राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले के जवान पहलवान गुर्जर का दिल्ली आर्मी हॉस्पिटल में हार्ट अटैक से निधन हो गया। पैतृक गांव में तिरंगा यात्रा के बाद अंतिम संस्कार किया गया। परिवार और ग्रामीणों ने नम आंखों से वीर जवान को अंतिम विदाई दी।
चित्तौड़गढ़: जिले के भारतीय सेना के जवान पहलवान गुर्जर (29) का दिल्ली में ड्यूटी के दौरान हार्ट अटैक से निधन हो गया। वह नई दिल्ली में तैनात थे और राजपूत रेजिमेंट की 24वीं बटालियन में सेवा दे रहे थे।
बुधवार शाम ड्यूटी के दौरान उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई, जिसके बाद साथी जवानों ने उन्हें तुरंत आर्मी अस्पताल में भर्ती कराया। गुरुवार सुबह इलाज के दौरान डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
सैन्य सम्मान के साथ पैतृक गांव में अंतिम विदाई
जवान का पार्थिव शरीर शुक्रवार को उनके पैतृक गांव धीरजी का खेड़ा (भदेसर उपखंड) लाया गया, जहां पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।
गांव में पहुंचते ही माहौल शोक में बदल गया और हर आंख नम हो गई। सेना की ओर से उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया, जिसके बाद अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू हुई।
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तिरंगे में लिपटा वीर सपूत, 8 किलोमीटर लंबी यात्रा
जवान के पार्थिव शरीर को चित्तौड़गढ़ जिला के गंगरार से लेकर गांव तक लगभग 8 किलोमीटर लंबी तिरंगा यात्रा निकाली गई।
इस दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण, युवा और पूर्व सैनिक शामिल हुए। लोग तिरंगा झंडा लेकर “भारत माता की जय” और “पहलवान गुर्जर अमर रहे” के नारे लगाते हुए साथ चल रहे थे। पूरा रास्ता देशभक्ति और शोक के माहौल में डूबा रहा।
घर पहुंचते ही टूटा परिवार, मां-बाप और पत्नी बेसुध
जैसे ही जवान का शव घर पहुंचा, परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। मां उदी बाई और पत्नी विद्या पार्थिव देह से लिपटकर रोने लगीं। पिता रामलाल बेटे का शव देखकर फफक पड़े और खुद को संभाल नहीं पाए।
परिवार के सदस्यों की चीख-पुकार ने पूरे गांव को शोक में डाल दिया। हर कोई इस असामयिक मौत से स्तब्ध था।
मासूम बेटी ने दी पिता को अंतिम विदाई
इस भावुक पल में सबसे मार्मिक दृश्य तब सामने आया जब जवान की 3 साल की मासूम बेटी ने अपने पिता की पार्थिव देह पर पुष्प अर्पित किए।
मां की गोद में खड़ी बच्ची को शायद यह भी पूरी तरह समझ नहीं था कि वह अपने पिता को अंतिम विदाई दे रही है, लेकिन वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं।
सैन्य जीवन और सेवा की शुरुआत
पहलवान गुर्जर 20 मार्च 2017 को भारतीय सेना में भर्ती हुए थे। यह उनका बचपन का सपना था। शुरुआती शिक्षा उन्होंने अपने गांव धीरजी का खेड़ा में प्राप्त की, जबकि आगे की पढ़ाई भदेसर और चित्तौड़गढ़ में पूरी की।
सेना में चयन के लिए उन्होंने दो बार प्रयास किया। पहली बार सफलता नहीं मिली, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और दूसरे प्रयास में सेना में चयनित होकर देश सेवा का सपना पूरा किया।
परिवार से जुड़ाव और जिम्मेदारियां
परिजनों के अनुसार, जवान अपने परिवार से बेहद जुड़े हुए थे। वह हर दिन ड्यूटी खत्म होने के बाद रात में घर फोन करते थे और परिवार का हालचाल लेते थे।
पिछले कुछ दिनों से उनकी पत्नी दिल्ली में ही उनके साथ रह रही थी। परिवार के अनुसार, वह हमेशा अपनी बड़ी बहन की तबीयत को लेकर चिंतित रहते थे और नियमित रूप से उसके इलाज की जानकारी लेते थे।
खेत और परिवार की चिंता भी रहती थी साथ
परिवार ने बताया कि पहलवान गुर्जर खेती-किसानी और घर की जिम्मेदारियों को लेकर भी जागरूक रहते थे। कुछ समय पहले उन्होंने फोन पर कहा था कि मौसम बदल रहा है, इसलिए फसल की सुरक्षा का ध्यान रखा जाए।
यह दर्शाता है कि वह अपने सैन्य कर्तव्यों के साथ-साथ पारिवारिक जिम्मेदारियों को भी पूरी गंभीरता से निभाते थे।
पूरे गांव में शोक, अंतिम संस्कार में उमड़ा जनसैलाब
अंतिम संस्कार के दौरान पूरे गांव और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। सहकारी समिति के पीछे खाली जमीन पर अंतिम संस्कार किया गया, जहां पिता रामलाल और बड़े भाई रमेश गुर्जर ने चिता को मुखाग्नि दी।
इस दौरान सेना और प्रशासन के अधिकारी भी मौजूद रहे और पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई।
एक बहादुर सैनिक को श्रद्धांजलि
पहलवान गुर्जर का जीवन देश सेवा और कर्तव्यनिष्ठा का प्रतीक रहा। उनके निधन से न केवल परिवार बल्कि पूरा क्षेत्र शोक में डूब गया है।
उनकी तिरंगा यात्रा, सैन्य सम्मान और जनसैलाब यह दर्शाता है कि उन्होंने अपने जीवन में लोगों के दिलों में गहरी छाप छोड़ी थी।










