना करते हैं। उनके इस संदेश से दोनों राजनीतिक दलों के बीच सौहार्दपूर्ण संबंधों का संकेत भी मिलता है।
बसपा की ओर से जिलों में विशेष कार्यक्रम
मायावती के जन्मदिन के अवसर पर बसपा ने उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित किए हैं। राजधानी लखनऊ में पार्टी के पदाधिकारी और कार्यकर्ता इस मौके पर एकत्रित होंगे। बसपा सुप्रीमो मायावती इस अवसर पर पार्टी के भविष्य की रणनीति और आगे का रोडमैप भी पेश करेंगी।

मायावती का राजनीतिक सफर
मायावती का जन्म 15 जनवरी 1956 को दिल्ली के एक साधारण परिवार में हुआ। प्रारंभ में वे एक शिक्षिका के रूप में कार्यरत थीं। राजनीति में उनकी रुचि बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक कांशीराम से प्रेरित होकर उत्पन्न हुई। धीरे-धीरे उन्होंने पार्टी में प्रमुख भूमिका निभाई और कांशीराम की मुख्य उत्तराधिकारी बनकर उभरीं।
चार बार उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री
मायावती ने कुल चार बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। वे भारत की पहली दलित महिला मुख्यमंत्री बनीं। 2007 से 2012 के उनके कार्यकाल को विशेष रूप से याद किया जाता है, क्योंकि उस दौरान उन्होंने पूर्ण बहुमत वाली सरकार बनाई। इस दौरान उन्होंने सोशल इंजीनियरिंग के माध्यम से दलित और ब्राह्मणों का गठजोड़ कर नया राजनीतिक प्रयोग सफल किया।
प्रशासनिक दृष्टि से मायावती
प्रशासनिक तौर पर मायावती को एक आयरन लेडी के रूप में देखा जाता है। वे अपनी सख्त कार्यशैली और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की नीतियों के लिए जानी जाती थीं। उनके कार्यकाल में उत्तर प्रदेश में कई एक्सप्रेसवे, पार्क और स्मारक निर्मित हुए। इनमें डॉ. बी.आर. अंबेडकर और कांशीराम के सम्मान में बनाए गए विशाल स्मारक शामिल हैं।
हालांकि, इन स्मारकों पर भारी खर्च को लेकर वे कई बार विवादों और आलोचनाओं के घेरे में भी रहीं। लेकिन उनके समर्थक इसे विकास और दलित समाज के सम्मान का प्रतीक मानते हैं। राजनीतिक दृष्टि से यह उनका प्रयास था कि समाज के वंचित वर्गों को आत्मसम्मान और पहचान मिले।











