आदि कैलास और ऊं पर्वत यात्रा में इस वर्ष रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। 33 दिनों में 30 हजार से अधिक यात्रियों ने दर्शन किए हैं, जिससे स्थानीय रोजगार को बढ़ावा मिला है और सरकार को करीब 1.8 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है।
पिथौरागढ़: उत्तराखंड की प्रसिद्ध आदि कैलास और ऊं पर्वत यात्रा इस वर्ष नए रिकॉर्ड बना रही है। यात्रा शुरू होने के महज 33 दिनों के भीतर 30 हजार से अधिक श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। बढ़ती यात्री संख्या से जहां सीमांत क्षेत्रों में पर्यटन और रोजगार को गति मिली है, वहीं सरकार को भी लाखों रुपये का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त हुआ है।
33 दिनों में 30 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने किए दर्शन
एक मई से शुरू हुई आदि कैलास और ऊं पर्वत यात्रा को इस वर्ष श्रद्धालुओं का अभूतपूर्व प्रतिसाद मिल रहा है। यात्रा के शुरुआती 33 दिनों में ही 30,016 से अधिक श्रद्धालुओं को परमिट जारी किए जा चुके हैं। यह संख्या पिछले वर्षों की तुलना में काफी तेज वृद्धि को दर्शाती है।
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यात्रा से जुड़े अधिकारियों का मानना है कि यदि यही रफ्तार बनी रही तो इस वर्ष यात्रा समाप्त होने तक श्रद्धालुओं की संख्या पिछले वर्ष के मुकाबले दोगुने से भी अधिक हो सकती है। वर्तमान आंकड़े यह संकेत दे रहे हैं कि आदि कैलास अब देश के प्रमुख आध्यात्मिक और धार्मिक पर्यटन स्थलों में तेजी से अपनी पहचान बना रहा है।
पीएम मोदी की यात्रा के बाद बढ़ी लोकप्रियता
अक्टूबर 2023 में Narendra Modi के आदि कैलास दौरे के बाद इस क्षेत्र को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिली। इसके बाद से यहां आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है।
वर्ष 2024 में लगभग चार महीने तक चली यात्रा के दौरान 29,352 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए थे। वहीं 2025 में यह संख्या बढ़कर 36,526 तक पहुंच गई। अब 2026 में शुरुआती एक महीने के भीतर ही 30 हजार का आंकड़ा पार हो जाने से नए रिकॉर्ड बनने की संभावना मजबूत हो गई है।
स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिल रहा बड़ा लाभ
आदि कैलास यात्रा का सबसे बड़ा लाभ सीमांत क्षेत्रों में रहने वाले स्थानीय लोगों को मिल रहा है। यात्रा मार्ग पर टैक्सी सेवा, होमस्टे, होटल, रेस्टोरेंट और अन्य पर्यटन गतिविधियों से जुड़े 500 से अधिक परिवारों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
स्थानीय व्यवसायियों का कहना है कि यात्रियों की बढ़ती संख्या से क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियां बढ़ी हैं और स्वरोजगार के नए अवसर भी पैदा हुए हैं। इससे सीमांत गांवों की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिल रही है।
सरकार को मिला 1.8 करोड़ रुपये का राजस्व
श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या का सीधा लाभ सरकारी राजस्व में भी दिखाई दे रहा है। अब तक जारी किए गए परमिट और मेडिकल जांच शुल्क के माध्यम से सरकार को लगभग 1.8 करोड़ रुपये की आय प्राप्त हो चुकी है।
यात्रा में शामिल होने वाले प्रत्येक श्रद्धालु को इनर लाइन परमिट और मेडिकल शुल्क के रूप में 600 रुपये का भुगतान करना पड़ता है। बड़ी संख्या में यात्रियों के पहुंचने से यह राजस्व लगातार बढ़ रहा है।
मानसून के दौरान रहेगी अस्थायी रोक
यात्रा प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों के अनुसार मानसून के दौरान मौसम की स्थिति को देखते हुए यात्रा को कुछ समय के लिए स्थगित किया जाएगा। बारिश का मौसम समाप्त होने के बाद सितंबर के मध्य से यात्रा दोबारा शुरू की जाएगी, जो 30 अक्टूबर तक संचालित होगी।
प्रशासन का कहना है कि यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी कारण मौसम और सड़क मार्गों की स्थिति को ध्यान में रखते हुए यात्रा संचालन के संबंध में आवश्यक निर्णय लिए जाते हैं। इस वर्ष रिकॉर्ड श्रद्धालुओं की आमद को देखते हुए प्रशासन ने व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाने की दिशा में भी काम शुरू कर दिया है।









