अफ्रीका कप ऑफ नेशंस 2025 के फाइनल का विवाद अब खेल पंचाट की अदालत तक पहुंच गया है। सेनेगल ने अपना खिताब छीनने के फैसले को चुनौती दी है। CAS का फैसला तय करेगा कि आधिकारिक चैंपियन कौन होगा।
AFCON 2025: अफ्रीका कप ऑफ नेशंस (AFCON) 2025 के फाइनल का विवाद अब फुटबॉल मैदान से निकलकर खेल जगत की सर्वोच्च मध्यस्थ संस्थाओं में से एक, कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन फॉर स्पोर्ट (CAS) तक पहुंच गया है। जनवरी में मोरक्को को हराकर खिताब जीतने वाला सेनेगल अब उस फैसले को चुनौती दे रहा है, जिसके तहत उसका खिताब छीनकर मोरक्को को 3-0 से विजेता घोषित कर दिया गया था। CAS में होने वाली सुनवाई इस विवाद के अगले चरण को तय करेगी, हालांकि सुनवाई वाले दिन ही अंतिम फैसला आने की उम्मीद नहीं है।
यह मामला केवल एक फुटबॉल मैच के नतीजे का नहीं है। इसमें मैदान छोड़ने के नियमों, रेफरी के अधिकार, प्रतियोगिता के अनुशासन और फुटबॉल प्रशासन के फैसलों की वैधता जैसे महत्वपूर्ण सवाल शामिल हैं। एक ओर मोरक्को का फुटबॉल महासंघ नियमों के पालन पर जोर दे रहा है, तो दूसरी ओर सेनेगल का महासंघ CAF के फैसले को अनुचित और अस्वीकार्य बता चुका है।
क्या हुआ था AFCON 2025 के फाइनल में?
जनवरी में मोरक्को की राजधानी रबात स्थित प्रिंस मौले अब्देल्लाह स्टेडियम में खेले गए फाइनल में लगभग 66,000 दर्शक मौजूद थे। मेजबान मोरक्को 1976 के बाद पहली बार AFCON खिताब जीतने की कोशिश कर रहा था। मुकाबला निर्धारित समय के अंतिम हिस्से तक गोलरहित रहा, लेकिन इंजरी टाइम में घटनाओं ने नाटकीय मोड़ ले लिया।
सेनेगल को लगा कि इस्माइला सार ने निर्णायक गोल कर दिया है। हालांकि, रेफरी जीन-जैक्स नडाला पहले ही मोरक्को के पक्ष में फ्री-किक दे चुके थे। इसके बाद मैच के 98वें मिनट में वीडियो असिस्टेंट रेफरी (VAR) की समीक्षा के बाद मोरक्को को पेनल्टी मिल गई। इस फैसले से सेनेगल के खिलाड़ियों और कोचिंग स्टाफ में नाराजगी फैल गई।
सेनेगल के कोच पापे थियाव कुछ खिलाड़ियों और स्टाफ के साथ मैदान से बाहर चले गए। इसी दौरान स्टेडियम में तनाव बढ़ा और कुछ समर्थकों की सुरक्षा कर्मियों के साथ झड़पें भी हुईं। काफी देर तक खेल बाधित रहने के बाद मुकाबला दोबारा शुरू हुआ।
अतिरिक्त समय के 124वें मिनट में मोरक्को के पास खिताब जीतने का बड़ा मौका आया। रियल मैड्रिड के ब्राहिम डियाज पेनल्टी को पनेन्का शैली में गोलपोस्ट के बीच से चिप करने की कोशिश में चूक गए। सेनेगल के गोलकीपर एडुआर्ड मेंडी ने गेंद रोक ली। इसके बाद पापे गुएये ने अतिरिक्त समय में गोल कर सेनेगल को 1-0 से जीत दिला दी। टीम ने मैदान पर दूसरी बार AFCON ट्रॉफी उठाई, लेकिन विवाद यहीं समाप्त नहीं हुआ।
CAF ने क्यों बदला फाइनल का नतीजा?
