समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री मोहम्मद आजम खान ने अपने सपनों के प्रोजेक्ट ‘मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट’ को लेकर चौंकाने वाला फैसला लिया है।
लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मोहम्मद आजम खान ने अपने जीवन के महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट ‘मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट’ को लेकर चौंकाने वाला फैसला लिया है। कानूनी विवादों और जेल यात्राओं के बीच आजम खान ने स्वयं, अपनी पत्नी डॉ. तंजीन फातिमा और छोटे बेटे अब्दुल्ला आजम के साथ ट्रस्ट के सभी पदों से औपचारिक इस्तीफा दे दिया।
इस फैसले के बाद ट्रस्ट के सुचारू संचालन के लिए नई कार्यकारिणी का गठन किया गया है। नई कार्यकारिणी में आजम खान की बहन निकहत अफलाक को अध्यक्ष बनाया गया है, जबकि उनके बड़े बेटे मोहम्मद अदीब आजम को ट्रस्ट का सचिव नियुक्त किया गया है। इसके अलावा, मुश्ताक अहमद सिद्दीकी को उपाध्यक्ष, सपा विधायक नसीर अहमद खान को संयुक्त सचिव और जावेद उर रहमान खान को कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है।
जेल में रहने के कारण आ रही थीं दिक्कतें
जौहर ट्रस्ट और इसके अंतर्गत आने वाले शैक्षणिक संस्थानों जैसे जौहर यूनिवर्सिटी और रामपुर पब्लिक स्कूल का संचालन पिछले कुछ समय से चुनौतियों का सामना कर रहा था। आजम खान और उनके परिवार के जेल में रहने के कारण ट्रस्ट के दैनिक कामकाज में व्यवधान आ रहा था। ट्रस्ट पर किसानों की जमीन कब्जाने सहित 30 से अधिक गंभीर मुकदमे दर्ज हैं, जिनका प्रभाव संस्थानों के सुचारू संचालन पर पड़ रहा था।
जानकारों का कहना है कि आजम खान का यह कदम न केवल ट्रस्ट के भविष्य की सुरक्षा के लिए अहम था, बल्कि यह कानूनी विवादों और प्रशासनिक कार्रवाई से ट्रस्ट को बचाने की रणनीति भी माना जा रहा है। उनकी गैर-मौजूदगी में भी ट्रस्ट और उससे जुड़े संस्थानों का काम बिना किसी कानूनी अड़चन के चल सके, यही उद्देश्य इस फैसले के पीछे था।

नई कार्यकारिणी में जिम्मेदारियों का बंटवारा
नई कार्यकारिणी में अध्यक्ष और सचिव के अलावा अन्य पदों पर जिम्मेदारियां बांटी गई हैं। उपाध्यक्ष के रूप में मुश्ताक अहमद सिद्दीकी, संयुक्त सचिव के रूप में सपा विधायक नसीर अहमद खान और कोषाध्यक्ष के रूप में जावेद उर रहमान खान को नियुक्त किया गया है। इससे ट्रस्ट के सभी कामकाज का बारीकी से संचालन संभव होगा और विभिन्न परियोजनाओं का क्रियान्वयन सुचारू रूप से जारी रहेगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, आजम खान का ट्रस्ट से इस्तीफा देना एक स्ट्रेटेजिक रणनीति है। उन्होंने अपने परिवार को जिम्मेदारी देकर यह सुनिश्चित किया है कि उनकी गैर-मौजूदगी में भी ट्रस्ट की गतिविधियां, शैक्षणिक संस्थान और अन्य प्रोजेक्ट्स बिना किसी व्यवधान के चलते रहें। यह कदम ट्रस्ट की स्थिरता और दीर्घकालिक संचालन को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है।











