संसद सत्र के बीच मोदी, अमित शाह और राहुल गांधी की 88 मिनट की सीक्रेट मीटिंग में सूचना आयोग की नियुक्तियों पर गहन चर्चा हुई। राहुल गांधी ने चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता, सामाजिक प्रतिनिधित्व और लंबित मामलों पर गंभीर आपत्तियां दर्ज कराईं।
New Delhi: संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान 10 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की एक बेहद गोपनीय और अहम बैठक हुई। यह मीटिंग लगभग 88 मिनट चली और इसके बाहर निकलने के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा का माहौल बन गया कि संसद में जिस तरह राहुल गांधी और अमित शाह के बीच तीखी बहस देखने को मिली, उसी दिन बंद कमरे में आखिर किस मुद्दे पर तीनों नेताओं ने विस्तृत बातचीत की। मीटिंग का मुख्य केंद्र सूचना आयोग से जुड़े अहम पदों पर नियुक्तियां थीं और इसी मुद्दे पर राहुल गांधी ने कई गंभीर आपत्तियां भी दर्ज कराईं।
राहुल गांधी ने नियुक्तियों की प्रक्रिया पर उठाए सवाल
मीटिंग में राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के सामने साफ तौर पर कहा कि केंद्रीय सूचना आयोग यानी CIC और उसके तहत आने वाले सूचना आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है। राहुल गांधी ने नियुक्त किए जाने वाले नामों पर अधिक जानकारी देने की मांग की और इस बात पर चिंता जताई कि इन चयन मानकों को सार्वजनिक नहीं किया जा रहा है।
राहुल गांधी ने यह भी कहा कि इन पदों पर ऐसे लोग चुने जाने चाहिए जिनकी समझ, अनुभव और स्वतंत्रता पर कोई सवाल न उठे। उन्होंने यह आपत्ति भी लिखित रूप से दर्ज कराई और कहा कि मौजूदा चयन प्रक्रिया जनता के हितों के अनुकूल नहीं लगती।
SC, ST, OBC और Minorities की भागीदारी का मुद्दा उठा
राहुल गांधी ने इस बैठक में सामाजिक प्रतिनिधित्व का मुद्दा भी जोरदार तरीके से उठाया। उन्होंने कहा कि देश की 90% आबादी SC, ST, OBC और Minorities से आती है और इन समुदायों की उच्च पदों पर मौजूदगी बेहद कम है। उन्होंने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री से इस बात पर गंभीरता से विचार करने की अपील की कि शीर्ष संवैधानिक संस्थानों में व्यापक सामाजिक भागीदारी सुनिश्चित की जाए।
सूचना आयोग में लंबित मामलों ने बढ़ाई चिंता
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मीटिंग के दौरान एक और मुद्दा चर्चा में आया कि केंद्रीय सूचना आयोग के पास हजारों मामलों का बोझ है और मुख्य सूचना आयुक्त (CIC) का पद पिछले कई महीनों से खाली है। CIC की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार उसके पास 3083 मामले लंबित हैं। 2023 में मुख्य सूचना आयुक्त नियुक्त हुए हीरालाल सामारिया ने 65 वर्ष की आयु सीमा पूरी होने पर 13 सितंबर को पद छोड़ दिया था।
इस पद के खाली रहने के कारण लंबित अपीलों का निस्तारण महीनों नहीं बल्कि वर्षों में हो रहा है। इसी कारण संसद में भी सरकार पर यह आरोप लगाया गया कि वह सूचना के अधिकार को कमजोर कर रही है और आरटीआई आवेदकों को जवाब देने से बच रही है।
राज्यसभा में उठा खाली पदों का मुद्दा
10 दिसंबर को राज्यसभा में भी CIC और सूचना आयुक्तों के खाली पदों का मुद्दा उठा। तृणमूल कांग्रेस सांसद मोहम्मद नदीमुल हक ने कहा कि इतनी लंबी देरी के कारण नागरिकों की अपीलों पर निर्णय देर से आता है और जब तक सूचना मिलती है, तब तक उसका कोई महत्व नहीं रह जाता। उन्होंने सरकार को ‘No Data Available’ सरकार बताते हुए आरोप लगाया कि सरकार पारदर्शिता से बचने की कोशिश कर रही है। इस आलोचना ने सूचना आयोग से जुड़े पदों पर त्वरित नियुक्तियों की आवश्यकता को और जोरदार बना दिया।
बैठक में किन नियुक्तियों पर हुई चर्चा
राहुल गांधी ने जब बैठक से बाहर निकलने पर मीडिया को जानकारी दी तो स्पष्ट हुआ कि इस बैठक में मुख्य सूचना आयुक्त, आठ सूचना आयुक्त और एक सतर्कता आयुक्त की नियुक्तियों पर विस्तृत चर्चा हुई। इससे पहले यह अनुमान लगाया जा रहा था कि बैठक का संबंध मुख्य चुनाव आयुक्त या चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों से है।
लेकिन बैठक खत्म होने के बाद यह स्पष्ट हुआ कि पूरा फोकस सूचना आयोग पर था। सूचना के अधिकार अधिनियम की धारा 12(3) के तहत प्रधानमंत्री इस चयन समिति के अध्यक्ष होते हैं, नेता प्रतिपक्ष इसके सदस्य होते हैं और प्रधानमंत्री की ओर से नामित एक केंद्रीय मंत्री भी समिति में शामिल होते हैं। यही समिति CIC और सूचना आयुक्तों के लिए नामों का चयन करती है और सिफारिश करती है।
क्यों बनी 88 मिनट की यह मीटिंग खास
यह बैठक इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि संसद के भीतर जिस तरह तीखा राजनीतिक टकराव दिखा, उसी के बीच तीनों बड़े नेताओं ने बंद कमरे में शांत माहौल में गंभीर मुद्दों पर बातचीत की। राहुल गांधी की लिखित असहमति और नियुक्ति प्रक्रिया पर सवालों ने सरकार पर दबाव बढ़ाया है। वहीं सरकार का तर्क है कि पारदर्शी प्रक्रिया के तहत ही नामों का चयन किया जा रहा है और जल्द ही सूचना आयोग की संरचना को पूरा किया जाएगा।