फाइनल के बाद रॉयल मोरक्कन फुटबॉल फेडरेशन (FRMF) ने अफ्रीकी फुटबॉल परिसंघ (CAF) में शिकायत दर्ज कराई। मोरक्को का पक्ष था कि सेनेगल की टीम का मैदान छोड़ना प्रतियोगिता के नियमों का उल्लंघन था।
विवाद का केंद्र प्रतियोगिता नियमों का अनुच्छेद 82 बना। यह प्रावधान उन परिस्थितियों से संबंधित है, जिनमें कोई टीम रेफरी की अनुमति के बिना मैच समाप्त होने से पहले मैदान छोड़ देती है। नियम के अनुसार, ऐसी स्थिति में टीम को मुकाबले में हारा हुआ माना जा सकता है और प्रतियोगिता से बाहर किया जा सकता है।
मार्च में CAF की अपील बोर्ड ने मोरक्को के पक्ष में फैसला सुनाया। बोर्ड ने सेनेगल को मैच गंवाने वाला माना और मोरक्को को 3-0 से विजेता घोषित कर दिया। इस फैसले से मैदान पर 1-0 की जीत दर्ज करने वाले सेनेगल से खिताब छिन गया।

हालांकि, इस निर्णय को लेकर फुटबॉल जगत में बहस भी हुई। कुछ आलोचकों और CAF के एक पूर्व वरिष्ठ अधिकारी ने सवाल उठाया कि क्या मैदान छोड़ने की स्थिति में मैच छोड़ने या समाप्त करने का अधिकार केवल रेफरी के पास होता है। इस तरह विवाद केवल नियमों की व्याख्या तक सीमित नहीं रहा, बल्कि मैच अधिकारियों और फुटबॉल प्रशासन की भूमिका पर भी केंद्रित हो गया।
सेनेगल ने फैसले को बताया अनुचित
CAF के फैसले के बाद सेनेगल फुटबॉल फेडरेशन (FSF) ने कड़ा विरोध दर्ज कराया और CAS में अपील की। सेनेगल का पक्ष है कि खिताब छीनने का फैसला अनुचित और अस्वीकार्य है। महासंघ चाहता है कि खेल पंचाट CAF के निर्णय की समीक्षा करे और यह तय करे कि प्रतियोगिता के नियमों को इस मामले में सही तरीके से लागू किया गया या नहीं।
दूसरी ओर, मोरक्को का महासंघ नियमों के उचित अनुपालन की मांग पर कायम है। उसका तर्क है कि प्रतियोगिता में भाग लेने वाली सभी टीमों पर समान नियम लागू होने चाहिए और मैदान छोड़ने जैसी घटना को नियमों के अनुरूप देखा जाना चाहिए।
अब CAS के सामने मुख्य सवाल यह है कि सेनेगल के खिलाड़ियों और स्टाफ का मैदान छोड़ना नियमों के तहत किस तरह आंका जाना चाहिए, और क्या इस आधार पर मैच का नतीजा बदलकर मोरक्को को 3-0 की जीत देना उचित था। इन सवालों पर फैसला दोनों देशों के फुटबॉल इतिहास के लिहाज से बेहद अहम होगा।
CAS क्या है और उसका फैसला कितना महत्वपूर्ण होगा?
कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन फॉर स्पोर्ट की स्थापना 1984 में हुई थी। इसका मुख्यालय स्विट्जरलैंड के लॉजेन शहर में है। यह खेलों से जुड़े विवादों का निपटारा करने वाली स्वतंत्र मध्यस्थ संस्था है। खिलाड़ियों, टीमों और खेल महासंघों के बीच अनुबंध, ट्रांसफर, डोपिंग, भ्रष्टाचार और प्रतियोगिताओं के संचालन जैसे मामलों की सुनवाई इसके दायरे में आती है।
CAS के अधिकार को स्वीकार करने वाले खेल संगठनों के मामलों में इसके फैसले को निर्णायक माना जाता है। हालांकि, कुछ सीमित कानूनी परिस्थितियों में स्विट्जरलैंड की सर्वोच्च अदालत में फैसले को चुनौती देने की संभावना हो सकती है।
इस मामले की सुनवाई तीन मध्यस्थों का पैनल करेगा, जिन्हें खेल कानून के अनुभव के आधार पर चुना जाता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पैनल का नेतृत्व फ्रांसीसी खेल कानून विशेषज्ञ जेराल्ड सिमोन करेंगे। सुनवाई के बाद पैनल को दस्तावेजों, नियमों और दोनों पक्षों के तर्कों की समीक्षा करनी होगी। यदि फैसला तुरंत तैयार नहीं होता, तो निर्णय के लिए अतिरिक्त समय लग सकता है।
क्या सुनवाई वाले दिन ही मिलेगा फैसला?
सेनेगल और मोरक्को के समर्थक इस विवाद का जल्द समाधान चाहते हैं, लेकिन सुनवाई और अंतिम निर्णय दो अलग प्रक्रियाएं हैं। CAS को दोनों पक्षों के तर्कों और लागू नियमों का अध्ययन करना होगा। इसलिए सुनवाई के दिन ही विजेता की आधिकारिक पुष्टि हो जाएगी, ऐसा मानना सही नहीं होगा।
यदि CAS सेनेगल की अपील स्वीकार करता है, तो CAF के फैसले को रद्द करने या उसमें बदलाव करने का रास्ता खुल सकता है। इससे सेनेगल के मैदान पर जीते गए खिताब की स्थिति बहाल होने की संभावना बनेगी। इसके विपरीत, यदि CAS CAF के फैसले को बरकरार रखता है, तो मोरक्को को 3-0 से विजेता घोषित करने वाला निर्णय कायम रह सकता है। अंतिम परिणाम इस बात पर निर्भर करेगा कि पैनल नियमों और मामले के तथ्यों की व्याख्या कैसे करता है।
फुटबॉल प्रशासन के लिए भी अहम मामला
AFCON फाइनल का यह विवाद भविष्य में अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल प्रतियोगिताओं में अनुशासनात्मक नियमों के इस्तेमाल के लिए मिसाल बन सकता है। इसमें यह स्पष्ट होना महत्वपूर्ण है कि विरोध में मैदान छोड़ने पर क्या कार्रवाई की जा सकती है, रेफरी की अनुमति की क्या भूमिका है और मैच का परिणाम बदलने का अधिकार किस सीमा तक इस्तेमाल किया जा सकता है।
फिलहाल मोरक्को को CAF के फैसले के तहत विजेता घोषित किया गया है, जबकि सेनेगल उस निर्णय को चुनौती दे रहा है। CAS की सुनवाई इस लंबे विवाद को सुलझाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन अंतिम फैसला आने तक खिताब को लेकर कानूनी लड़ाई जारी रहेगी।










